वर्ल्ड पैरा शूटिंग चैंपियनशिप: वाराणसी की सुमेधा ने दक्षिण कोरिया में लहराया परचम, 18 साल बाद भारत ने जीता रजत
वाराणसी के मानस नगर निवासी सुमेधा पाठक के प्रदर्शन से भारत ने 18 साल बाद वर्ल्ड पैरा निशानेबाजी की पी-2 टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। सुमेधा अपने घर में बने शूटिंग रेंज पर रोज 10 मीटर पिस्टल का अभ्यास करती हैं। टीम स्पर्धा में सुमेधा समेत तीन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर यह उपलब्धि हासिल की।
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वाराणसी के मानस नगर कॉलोनी निवासी सुमेधा पाठक ने दक्षिण कोरिया में आयोजित वर्ल्ड पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम को 18 साल बाद पी-2 स्पर्धा में रजत पदक दिलाया। 10 मीटर पिस्टल की टीम स्पर्धा में भारतीय महिला टीम ने पहली बार रजत पदक हासिल कर इतिहास रचा। प्रतियोगिता दक्षिण कोरिया के चेंगवान शहर में सात से 15 सितंबर तक आयोजित हुई।
भारतीय टीम में सुमेधा पाठक के साथ दिल्ली की भक्ति शर्मा और अजमेर की सृष्टि अरोड़ा शामिल थीं। टीम स्पर्धा में ईरान ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत को रजत और चीन को कांस्य पदक मिला। सुमेधा के पिता ब्रजेश चंद्र पाठक ने बताया कि इस उपलब्धि के लिए उनकी बेटी को छह वर्ष तक इंतजार करना पड़ा।
सुमेधा इससे पहले पेरू और यूएई में आयोजित वर्ल्ड पैरा शूटिंग प्रतियोगिताओं में पदक हासिल करने से चूक गई थीं। लगातार प्रयास के बाद तीसरे मौके पर उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और शहर में खुशी का माहौल है।
सुमेधा की इस सफलता को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रजत पदक जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वह जापान में होने वाले एशियन गेम्स में पदक पर निशाना साधने की तैयारी करेंगी। एशियन गेम्स का आयोजन 14 से 24 अक्तूबर तक प्रस्तावित है। इसमें सुमेधा 10 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारतीय चुनौती पेश करेंगी।
सुमेधा के प्रदर्शन ने वाराणसी के खेल जगत में भी नई उम्मीद जगाई है। पैरा शूटिंग जैसे खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने न केवल भारतीय टीम को पदक दिलाया, बल्कि लंबे अंतराल के बाद इस स्पर्धा में देश की वापसी भी दर्ज कराई। परिवार के मुताबिक, अब उनकी नजर एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन और पदक हासिल करने पर है।