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विश्व मलेरिया दिवस: अभी भी जागरूक नहीं हम, हर वर्ष बढ़ रहे मलेरिया के मरीज
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Tue, 25 Apr 2017 05:01 PM IST
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आज (25 अप्रैल) पूरी दुनिया विश्व मलेरिया दिवस मना रहा है। यह दिन मच्छरों से होने वाली बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से बनाया जाता है। लोगों में जागरूकता कितनी बढ़ी इसका तो पता नहीं लेकिन हर वर्ष मच्छर जनित बीमारियों के मरीज जरूर बढ़ रहे हैं।
वाराणसी में मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण के दावों के उलट स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जिले में हर साल मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डेंगू के नियंत्रण में भी खास सफलता नहीं मिली है।
2015 में जहां मलेरिया के 377 मरीज थे, वहीं 2016 में यह संख्या 538 हो गई। इसके अलावा 2015 में डेंगू के 172 और 2016 में 154 मरीजों की पुष्टि हुई थी।
अमूमन बरसात में एक ही जगह लंबे समय से पानी जमा होने की वजह से मच्छर जनित बीमारियां फैलने का खतरा अधिक रहता है लेकिन नगर निगम की ओर से नियमित फॉगिंग न कराए जाने के कारण अब हर मौसम में मच्छरों का प्रकोप रहता है।
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2017 में जनवरी से मार्च तक मलेरिया के 37 केस आ चुके हैं। मलेरिया के अलावा मच्छरों के काटने से डेंगू का खतरा भी अधिक रहता है। पिछले साल बनारस में ही पांच से अधिक मौतें हुई थीं।
विश्व मलेरिया दिवस पर वाराणसी जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एमए खान ने कहा कि जुलाई माह से स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को प्रार्थना के समय मलेरिया से बचाव के उपाय बताए जाएंगे। इससे पहले जून में मलेरिया रोधी और जुलाई में डेंगू रोधी माह मनाया जाएगा।
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वाराणसी में मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण के दावों के उलट स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जिले में हर साल मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डेंगू के नियंत्रण में भी खास सफलता नहीं मिली है।
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2015 में जहां मलेरिया के 377 मरीज थे, वहीं 2016 में यह संख्या 538 हो गई। इसके अलावा 2015 में डेंगू के 172 और 2016 में 154 मरीजों की पुष्टि हुई थी।
अमूमन बरसात में एक ही जगह लंबे समय से पानी जमा होने की वजह से मच्छर जनित बीमारियां फैलने का खतरा अधिक रहता है लेकिन नगर निगम की ओर से नियमित फॉगिंग न कराए जाने के कारण अब हर मौसम में मच्छरों का प्रकोप रहता है।
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2017 में जनवरी से मार्च तक मलेरिया के 37 केस आ चुके हैं। मलेरिया के अलावा मच्छरों के काटने से डेंगू का खतरा भी अधिक रहता है। पिछले साल बनारस में ही पांच से अधिक मौतें हुई थीं।
विश्व मलेरिया दिवस पर वाराणसी जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एमए खान ने कहा कि जुलाई माह से स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को प्रार्थना के समय मलेरिया से बचाव के उपाय बताए जाएंगे। इससे पहले जून में मलेरिया रोधी और जुलाई में डेंगू रोधी माह मनाया जाएगा।
मलेरिया के कारण और रोकथाम
मलेरिया का प्रकोप
- फोटो : File Photo
मलेरिया मादा एनोफिलेज़ मच्छर के काटने से फैलता है। मलेरिया पैरासाइड पहले इंसान के लीवर को फि र उसके ब्लड को इफेक्ट करता है। ब्लड के पूरी तरह संक्रमित होने के बाद मलेरिया की आशंका बढ़ जाती है।
आमतौर पर मलेरिया उन व्यस्क लोगों को होता है जो मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में रह रहे हैं। ऐसे लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। मलेरिया रोकने के लिए मच्छरदानी और एंटी लारवा का छिड़काव करना चाहिए।
कीटनाशक दवाओं के छिड़काव से भी मलेरिया पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
मलेरिया के लक्षण
चक्कर आना, सांस फूलना, उल्टी, सर्दी के साथ बुखार आना और गंभीर मामलों में बेहोशी।
आमतौर पर मलेरिया उन व्यस्क लोगों को होता है जो मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में रह रहे हैं। ऐसे लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। मलेरिया रोकने के लिए मच्छरदानी और एंटी लारवा का छिड़काव करना चाहिए।
कीटनाशक दवाओं के छिड़काव से भी मलेरिया पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
मलेरिया के लक्षण
चक्कर आना, सांस फूलना, उल्टी, सर्दी के साथ बुखार आना और गंभीर मामलों में बेहोशी।