वाराणसी के मंडलीय अस्पताल में गंदगी देख नाराज हुए नगर विकास मंत्री
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प्रदेश के नगर विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने शनिवार को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा का निरीक्षण कर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बर्न वार्ड, आर्थो वार्ड, प्राइवेट वार्ड सहित अन्य जगहों पर निरीक्षण के दौरान गंदगी मिलने से नाराज मंत्री ने एसआईसी से साफ-सफाई पर ध्यान देने का निर्देश दिया।
इस दौरान वार्डों में लगे कूलर में पानी न भरा देख अधिकारियों से पूछताछ की। सुबह करीब 11 बजे अधिकारियों संग पहुंचे मंत्री बर्न वार्ड पहुंचे। यहां 24 घंटे एसी चलाए जाने, साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने, बाहर की दवाई, जांच न लिखे जाने, की हिदायत एसआईसी, सीएमओ को दी।
इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह ने डायलिसिस यूनिट के बंद होने, डॉक्टरों की कमी आदि की जानकारी दी, जिस पर उन्होंने जल्द ही शासन स्तर पर पहल कर समस्या का समाधान कराने को कहा। करीब एक घंटे तक चले निरीक्षण में मंत्री ने डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति रजिस्टर को भी चेक किया।
अस्पताल परिसर एवं वार्डो में निरीक्षण के दौरान गंदगी एवं पानी विहीन कूलर व उस पर जमे मिट्टी के परत पर पड़ी। इस पर एसआईसी डॉ. बीएन श्रीवास्तव से नियमित सफाई न होने और कूलर में पानी न भरने का कारण पूछा, जिस पर एसआईसी ने सफाई कराते रहने की बात कही।
मंत्री ने साफ-सफाई, पेयजल, कूलर का पानी नियमित बदले जाने का निर्देश दिया। प्राइवेट, पेइंग वार्ड में पहुंचे तो देखा कि पंखे से आवाज आ रही थी, इस पर गर्मी में पंखों की मरम्मत कराने का भी निर्देश दिया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि अस्पताल में साफ-सफाई की हालत ठीक नहीं है, इस पर सुधार लाने की जरूरत है।
जहां तक चिकित्सकों, कर्मचारियों की कमी की बात है तो शासन स्तर पर इसको पूरा करने की कवायद चल रही है। इस दौरान डीएम योगेश्वर राम मिश्रा, विधायक रविंद्र जायसवाल, सौरभ श्रीवास्तव, सीएमओ डॉ. वीबी सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
महिला ने की एक्सरे के नाम पर पैसा मांगने की शिकायत
मंत्री के निरीक्षण के दौरान एक महिला ने मंत्री से बाहर की एक्सरे जांच लिखने और अस्पताल में एक्सरे के नाम पर पैसा मांगने की शिकायत की। बताया कि जांच नि:शुल्क है लेकिन डॉक्टर कर्मचारी बाहर की जांच लिखते हैं। इसको गंभीरता से लेते हुए मंत्री सीएमओ को मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। इस दौरान शिकायतकर्ता को लिखित शपथ पत्र देने को कहा।