पर्यटन सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को संत परंपरा विषय पर विशेष कथावाचन सत्र हुआ। यह सत्र युवा पर्यटन क्लब के सदस्यों और पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों के लिए था। मुख्य वक्ता व्योमेश शुक्ला ने गोस्वामी तुलसीदास की संत परंपरा और रामचरितमानस पर प्रकाश डाला। कहा कि काशी का वास्तविक आकर्षण केवल इसके घाट और स्मारक नहीं, बल्कि यहां की जीवंत संत परंपरा और दार्शनिक विरासत भी है। उमेश कबीर ने संत कबीरदास की क्रांतिकारी विचारधारा और सामाजिक समरसता पर विचार साझा किए।
भारत पर्यटन (वाराणसी), इंटैक वाराणसी चैप्टर, टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन (टीजीए) और संत अतुलानंद रेजिडेंशियल अकादमी की ओर से आयोजित सत्र के मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त महानिदेशक व क्षेत्रीय निदेशक अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि वाराणसी में बुनियादी ढांचे और संपर्क में सुधार हुआ है। अब स्थानीय हितधारकों के कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और सेवा गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा। यह क्षमता निर्माण पर्यटकों की बढ़ती अपेक्षाएं पूरी करने और पर्यटन का आर्थिक लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचाने के लिए आवश्यक है। इंटैक वाराणसी चैप्टर के संयोजक अशोक कपूर और संत अतुलानंद रेजिडेंशियल अकादमी की निदेशक दिव्या सिंह ने भी विचार रखे। भारत पर्यटन, वाराणसी के सहायक निदेशक अमित गुप्ता ने वाराणसी पर्यटन गिल्ड के अध्यक्ष सुभाष कपूर को सम्मानित किया। गिल्ड के कोषाध्यक्ष रंजीत श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव जैनेंद्र राय मौजूद रहे। सचिव सौरभ पांडेय ने आभार जताया।