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आस्था के मेले में युवाओ की पिकनिक
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 26 Nov 2015 12:25 AM IST
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कार्तिक पूर्णिका गंगा स्नान मेला युवाओं के पिकनिक बन गया। गंगा की रेती पर आठ दिन तक बसे तंबुओं के अस्थाई शहर में युवाओं ने गंगा की रेती में अठखेलियां कीं। युवाओं ने गंगा में तैराकी का भी खूब लुत्फ उठाया, तो नन्हें-मुन्ने रेत से घर-मंदिर आदि बनाने में लगे रहे।
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा किनारे लगने वाले तिगरी गंगा मेेले में हर साल कुछ नयापन दिखाई देने लगा है, क्योंकि मेले में युवा वर्ग अधिक आने लगा है। मेला पिकनिक का रूप लेता जा रहा है।
इस बार भी गंगा की रेती का नजारा कुछ अलग ही था। आस्था तो सिरमौर थी, साथ ही रेत के मैदान पर मस्ती के नजारे भी देखने को मिले। आठ दिन तक बसी तंबुओं की नगरी में महिलाएं और बुजुर्ग पूजा-पाठ में तल्लीन रहे। भोर से लेकर शाम तक प्रभु का स्मरण किया जा रहा था।
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वहीं,युवा मौज-मस्ती में वक्त बिता रहे थे। पानी में खड़े होकर मीनार बनाना, कलाबाजी करना, तैराकी रेस और पानी के बीच उछल-कूद करना युवाओं की दिनचर्या में शुमार था। बैडमिंटन से लेकर कबड्डी आदि रेत के मैदान पर खूब खेली र्गईं। नन्हें-मुन्ने रेत के ढीले, मंदिर और घर बनाने में व्यस्त रहे।
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कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा किनारे लगने वाले तिगरी गंगा मेेले में हर साल कुछ नयापन दिखाई देने लगा है, क्योंकि मेले में युवा वर्ग अधिक आने लगा है। मेला पिकनिक का रूप लेता जा रहा है।
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इस बार भी गंगा की रेती का नजारा कुछ अलग ही था। आस्था तो सिरमौर थी, साथ ही रेत के मैदान पर मस्ती के नजारे भी देखने को मिले। आठ दिन तक बसी तंबुओं की नगरी में महिलाएं और बुजुर्ग पूजा-पाठ में तल्लीन रहे। भोर से लेकर शाम तक प्रभु का स्मरण किया जा रहा था।
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वहीं,युवा मौज-मस्ती में वक्त बिता रहे थे। पानी में खड़े होकर मीनार बनाना, कलाबाजी करना, तैराकी रेस और पानी के बीच उछल-कूद करना युवाओं की दिनचर्या में शुमार था। बैडमिंटन से लेकर कबड्डी आदि रेत के मैदान पर खूब खेली र्गईं। नन्हें-मुन्ने रेत के ढीले, मंदिर और घर बनाने में व्यस्त रहे।