डीएवी पीजी कॉलेज के वाणिज्य विभाग के फैकल्टी डिस्कशन फोरम की ऑनलाइन संगोष्ठी में वक्ताओं ने कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम पर विस्तार से चर्चा की। बतौर मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर नफीस ए खान ने कहा कि महामारी से वर्क फ्रॉम होम से लोगाें के जीवन की रक्षा हुई। इस वजह से शिक्षा, पर्यटन, रियल इस्टेट सहित कई क्षेत्रों में नुकसान भी हुआ। वर्क फ्रॉम होम का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव विषय पर संगोष्ठी में प्रो. नफीस ने कहा कि वर्क फ्रॉम होम से व्यवसायिक गतिविधियों में होने वाला ऑपरेटिंग व्यय 60 से 70 फीसदी तक कम हुआ। रियल इस्टेट, शिक्षा, पर्यटन ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें पारंपरिक कार्यपद्धति की ही आवश्यकता है। इसे वर्क फ्रॉम होम की पद्धति से बदला नही जा सकता है। विशिष्ट वक्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि के डिप्टी रजिस्ट्रार बनमाली सिंह ने कहा कि घर से काम करने के कारण कुछ बड़े उद्योगों में जान आ गई। बड़े स्तर पर होने वाला कार्यालय खर्च बचा। बड़े महानगरों में पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी घर से कार्य करना अनुकूल कहा जा सकता है। अध्यक्षता कर प्राचार्य डॉ. सत्यदेव सिंह ने कहा कि वर्क फॉर्म होम की कार्यशैली कोरोना महामारी में काफी कारगर रही। अतिथियों का स्वागत एवं विषय स्थापना विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कमल, संचालन डॉ. तरू सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओएन दूबे ने किया।