{"_id":"5915ce9f4f1c1b1522851a00","slug":"zero-delay-treatment-cell-in-bhu-emergency","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू इमरजेंसी में जीरो डिले ट्रीटमेंट सेल, गंभीर स्थिति वाले मरीजों को होगा बड़ा फायदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू इमरजेंसी में जीरो डिले ट्रीटमेंट सेल, गंभीर स्थिति वाले मरीजों को होगा बड़ा फायदा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 12 May 2017 08:32 PM IST
विज्ञापन
बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर मरीजों के इलाज में अब कोई देरी नहीं होगी। मरीज को लेकर परिजनों को इधर-उधर भटकना नहीं होगा। इमरजेंसी में गंभीर मरीजों के लिए जीरो डिले ट्रीटमेंट सेल स्थापित किया जा रहा है।
हृदयाघात, स्ट्रोक पीडि़तों के लिए खास तौर से ये सेल स्थापित करने की तैयारी है। कार्डियोलॉजी विभाग ने इसका प्रपोजल तैयार किया था, जिसे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने स्वीकृति दे दी है।
इमरजेंसी में मरीजों का दबाव चौबीस घंटे बना रहता है। ऐसे में सबसे अधिक दिक्कत गंभीर स्थिति वाले मरीजों को होती है। कभी-कभी तो समय पर इलाज शुरू न हो पाने से हालत और गंभीर हो जाती है। हृदयाघात, स्ट्रोक से पीडि़त मरीजों के लिए एक-एक मिनट की देरी भारी पड़ जाती है।
विज्ञापन
इस समस्या को ध्यान में रखते कार्डियोलॉजी विभाग ने चिकित्सा अधीक्षक से छह बेड का जीरो डिले ट्रीटमेंट सेल स्थापित करने की गुजारिश की थी।
चिकित्सा अधीक्षक की पहल पर अब इसकी कवायद शुरू कर दी गई है।
जीरो डिले ट्रीटमेंट सेल में वेंटिलेटर, डिफ्लैक्टर, मॉनीटर समेत उच्चीकृत चिकित्सा उपकरणों के टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के दबाव को देखते हुए ही यहां एक सीनियर रेजिडेंट के साथ ही दो जूनियर रेजिडेंट की तैनाती की जाएगी।
अब तक इमरजेंसी में केवल एक ही जूनियर रेजिडेंट की ड्यूटी लगाई जाती रही है जो कि मरीजों के दबाव के आगे बहुत कम है। अब यहां मेडिसिन के साथ साथ सर्जरी, एनेस्थिसिया के जूनियर रेजिडेंट्स की भी ड्यूटी लगाई जाएगी।
विज्ञापन
हृदयाघात, स्ट्रोक पीडि़तों के लिए खास तौर से ये सेल स्थापित करने की तैयारी है। कार्डियोलॉजी विभाग ने इसका प्रपोजल तैयार किया था, जिसे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने स्वीकृति दे दी है।
विज्ञापन
इमरजेंसी में मरीजों का दबाव चौबीस घंटे बना रहता है। ऐसे में सबसे अधिक दिक्कत गंभीर स्थिति वाले मरीजों को होती है। कभी-कभी तो समय पर इलाज शुरू न हो पाने से हालत और गंभीर हो जाती है। हृदयाघात, स्ट्रोक से पीडि़त मरीजों के लिए एक-एक मिनट की देरी भारी पड़ जाती है।
विज्ञापन
इस समस्या को ध्यान में रखते कार्डियोलॉजी विभाग ने चिकित्सा अधीक्षक से छह बेड का जीरो डिले ट्रीटमेंट सेल स्थापित करने की गुजारिश की थी।
चिकित्सा अधीक्षक की पहल पर अब इसकी कवायद शुरू कर दी गई है।
जीरो डिले ट्रीटमेंट सेल में वेंटिलेटर, डिफ्लैक्टर, मॉनीटर समेत उच्चीकृत चिकित्सा उपकरणों के टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के दबाव को देखते हुए ही यहां एक सीनियर रेजिडेंट के साथ ही दो जूनियर रेजिडेंट की तैनाती की जाएगी।
अब तक इमरजेंसी में केवल एक ही जूनियर रेजिडेंट की ड्यूटी लगाई जाती रही है जो कि मरीजों के दबाव के आगे बहुत कम है। अब यहां मेडिसिन के साथ साथ सर्जरी, एनेस्थिसिया के जूनियर रेजिडेंट्स की भी ड्यूटी लगाई जाएगी।