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विश्व पर्यावरण दिवस : हीट जोन काशी के बीच हरियाली से राहत

Wed, 05 Jun 2019 01:47 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 05 Jun 2019 01:47 PM IST
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world environment day greenery is in these areas in Varanasi
काशी हिंदू विश्वविद्यालय का हरा-भरा इलाका - फोटो : अमर उजाला

काशी हीट लैंड बनने की कगार पर है। एक-दूसरे से सटकर बने घरों के कारण तापमान और बढ़ जाता है। इन सबके बीच कुछ जगहों की हरियाली लोगों को राहत दे रही है और यह हैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर, डीरेका, कैंटोमेंट क्षेत्र, काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और सिगरा स्टेडियम की ग्रीन बेल्ट। शहर के बीच यहां की हरियाली शहरवासियों के लिए ऑक्सीजन बैंक की तरह है।

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वायु प्रदूषण के कारण परेशान लोग सुबह और शाम शुद्ध ऑक्सीजन के लिए यहीं पहुंचते हैं। यहां का तापमान शहर से 1-2 डिग्री कम रहता है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की हरियाली बढ़ते तापमान पर हमेशा भारी रहती है। यहां का तापमान शहर की तुलना में आमतौर पर दो डिग्री कम रहता है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, कैंटोमेंट क्षेत्र और सिगरा स्टेडियम भी लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं।
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प्रोफेसर एसएन पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय का तापमान गर्मी में औसतन 2 डिग्री कम रहता है। बारिश भी शहर की अपेक्षा विश्वविद्यालय परिसर में अधिक होती है। अगर शहर को हीट आइलैंड बनने से बचाना है तो हमें शहर में बड़े स्तर पर पौधरोपण करना होगा।
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ये हैं हीट जोन :
नदेसर, सिगरा, लहुराबीर, गोदौलिया, लक्सा, चौक, भेलूपुर, दुर्गाकुंड, लंका, जैतपुरा, मंडुआडीह, महमूरगंज, पांडेयपुर, शिवपुर, राजघाट और लहरतारा।

यह है कारण :

  • बेतरतीब और सटकर बने बहुमंजिला भवन।
  • सूर्य की रोशनी अवशोषित होने के लिए न तो खुली जगह है और न ही पेड़-पौधे।
  • कंक्रीट और डामर से बनीं सड़कें और फुटपाथ।
  • एसी का ज्यादा इस्तेमाल।
  • कृषि भूमि का क्षेत्रफल घटना। 
  • पेड़ों ज्यादा काटे गए, नए पौधे कम लगे। 
  • कई तालाब पाटकर कॉलोनियां बसा दी गईं।


क्या है हीट जोन :
बेतरतीब और सटाकर बनते घरों और ऊंची इमारतों के कारण सरफेस एरिया बढ़ जाता है। इसके कारण गर्मी तेजी से बढ़ती है। इसे ही अरबन हीट आईलैंड इफेक्ट (हीट जोन) के तौर पर जाना जाता है। यहां का तापमान तुलनात्मक रूप से तीन से चार डिग्री तक अधिक रहता है।

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