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हत्यारे पुत्र और समधी को उम्रकैद, 1.50 लाख जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 05 Oct 2015 11:43 PM IST
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विशेष सत्र एवं अपर जनपद न्यायाधीश बीडी भारती ने संपत्ति के विवाद में गोली मारकर पिता की हत्या करने के जुर्म में पुत्र और साजिश रचने पर समधी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर डेढ़ लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
मामला गजरौला के मोहल्ला भानपुर खालसा का है। यहां के यादराम का तीन बेटों का परिवार एक ही हवेली में रहता था। छोटा पुत्र राजपाल संपत्ति में दो हिस्से चाहता था और पिता पर घर के पीछे खाली पड़ी जमीन अपने ससुर रामरतन सिंह निवासी गांव पपसरा थाना रजबपुर को देने का दबाव डाल रहा था। यादराम इसका विरोध करता था।
26 जून 2012 को शाम करीब साढ़े चार बजे राजपाल घर में घुसा और तमंचे से पिता यादराम की कनपटी पर गोली मार दी। गोली चलने की आवाज सुनकर घर के बाहर कुर्सी डालकर बैठा बड़ा पुत्र महीपाल, मां सर्वेश्वरी और अन्य लोग जैसे ही घर में घुसे तो कमरे में खून से लथपथ यादराम की लाश पड़ी दिखी, जबकि राजपाल अपने ससुर रामरतन के साथ तमंचा लहराते हुए फरार हो गया।
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पुलिस ने लाश का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और महीपाल की तहरीर पर राजपाल, रामरतन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। बाद में पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था, जो कुछ समय बाद जमानत पर जेल से रिहा हो गए थे। मामला विशेष सत्र एवं एससीएसटी अदालत में विचाराधीन था।
शनिवार को न्यायाधीश बीडी भारती ने वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी आरबी सिंह, जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनी। बाद में राजपाल पर हत्या और रामरतन पर हत्या की साजिश रचने का दोष सिद्ध किया। सोमवार को सजा पर सुनवाई हुई और न्यायाधीश ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया।
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मामला गजरौला के मोहल्ला भानपुर खालसा का है। यहां के यादराम का तीन बेटों का परिवार एक ही हवेली में रहता था। छोटा पुत्र राजपाल संपत्ति में दो हिस्से चाहता था और पिता पर घर के पीछे खाली पड़ी जमीन अपने ससुर रामरतन सिंह निवासी गांव पपसरा थाना रजबपुर को देने का दबाव डाल रहा था। यादराम इसका विरोध करता था।
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26 जून 2012 को शाम करीब साढ़े चार बजे राजपाल घर में घुसा और तमंचे से पिता यादराम की कनपटी पर गोली मार दी। गोली चलने की आवाज सुनकर घर के बाहर कुर्सी डालकर बैठा बड़ा पुत्र महीपाल, मां सर्वेश्वरी और अन्य लोग जैसे ही घर में घुसे तो कमरे में खून से लथपथ यादराम की लाश पड़ी दिखी, जबकि राजपाल अपने ससुर रामरतन के साथ तमंचा लहराते हुए फरार हो गया।
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पुलिस ने लाश का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और महीपाल की तहरीर पर राजपाल, रामरतन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। बाद में पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था, जो कुछ समय बाद जमानत पर जेल से रिहा हो गए थे। मामला विशेष सत्र एवं एससीएसटी अदालत में विचाराधीन था।
शनिवार को न्यायाधीश बीडी भारती ने वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी आरबी सिंह, जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनी। बाद में राजपाल पर हत्या और रामरतन पर हत्या की साजिश रचने का दोष सिद्ध किया। सोमवार को सजा पर सुनवाई हुई और न्यायाधीश ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया।