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Varanasi News: इस अंजुमन में आपको आना है बार-बार, दीवारों दर को गौर से पहचान लीजिए

Mon, 26 Dec 2022 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Dec 2022 11:51 PM IST
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You have to come to this Anjuman again and again, identify the walls carefully
देश-दुनिया को अपनी प्रतिभा का मुरीद बनाने वाली मशहूर नृत्यांगना उमराव जान को उनकी 85वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को याद किया गया। सिगरा स्थित दरगाह ए फातमान में उनके मकबरे पर लोगों ने फातिहा पढ़ी और पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि भी दी। चाहने वालों के जेहन में इस अंजुमन में आपको आना है बार-बार, दीवारों दर को गौर से पहचान लीजिए...की धुन फिर एक बार ताजा हो उठी।
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सोमवार डर्बीशायर क्लब की श्रद्धांजलि सभा में प्रशंसकों ने उनकी कब्र पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर शमा रोशन की और फातिहा भी पढ़ी। मकबरे पर फूल माला चढ़ाकर श्रद्धासुमन अर्पित किया तो उनके गीतों के माध्यम से भी उन्हें याद किया। क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर ने बताया कि उमराव जान किसी पहचान की मोहताज नहीं है। उन्होंने अपना अंतिम समय बनारस में ही गुजारा था। 26 दिसंबर 1937 में दालमंडी की गलियों में उन्होंने अंतिम सांस ली थी। अपने हुनर से चाहने वालों के दिलों पर राज करने वाली उमराव जान का अंतिम समय तन्हा ही गुजरा। शकील ने राज्य सरकार से उनके मकबरे पर प्रकाश का इंतजाम करने की मांग की है। इस दौरान प्रमोद वर्मा, हैदर मौलाई, आफाक हैदर, चिंतित बनारसी मौजूद रहे।
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