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कौशल्या नदी में खड़िया का मलबा बहने से भड़के ग्रामीण
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बागेश्वर। दफौट क्षेत्र की खड़िया की खानों से निकला मलबा कौशल्या नदी में बहा दिया जा रहा है। इससे नदी के पानी पर निर्भर लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल लाइनोें में खड़िया युक्त पानी आ रहा है और सिंचाई के लिए नदी के पानी का इस्तेमाल करने पर सब्जी की खेती चौपट हो रही है। नाराज लोगों ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन कर समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। डीएम ने जिला खान अधिकारी को जांच सौंप दी है।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक दफौट क्षेत्र की दो खड़िया की खानों से निकला मलबा कौशल्या नदी में बहाया जा रहा है। इससे पानी की लाइनों में खड़िया युक्त पानी आ रहा है। नहरों और गूलों में दूषित पानी आने से ठेलापाटन, मालता, बग्जीवाला, ढुंगा, ढुंगापाटल, तुनेड़ा और नायल गांव में खेती और सब्जी की खेती पर प्रभाव पड़ रहा है। विरोध करने पर भी लीज धारकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। प्रदर्शन करने वालों में सरपंच श्याम सिंह, पंकज दफौटी, देवेंद्र दफौटी, सुनील जोशी, गणेश कनवाल, राजेंद्र दफौटी, जगदीश कनवाल, भगवान सिंह धपोला सिंह इंद्र सिंह आदि शामिल थे।
दफौट क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायत मुझे मिली है। इसकी जांच के लिए जिला खान अधिकारी को मौके पर भेजा है। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित खान मालिक पर कार्रवाई की जाएगी। नदी नालों सहित पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ करने पर पट्टा निरस्त करने की संस्तुति भी शासन को की जा सकती है।
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- रंजना राजगुरु, डीएम बागेश्वर।
पांच साल में दोगुना हुआ खड़िया का कारोबार
बागेश्वर। जिले में रीमा से लेकर कांडा तक बड़ी मात्रा में सोप स्टोन पाया जाता है। इससे जुड़ा कारोबार भी तेजी से इस क्षेत्र में फैल रहा है। हाल यह है कि पिछले पांच सालों में यह कारोबार दोगुना हो गया है। पहले मजदूर इस काम को करते थे। अब भारी मशीनों से यह काम किया जा रहा है। पूर्व में ग्रामीण कई बार नाप खेताें को खड़िया के लिए खोद देने तक की शिकायत कर चुके हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक भी यह मामला पहुंचा था और उस समय निरीक्षण भी हुआ था। इसके बावजूद नियमों और मानकों की अनदेखी से बाज नहीं आया जा रहा है।
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प्रदर्शनकारियों के मुताबिक दफौट क्षेत्र की दो खड़िया की खानों से निकला मलबा कौशल्या नदी में बहाया जा रहा है। इससे पानी की लाइनों में खड़िया युक्त पानी आ रहा है। नहरों और गूलों में दूषित पानी आने से ठेलापाटन, मालता, बग्जीवाला, ढुंगा, ढुंगापाटल, तुनेड़ा और नायल गांव में खेती और सब्जी की खेती पर प्रभाव पड़ रहा है। विरोध करने पर भी लीज धारकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। प्रदर्शन करने वालों में सरपंच श्याम सिंह, पंकज दफौटी, देवेंद्र दफौटी, सुनील जोशी, गणेश कनवाल, राजेंद्र दफौटी, जगदीश कनवाल, भगवान सिंह धपोला सिंह इंद्र सिंह आदि शामिल थे।
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दफौट क्षेत्र के ग्रामीणों की शिकायत मुझे मिली है। इसकी जांच के लिए जिला खान अधिकारी को मौके पर भेजा है। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित खान मालिक पर कार्रवाई की जाएगी। नदी नालों सहित पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ करने पर पट्टा निरस्त करने की संस्तुति भी शासन को की जा सकती है।
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- रंजना राजगुरु, डीएम बागेश्वर।
पांच साल में दोगुना हुआ खड़िया का कारोबार
बागेश्वर। जिले में रीमा से लेकर कांडा तक बड़ी मात्रा में सोप स्टोन पाया जाता है। इससे जुड़ा कारोबार भी तेजी से इस क्षेत्र में फैल रहा है। हाल यह है कि पिछले पांच सालों में यह कारोबार दोगुना हो गया है। पहले मजदूर इस काम को करते थे। अब भारी मशीनों से यह काम किया जा रहा है। पूर्व में ग्रामीण कई बार नाप खेताें को खड़िया के लिए खोद देने तक की शिकायत कर चुके हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक भी यह मामला पहुंचा था और उस समय निरीक्षण भी हुआ था। इसके बावजूद नियमों और मानकों की अनदेखी से बाज नहीं आया जा रहा है।