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विश्वप्रसिद्ध रामलीला कल से: कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद आयोजन, 300 साल से ज्यादा पुरानी है परंपरा

Thu, 08 Sep 2022 05:58 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 08 Sep 2022 05:58 PM IST
सार

काशी की विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला की शुरुआत नौ सितंबर को अनंत चतुर्दशी से होगी। यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक विरासत में शामिल यह रामलीला 31 दिन तक चलेगी।

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World famous Ramnagar ki Ramlila start from 9 september in varanasi after Two years Corona period
रामनगर की रामलीला (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोस्वामी तुलसीदास का उद्घोष था जाको अर्थ जहां है जैसो, लीला ललित लखावति तैसो। कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद शिव की नगरी काशी में जनता ब्रह्मांड नायक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं की साक्षी बनेगी। अनंत चतुर्दशी से शुरू होने वाला रामलीला का यह अनुष्ठान संपूर्ण विश्व में अनोखा है। संत शिरोमणि तुलसीदास और मेघाभगत का यह अनुष्ठान चार सौ से अधिक सालों की यात्रा का साक्षी है।

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बुधवार को शहर की प्रमुख लीलाओं की कार्यक्रम की सूची जारी कर दी गई। काशी की विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला की शुरुआत नौ सितंबर को अनंत चतुर्दशी से होगी। यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक विरासत में शामिल यह रामलीला 31 दिन तक चलेगी। नौ सितंबर को रावण के जन्म से लेकर नौ अक्तूबर तक लीला का मंचन होगा। रावण जन्म के बाद रामबाग पोखरे से क्षीरसागर की झांकी निकाली जाएगी। देवस्तुति और आकाशवाणी होगी। शहर की सभी रामलीला समितियों ने तैयारियाें को अंतिम रूप दे दिया है। 
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गोस्वामी तुलसीदास और मेघा भगत ने की रामलीला की शुरुआत
साढे़ चार सौ साल पुरानी चित्रकूट और लाटभैरव की रामलीला से लेकर दो सौ साल से अधिक पुरानी रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला की शुरुआत बेहद अनोखी है। शिव की नगरी में उनके आराध्य भगवान श्रीराम की लीला की शुरुआत सबसे पहले गोस्वामी तुलसीदास और उनके प्रिय मित्र मेघा भगत ने की।

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World famous Ramnagar ki Ramlila start from 9 september in varanasi after Two years Corona period
रामलीला की निकली झांकी। - फोटो : अमर उजाला

गोस्वामी तुलसीदास ने संगीतमय स्वरूप में रामलीला की शुरुआत की। इसके बाद उनके मित्र व मुंहबोले बड़े भाई मेघा भगत ने झांकियों की लीला शुरू की। तुलसीघाट पर गोस्वामी तुलसीदास ने रामलीला की शुरुआत लगभग 1590 में की थी।

संकल्प और मुकुट पूजन से होता है रामलीला का आरंभ
रामलीला के अनुष्ठान का आरंभ संकल्प और मुकुट पूजन से होता है। लीला समितियां अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित अवधि तक लीला का आयोजन करती हैं। यह अवधि पांच से 35 दिन तक होती है। रामलीला में तीन प्रमुख शैलियां मिलती हैं। झांकी लीला, तुलसी लीला और घटित लीला। झांकी लीला वैष्णव पद्धति की लीला है। तुलसी लीला गोस्वामी तुलसीदास द्वारा आरंभ की गई। घटित लीला का स्वरूप रामनगर में देखा जा सकता है।

सचल होती हैं रामलीलाएं

World famous Ramnagar ki Ramlila start from 9 september in varanasi after Two years Corona period
रामनगर की रामलीला (फाइल)
काशी की रामलीलाएं सचल होती हैं। रोजाना अलग-अलग स्थानों पर लीला का मंचन होता है। कई स्थान तो लीला स्थल के नाम से ही प्रसिद्ध हैं। रामनगर का मंच विशाल है जो लगभग 20 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। चित्रकूट लीला में कोई विशेष मंच विधान नहीं होता है। तुलसी लीला में मंच विधान को नहीं अपनाया जाता, लेकिन शिवपुर रामलीला में मंच के दर्शन होते हैं।
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