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विश्व संग्रहालय दिवस: 18 मई को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संग्रहालय में घूमने का है बेस्ट दिन, क्योंकि
Fri, 17 May 2024 04:59 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Fri, 17 May 2024 04:59 PM IST
सार
Varanasi News: संग्रहालय खुलने का समय सुबह नौ बजे खुलेगा, बंद 4:45 बजे होगा।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का संग्रहालय।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भगवान बुद्ध के प्रथम धर्म उपदेश स्थली पर स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का संग्रहालय विश्व संग्रहालय दिवस पर यहां आने वाले पर्यटकों के लिए प्रवेश निशुल्क रखेगा। संग्रहालय में प्रवेश के लिए पर्यटकों को पांच रुपये का प्रवेश शुल्क अदा करना पड़ता है।
सारनाथ स्थित संग्रहालय का निर्माण 1910 में हुआ था। सारनाथ में उत्खनन से प्राप्त सभी कलाकृतियों को संजों कर रखा गया है। सारनाथ उत्खनन से प्राप्त तीसरी शताब्दी से 12वीं शताब्दी तक के पूरावशेषों के प्रदर्शन हेतु इस संग्रहालय में पांच विधियां एवं दो आलिंद का निर्माण किया गया है।
संग्रहालय में प्रवेश मुख्य कक्ष से होता है। इस विधि के मध्य में हमारे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर भारत का राष्ट्रीय चिह्न सिंह शीर्ष प्रदर्शित है। मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित यह सिंह शीर्ष मौर्य कालीन राज्य कला का द्योतक है।
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बोधिसत्व, नीलकंठ लोकेश्वर, पद्मपाणी, बुद्ध का जीवन चक्र, बौद्धदेवियां, अपराजिता, मारीचि, बौद्ध के अष्टम स्थान को उत्कीर्ण करता पट प्रदर्शित है, बुद्ध धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा, शिव, विष्णु,गणेश, कार्तिकेय, भैरव,अग्नि पार्वती, नवग्रह, सहित अन्य कलाकृतियों को देखकर अपने इतिहास के वैभवशाली गौरव को यहां आए पर्यटक बखूबी महसूस कर सकते हैं।
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सारनाथ स्थित संग्रहालय का निर्माण 1910 में हुआ था। सारनाथ में उत्खनन से प्राप्त सभी कलाकृतियों को संजों कर रखा गया है। सारनाथ उत्खनन से प्राप्त तीसरी शताब्दी से 12वीं शताब्दी तक के पूरावशेषों के प्रदर्शन हेतु इस संग्रहालय में पांच विधियां एवं दो आलिंद का निर्माण किया गया है।
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संग्रहालय में प्रवेश मुख्य कक्ष से होता है। इस विधि के मध्य में हमारे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर भारत का राष्ट्रीय चिह्न सिंह शीर्ष प्रदर्शित है। मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित यह सिंह शीर्ष मौर्य कालीन राज्य कला का द्योतक है।
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बोधिसत्व, नीलकंठ लोकेश्वर, पद्मपाणी, बुद्ध का जीवन चक्र, बौद्धदेवियां, अपराजिता, मारीचि, बौद्ध के अष्टम स्थान को उत्कीर्ण करता पट प्रदर्शित है, बुद्ध धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा, शिव, विष्णु,गणेश, कार्तिकेय, भैरव,अग्नि पार्वती, नवग्रह, सहित अन्य कलाकृतियों को देखकर अपने इतिहास के वैभवशाली गौरव को यहां आए पर्यटक बखूबी महसूस कर सकते हैं।