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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ डीएवीपीजी कॉलेज में युवा महोत्सव का आगाज
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डीएवीपीजी कॉलेज में तीन दिवसीय युवा महोत्सव उड़ान का मंगलवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आगाज हुआ। पहले दिन गायन, वादन के साथ ही मनोहारी नृत्यों की प्रस्तुति से प्रतिभागियों ने महोत्सव को यादगार बना दिया। जाने माने सितारविद पं देवब्रत मिश्र ने होली गीत के साथ ही चैत मास में गाए जाने वाले गीत पर सितार बजाकर सभी का दिल जीत लिया।
समारोह का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि पद्मश्री सितारवादक पं. शिवनाथ मिश्र ने किया। कहा कि यह देश युवाओं का है, युवा ही इसे आगे ले जाएंगे। अब समय आ गया है जब युवा पीढ़ी को सशक्त कर भविष्य के भारत की नींव तैयार की जाए। अध्यक्षता कर प्राचार्य डॉ. सत्यदेव सिंह ने कहा कि पं. शिवनाथ का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। पं शिवनाथ को डीएवी काशी संगीत गौरव सम्मान से नवाजा गया। डॉ. उषा किरण सिंह को भी विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया गया।
पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। सितारविद पं. देवब्रत मिश्रा जैसे ही मंच पर सितार लेकर पहुंचे पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सबसे पहले राग चारूकेषी में निबद्ध द्रुत गत बंदिश प्रस्तुत की, उसके बाद झाला और तबले और सितार की जुगलबंदी से सबको भावविभोर कर दिया। इसके बाद उन्होंने चैती में चैतमासे बोले रे कोयलिया ओ रामा गीत पर सितार की प्रस्तुति दी। होली गीत रंग सारी गुलाबी चुनरिया रे पर सितार बजाया। दुर्गा स्तुति ‘भवानी - दयानी‘ से समापन किया। तबले पर प्रशांत मिश्रा एवं गिटार पर अंजनी कुमार ने संगत की। उधर तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन एक गायन, समूह नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। साहित्य में सुभाषण हिंदी एवं अंग्रेजी की भी प्रतियोगिता हुई। संचालन प्रो. अनूप कुमार मिश्रा, अतिथियों का स्वागत डॉ. पूनम सिंह, डॉ. संगीता जैन, डॉ. मीनू लाकड़ा और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. ऋ चारानी यादव ने किया।
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समारोह का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि पद्मश्री सितारवादक पं. शिवनाथ मिश्र ने किया। कहा कि यह देश युवाओं का है, युवा ही इसे आगे ले जाएंगे। अब समय आ गया है जब युवा पीढ़ी को सशक्त कर भविष्य के भारत की नींव तैयार की जाए। अध्यक्षता कर प्राचार्य डॉ. सत्यदेव सिंह ने कहा कि पं. शिवनाथ का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। पं शिवनाथ को डीएवी काशी संगीत गौरव सम्मान से नवाजा गया। डॉ. उषा किरण सिंह को भी विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया गया।
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पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। सितारविद पं. देवब्रत मिश्रा जैसे ही मंच पर सितार लेकर पहुंचे पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सबसे पहले राग चारूकेषी में निबद्ध द्रुत गत बंदिश प्रस्तुत की, उसके बाद झाला और तबले और सितार की जुगलबंदी से सबको भावविभोर कर दिया। इसके बाद उन्होंने चैती में चैतमासे बोले रे कोयलिया ओ रामा गीत पर सितार की प्रस्तुति दी। होली गीत रंग सारी गुलाबी चुनरिया रे पर सितार बजाया। दुर्गा स्तुति ‘भवानी - दयानी‘ से समापन किया। तबले पर प्रशांत मिश्रा एवं गिटार पर अंजनी कुमार ने संगत की। उधर तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन एक गायन, समूह नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। साहित्य में सुभाषण हिंदी एवं अंग्रेजी की भी प्रतियोगिता हुई। संचालन प्रो. अनूप कुमार मिश्रा, अतिथियों का स्वागत डॉ. पूनम सिंह, डॉ. संगीता जैन, डॉ. मीनू लाकड़ा और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. ऋ चारानी यादव ने किया।
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