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आस्था: 16 साल बाद काशी में शुरू हुआ श्री ललिता महात्रिपुरसुंदरी का अर्चन, आठ दिनों में 44 लाख मंत्रों का जाप

Mon, 12 Jan 2026 05:36 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 12 Jan 2026 05:36 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में 16 साल के बाद श्री ललिता महात्रिपुरसुंदरी का अर्चन शुरू हुआ। आठ दिनों में 44 लाख मंत्रों से अर्चन हो चुका है। इसमें केसर युक्त अक्षत, गुलाब, लौंग, इलायची, मोदक और कमल पुष्प से मां का अर्चन हो रहा है।

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worship of Shri Lalita Mahatripurasundari resumed in Kashi after 16 years in varanasi
मां ललिता का अर्चन करते बटुक और पुजारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी में श्रीविद्या की साधना 16 साल के बाद फिर से जीवंत हो रही है। श्रीविद्या साधना पीठ में धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज की पद्धति के अनुसार श्री ललिता महात्रिपुरसुंदरी का 21 दिवसीय अर्चन हो रहा है। दुर्लभ कोटि अर्चन सत्रयाग में देश भर के श्रद्धालु शामिल होकर अनुष्ठान कर रहे हैं। आठ दिनों में मां ललिता का 44 लाख मंत्रों से अर्चन हो चुका है। नगवां गणेशबाग स्थित श्रीविद्या साधना पीठ में 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर से दुर्लभ कोटि अर्चन सत्रयाग तीन जनवरी से चल रहा है। 

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अनुष्ठान श्रीविद्या देशिक प्रवर आचार्य दत्तात्रेयानंदनाथ (पं. सीताराम कविराज) के आविर्भाव शताब्दी महोत्सव के अवसर पर हो रहा है। इसकी बड़ी विशेषता यह है कि पूरा आयोजन धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा निर्धारित शुद्ध वैदिक पद्धति के अनुसार संपन्न हो रहा है। 21 दिनों तक चलने वाले इस महायज्ञ के अंतर्गत श्रीललिता महात्रिपुरसुंदरी का विविध द्रव्यों से एक करोड़ मंत्रों ने अर्चन होगा। आठ दिनों में 44 लाख मंत्रों से अर्चन हो चुका है। इसमें केसर युक्त अक्षत, गुलाब, लौंग, इलायची, मोदक और कमल पुष्प से मां का अर्चन हो रहा है। 

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करपात्री महाराज की परंपरा का जीवंत उदाहरण 

पीठ के सचिव प्रो. श्रीकिशोर मिश्र ने बताया कि आचार्य दत्तात्रेयानंदनाथ धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज के शिष्य थे। उन्होंने श्रीविद्या के अनेक दुर्लभ और प्रामाणिक ग्रंथों का संपादन एवं लेखन कर इस विद्या को सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। उन्हीं की साधना परंपरा के अनुरूप यह अनुष्ठान 16 वर्षों बाद पुनः आयोजित किया गया है। 

सह-सचिव डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि आगामी 21 दिनों तक श्रीविद्या के महागणपति क्रम सहित श्रीयंत्र की त्रिकाल महापूजा एवं विभिन्न द्रव्यों से कोटि अर्चन सत्रयाग आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन देश के विभिन्न प्रांतों से शताधिक दीक्षित साधक एवं साधिकाएं सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह आयोजन पूरी तरह से शास्त्रीय विधानों के अनुसार हो रहा है, जिसमें समय, मंत्र, द्रव्य और विधि का ध्यान रखा जा रहा है।

होंगे विशेष अनुष्ठान 
डॉ. शर्मा के अनुसार, महोत्सव के समापन सत्र में होम, तर्पण, मार्जन के साथ-साथ कुमारी, बटुक एवं सौभाग्यवती पूजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त रात्रि जागरण के दौरान शास्त्रीय संगीत संध्या एवं विद्वत गोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें देश के प्रतिष्ठित विद्वान श्रीविद्या परंपरा, साधना और उसके सामाजिक महत्व पर विचार रखेंगे।
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