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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   World Heart Day: 300 patients reaching hospital every day, this is how to save themselves

विश्व हृदय दिवस: हर दिन अस्पताल पहुंच रहे 300 मरीज, 12 साल के बच्चों को भी दिक्कत, ऐसे करें बचाव

Fri, 29 Sep 2023 08:08 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 29 Sep 2023 08:08 AM IST
सार

हृदय रोग से बचाव के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, साल दर साल मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसमें भी कम उम्र में यह बीमारी होना और चिंता कारण है। ओपीडी में 30 से 40 मरीज हार्ट अटैक वाले पहुंच रहे हैं। इसमें कई मरीजों की एंजियोग्राफी करनी पड़ती है।

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World Heart Day: 300 patients reaching hospital every day, this is how to save themselves
विश्व हृदय दिवस - फोटो : Istock

विस्तार

 दिल की बीमारी पहले जहां 50 साल से अधिक उम्र वालों को होती थी, वहीं अब 20 से 40 साल के युवा छोड़िए 12 साल के बच्चे भी इससे अछूते नहीं रहे। बीएचयू अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि बीमारी की चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या में पिछले 12 साल में 18 गुना इजाफा हुआ है। 2011 में जहां एक सप्ताह में तीन दिन चलने वाली ओपीडी में हर सप्ताह 100 मरीज हृदय रोग विभाग की ओपीडी में आते थे, वहीं 2023 में हर दिन 300 मरीज पहुंच रहे हैं। इसी तरह अन्य अस्पतालों में भी मरीज आ रहे हैं। वहीं, 20 वर्ष कम उम्र के करीब 30 बच्चे सप्ताह में विभाग में आ रहे हैं।

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हृदय रोग से बचाव के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, साल दर साल मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसमें भी कम उम्र में यह बीमारी होना और चिंता कारण है। ओपीडी में 30 से 40 मरीज हार्ट अटैक वाले पहुंच रहे हैं। इसमें कई मरीजों की एंजियोग्राफी करनी पड़ती है।

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केस-1 : बीएचयू अस्पताल में हृदय रोग की ओपीडी में 15 दिन पहले एक 16 साल के छात्र को दिल में दर्द की शिकायत पर उसके परिजन लेकर आए। यहां जांच के बाद पता चला कि उसको हार्ट अटैक हुआ। इस बच्चे की कैथ लैब में एंजियोग्राफी तक करनी पड़ी।

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केस-2

पिछले सप्ताह गाजीपुर निवासी एक 40 साल की महिला को परिजन लेकर आए कि उसका दिल तेजी से धड़क रहा है और पसीना आता है। ओपीडी में डॉक्टर ने ईसीजी सहित अन्य जांच करवाई तो पला चला कि उसको हार्ट अटैक आया है।

महिलाओं में 45, पुरुषों में 30 साल के बाद हो रही बीमारी

बीएचयू हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर का कहना है कि दिल की बीमारी होने की जो उम्र थी, उसके अनुसार पहले महिलाओं में 55, पुरुषों में 45 के बाद यह बीमारी होती थी। अब जिस तरह के मरीज ओपीडी में दिल में दर्द की बीमारी लेकर आ रहे हैं, उसमें पुरुषों में 30 और 45 साल की उम्र में ही महिलाएं दिल की रोगी बन रही है। अस्पताल में इसी उम्र के मरीज अधिक आते हैं। इसके पीछे बदलती जीवन शैली, खानपान में बदलाव, व्यायाम न करना, तनाव लेना मुख्य वजह हैं। समय रहते अगर लोग नहीं चेते तो आगे चलकर यह बीमारी एक महामारी का रूप ले सकती है।

 

World Heart Day: 300 patients reaching hospital every day, this is how to save themselves
विश्व हृदय दिवस - फोटो : Istock

जरा सी सावधानी से बच सकती हैं कई जानें

हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर का कहना है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को बीमारी के कारण ओर बचाव के बारे में जागरूक किया जाता है। इसमें जरा सी सावधानी से 80 से 85 फीसदी जानों को बचाया जा सकता है। इसमें लोग अगर सिगरेट, शराब का सेवन न करने के साथ ही फास्टफूड का सेवन न करने, नियमित व्यायाम करें तो दिल मजबूत होगा। ऐसा बहुत कम ही लोग कर पाते हैं

यह भी जानना है जरूरी

  • हर चौथा मरीज प्रदूषण की वजह से दिल का रोगी बन रहा है।
  • हार्ट अटैक वाले हर तीसरे व्यवक्ति की उम्र 40 साल से कम है।
  • हार्ट अटैक से मरने वालों में हर दूसरे व्यक्ति की उम्र 50 साल से कम है।

हृदय रोग के कारण

मधुमेह और उच्चरक्तचाप, पारिवारिक इतिहास, बदलती जीवन शैली, शराब का सेवन करना, व्यायाम न करना आदि।

हृदय रोग के लक्षण

छाती में दर्द, सीने में जकड़न, सामान्य से धीमा या तेज धड़कन, चक्कर आना या बेहोशी, थकान, चलते-चलते पसीना आना।

बचाव के उपाय

  • हर दिन कम से कम 45 मिनट तक योग एवं व्यायाम करना।
  • धुआं निकलने वाली गाड़ियों की जगह ई बाइक और साइकिल चलाना।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • 40 साल की उम्र के बाद समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करवाते रहना चाहिए।
  • कम से कम हर दिन 7 घंटे सोना चाहिए।

 

World Heart Day: 300 patients reaching hospital every day, this is how to save themselves
विश्व हृदय दिवस - फोटो : सोशल मीडिया।

सरकारी अस्पतालों में नहीं है हृदय रोग विशेषज्ञ

जिले में एक भी सरकारी अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के साथ ही शास्त्री अस्पताल रामनगर में हृदय रोग विशेषज्ञ के एक-एक पद हैं लेकिन कहीं भी तैनाती नहीं है। दिल में दर्द या बीपी बढ़ने के जो मरीज आते हैं, उन्हें या तो फिजीशियन देख रहे हैं या फिर कोई अन्य चिकित्सक देखते हैं। अस्पतालों की ओर से तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। यहां आने वाले ज्यादा गंभीर मरीजों को भी बीएचयू रेफर किया जाता है।

आयुर्वेदिक उपचार है हृदय रोगियों के लिए प्रभावी

हृदय रोगियों के लिए आयुर्वेदिक उपचार अधिक प्रभावी है। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल चौकाघाट के काय चिकित्सा और पंचकर्म विभाग में भी ऐसे मरीज पहुंचते हैं। डॉ. अजय कुमार का कहना है कि अधिकांश मामलों में तनाव हृदय रोग का कारण होता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी समस्या भी इसकी वजह है। दिल की बीमारी में अर्जुन की छाल, ब्राह्मी और जटमांसी, हल्दी, कुटकी, गाय का दूध, अलसी का इस्तेमाल कर बचा सकता है। अस्पताल आने वाले मरीजों को इसके प्रयोग के बारे में भी पूरी जानकारी दी जाती है।

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