16वीं गढ़वाल राइफल के सूबेदार स्वतंत्र सिंह (46) ने देश की सीमा की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उनके शहीद होने की खबर जैसे ही परिजनों को मिली, वे अचेत हो गए। 82 वर्षीय मां प्यारी देवी घर के सुबकते बिलखते हुए आंगन में ऐसे टहलने लगी, जैसे उसे बेटे के लौटने का इंतजार हो।
पत्नी रेखा देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। बेटे और बेटियों ने बताया कि अगस्त में ड्यूटी पर गए पापा ने फरवरी में छुट्टी लेकर आने की बात कही थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। वे छुट्टी से पहले ही लौट आए, लेकिन तिरंगे में लिपटकर।
शहीद सूबेदार स्वतंत्र सिंह रावत का परिवार कोटद्वार से करीब 30 किमी दूर कांडाखाल के पास उडियारी में रहता है। वे अपने पीछे चार बेटे बेटियों, पत्नी और वृद्ध मां को छोड़ गए हैं। बृहस्पतिवार शाम करीब छह बजे सेना की ओर से परिजनों को उनके शहीद होने की खबर लगी, तो परिजनों में कोहराम मच गया। पत्नी रेखा देवी अचेत हो गईं।
चार बच्चों में सबसे बड़े बेटे अंकित रावत ने बताया कि उनके परिजन, कुटुंब और गांव में शोक की लहर छा गई। वह बताते हैं कि पापा जुलाई में छुट्टी आए थे और 10 अगस्त को ड्यूटी पर चले गए। जाते समय पापा ने छोटी बहन शिवानी, संगीता और सबसे छोटे भाई आदित्य को फरवरी में घर आने की बात कही थी। गांव वाले बताते हैं कि स्वतंत्र सिंह बेहद व्यवहार कुशल थे।
शहीद सूबेदार स्वतंत्र सिंह के रिश्तेदार डीएस नेगी ने बताया कि उनके परिवार की पृष्ठभूमि सेना से जुड़ी रही। शहीद के पिता स्व. प्रेम सिंह रावत भी सेना में सेवारत रहे। यही नहीं उनके दादा भी सेना में रहे। एसडीएम योगेश मेहरा और तहसीलदार विकास अवस्थी ने शुक्रवार दिन में उडयारी गांव पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। बताया कि शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा।