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सपा के खाते में गईं सबसे ज्यादा सीटें
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 03 Nov 2015 01:15 AM IST
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जिला पंचायत सदस्य चुनाव में सत्ता की हनक का असर सीधा दिखाई दिया। समाजवादी पार्टी समर्थित प्रत्याशियों ने सबसे अधिक सीटें जीतीं।
वहीं बसपा का भी प्रदर्शन बेहतर रहा। लेकिन, भाजपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। भाजपा के कई दिग्गजों ने मात खाई, यहां तक की जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की हैसियत से अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा रहे सुरेश नागर को भी शिकस्त मिली। जबकि, निर्दल चुनाव लड़ने वाले भी कई उम्मीदवारों के सिर जीत का सेहरा बंध गया है।
जिला पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी ने लगभग सभी 28 वार्डों से अपने समर्थित प्रत्याशी उतारे थे। बहुजन समाज पार्टी ने भी एक-दो सीटों को छोड़कर सभी पर प्रत्याशियों को लड़ाया था।
भाजपा ने भी पंचायत चुनाव में दमदारी के साथ ताल ठोंकी थी। मतगणना के बाद प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी सरकार का परिणामों पर असर साफ दिखाई दिया।
सपा समर्थित 12 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। आठ स्थानों पर बसपा समर्थित उम्मीदवार विजय हुए हैं। पांच स्थानों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी जीते हैं। शेष तीन स्थानों पर ऐसे प्रत्याशी जीते हैं जिन्होंने किसी राजनीतिक दल से समर्थन हासिल नहीं किया था।
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सपा के सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्यों की जीत के बाद सत्ता की हनक साफ दिखाई दी। सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद विरोधी दलों ने अफसरों पर पक्षपात कराके जिताने के आरोप जड़ दिए। लेकिन, अपनी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन पर आत्ममंथन नहीं किया।
चुनाव में बसपा ने आठ सीटों पर अपने समर्थित प्रत्याशी जिताकर यह साबित कर दिखाया है कि वह सपा के मुकाबले जिले में कम हैसियत नहीं रखती है। लेकिन, भाजपा के नेता 28 वार्डों में सिर्फ पांच स्थानों पर अपने समर्थितों को जिता सके।
यही नहीं भाजपा ने हसनपुर क्षेत्र से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए विरोधी दलों को टक्कर देने की हैसियत से सुरेश नागर की पत्नी सावित्री देवी को वार्ड 21 से मैदान में उतारा था। लेकिन, सावित्री देवी को करारी शिकस्त उनकी ही बिरादरी के पिंटू गुर्जर ने दे दी। बता दें कि सुरेश नागर अमरोहा लोकसभा क्षेत्र से भी टिकट के प्रबल दावेदार रह चुके हैं।
सपा के जिम्मेदारों की मेहनत रंग लाई
सत्ता की हनक के साथ ही सपा के जिम्मेदारों ने जनता के बीच पहुंचकर मेहनत भी की। कैबिनेट मंत्री महबूब अली भी पत्नी सकीना और बेटे परवेज के लिए जनता के बीच गए। उधर, हसनपुर में कैबिनेट मंत्री कमला अख्तर भी चुनावभर प्रचार में लगे रहे। विधायक अशफाक अली ने भी अपने समर्थित प्रत्याशियों को जिताने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।
दिग्गजों ने खाई मात
सपा के कई दिग्गजों को मात भी खानी पड़ी, जैसे सपा जिलाध्यक्ष विजय पाल सिंह सैनी अपनी पत्नी जगवती सैनी को नहीं जिता सके। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष इंद्रवती भी नहीं जीत सकीं। कैबिनेट मंत्री महबूब अली के भाई महमूद अली अपनी पत्नी फात्मा बेगम को और बेटे नवाजिश अली को नहीं जिता सके।
कई सीटों पर लगी विवादों की झड़ी
जिले के वार्ड नंबर 23 पर विवादों की रातभर झड़ी लगी रही। यहां इस्तेगार और बिट्टू के बीच कांटे की टक्कर रही। आरोप है कि बिट्टू 117 वोटों से आगे थे। इसी बीच सपा समर्थकों ने प्रशासन के अफसरों पर दबाव बनाकर कुछ मतपत्रों को निरस्त करा दिया, इससे बिट्टू पीछे हो गए।
आरोप लगाया जा रहा है कि दबाव बनाकर इस्तेगार को जितवाया गया है। इसकी शिकायत प्रेक्षक और चुनाव आयुक्त से भी की गई है। वार्ड 27 पर बरखा और सोनम के बीच भी हार-जीत को लेकर खिचखिच होती रही। देर से परिणाम घोषित किया गया। इसी तरह हसनपुर के एक वार्ड में राजवीर को भी हराने की कोशिश की गई। इसकी शिकायतें उच्चअधिकारियों से की गईं हैं।
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वहीं बसपा का भी प्रदर्शन बेहतर रहा। लेकिन, भाजपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। भाजपा के कई दिग्गजों ने मात खाई, यहां तक की जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की हैसियत से अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा रहे सुरेश नागर को भी शिकस्त मिली। जबकि, निर्दल चुनाव लड़ने वाले भी कई उम्मीदवारों के सिर जीत का सेहरा बंध गया है।
जिला पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी ने लगभग सभी 28 वार्डों से अपने समर्थित प्रत्याशी उतारे थे। बहुजन समाज पार्टी ने भी एक-दो सीटों को छोड़कर सभी पर प्रत्याशियों को लड़ाया था।
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भाजपा ने भी पंचायत चुनाव में दमदारी के साथ ताल ठोंकी थी। मतगणना के बाद प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी सरकार का परिणामों पर असर साफ दिखाई दिया।
सपा समर्थित 12 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। आठ स्थानों पर बसपा समर्थित उम्मीदवार विजय हुए हैं। पांच स्थानों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी जीते हैं। शेष तीन स्थानों पर ऐसे प्रत्याशी जीते हैं जिन्होंने किसी राजनीतिक दल से समर्थन हासिल नहीं किया था।
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सपा के सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्यों की जीत के बाद सत्ता की हनक साफ दिखाई दी। सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद विरोधी दलों ने अफसरों पर पक्षपात कराके जिताने के आरोप जड़ दिए। लेकिन, अपनी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन पर आत्ममंथन नहीं किया।
चुनाव में बसपा ने आठ सीटों पर अपने समर्थित प्रत्याशी जिताकर यह साबित कर दिखाया है कि वह सपा के मुकाबले जिले में कम हैसियत नहीं रखती है। लेकिन, भाजपा के नेता 28 वार्डों में सिर्फ पांच स्थानों पर अपने समर्थितों को जिता सके।
यही नहीं भाजपा ने हसनपुर क्षेत्र से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए विरोधी दलों को टक्कर देने की हैसियत से सुरेश नागर की पत्नी सावित्री देवी को वार्ड 21 से मैदान में उतारा था। लेकिन, सावित्री देवी को करारी शिकस्त उनकी ही बिरादरी के पिंटू गुर्जर ने दे दी। बता दें कि सुरेश नागर अमरोहा लोकसभा क्षेत्र से भी टिकट के प्रबल दावेदार रह चुके हैं।
सपा के जिम्मेदारों की मेहनत रंग लाई
सत्ता की हनक के साथ ही सपा के जिम्मेदारों ने जनता के बीच पहुंचकर मेहनत भी की। कैबिनेट मंत्री महबूब अली भी पत्नी सकीना और बेटे परवेज के लिए जनता के बीच गए। उधर, हसनपुर में कैबिनेट मंत्री कमला अख्तर भी चुनावभर प्रचार में लगे रहे। विधायक अशफाक अली ने भी अपने समर्थित प्रत्याशियों को जिताने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।
दिग्गजों ने खाई मात
सपा के कई दिग्गजों को मात भी खानी पड़ी, जैसे सपा जिलाध्यक्ष विजय पाल सिंह सैनी अपनी पत्नी जगवती सैनी को नहीं जिता सके। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष इंद्रवती भी नहीं जीत सकीं। कैबिनेट मंत्री महबूब अली के भाई महमूद अली अपनी पत्नी फात्मा बेगम को और बेटे नवाजिश अली को नहीं जिता सके।
कई सीटों पर लगी विवादों की झड़ी
जिले के वार्ड नंबर 23 पर विवादों की रातभर झड़ी लगी रही। यहां इस्तेगार और बिट्टू के बीच कांटे की टक्कर रही। आरोप है कि बिट्टू 117 वोटों से आगे थे। इसी बीच सपा समर्थकों ने प्रशासन के अफसरों पर दबाव बनाकर कुछ मतपत्रों को निरस्त करा दिया, इससे बिट्टू पीछे हो गए।
आरोप लगाया जा रहा है कि दबाव बनाकर इस्तेगार को जितवाया गया है। इसकी शिकायत प्रेक्षक और चुनाव आयुक्त से भी की गई है। वार्ड 27 पर बरखा और सोनम के बीच भी हार-जीत को लेकर खिचखिच होती रही। देर से परिणाम घोषित किया गया। इसी तरह हसनपुर के एक वार्ड में राजवीर को भी हराने की कोशिश की गई। इसकी शिकायतें उच्चअधिकारियों से की गईं हैं।