फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   कौशल्या नदी में खड़िया का मलबा बहने से भड़के ग्रामीण

कौशल्या नदी में खड़िया का मलबा बहने से भड़के ग्रामीण

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Dec 2018 12:20 AM IST
विज्ञापन
कौशल्या नदी में खड़िया का मलबा बहने से भड़के ग्रामीण
बागेश्वर। दफौट क्षेत्र की खड़िया की खानों से निकला मलबा कौशल्या नदी में बहा दिया जा रहा है। इससे नदी के पानी पर निर्भर लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल लाइनोें में खड़िया युक्त पानी आ रहा है और सिंचाई के लिए नदी के पानी का इस्तेमाल करने पर सब्जी की खेती चौपट हो रही है। नाराज लोगों ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन कर समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। डीएम ने जिला खान अधिकारी को जांच सौंप दी है।
विज्ञापन


प्रदर्शनकारियों के मुताबिक दफौट क्षेत्र की दो खड़िया की खानों से निकला मलबा कौशल्या नदी में बहाया जा रहा है। इससे पानी की लाइनों में खड़िया युक्त पानी आ रहा है। नहरों और गूलों में दूषित पानी आने से ठेलापाटन, मालता, बग्जीवाला, ढुंगा, ढुंगापाटल, तुनेड़ा और नायल गांव में खेती और सब्जी की खेती पर प्रभाव पड़ रहा है। विरोध करने पर भी लीज धारकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। प्रदर्शन करने वालों में सरपंच श्याम सिंह, पंकज दफौटी, देवेंद्र दफौटी, सुनील जोशी, गणेश कनवाल, राजेंद्र दफौटी, जगदीश कनवाल, भगवान सिंह धपोला सिंह इंद्र सिंह आदि शामिल थे।
विज्ञापन


दफौट क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायत मुझे मिली है। इसकी जांच के लिए जिला खान अधिकारी को मौके पर भेजा है। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित खान मालिक पर कार्रवाई की जाएगी। नदी नालों सहित पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ करने पर पट्टा निरस्त करने की संस्तुति भी शासन को की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- रंजना राजगुरु, डीएम बागेश्वर।

पांच साल में दोगुना हुआ खड़िया का कारोबार
बागेश्वर। जिले में रीमा से लेकर कांडा तक बड़ी मात्रा में सोप स्टोन पाया जाता है। इससे जुड़ा कारोबार भी तेजी से इस क्षेत्र में फैल रहा है। हाल यह है कि पिछले पांच सालों में यह कारोबार दोगुना हो गया है। पहले मजदूर इस काम को करते थे। अब भारी मशीनों से यह काम किया जा रहा है। पूर्व में ग्रामीण कई बार नाप खेताें को खड़िया के लिए खोद देने तक की शिकायत कर चुके हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक भी यह मामला पहुंचा था और उस समय निरीक्षण भी हुआ था। इसके बावजूद नियमों और मानकों की अनदेखी से बाज नहीं आया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed