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पारंपरिक कला एवं शिल्प से सशक्त होंगी महिलाएं
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकल को ग्लोबल बनाने के आह्वान पर काशी में पहल शुरू हो चुकी है। गांव की महिलाएं अब तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ेंगी और उनके द्वारा निर्मित वस्तुएं ग्लोबल स्तर तक पहुंचेंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सहयोग से साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल डेवलपमेंट के तत्वावधान में बसनी स्थित रुरल वीमेन टेक्नोलॉजी पार्क में महिलाओं के लिए निशुल्क प्रशिक्षण की शुरुआत हुई।
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ड्रेस डिजाइनिंग, सिलाई, जरी जरदोजी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्थान के निदेशक अजय सिंह ने बताया कि भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सहयोग से अत्याधुनिक तकनीक से काशी की ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक आर्ट एवं क्राफ्ट को संवर्धित, संरक्षित एवं रोजगारोन्मुख बनाया जाएगा। साथ ही वैश्विक पर्यटन व बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाराणसी के तीन विकास खंड बड़ागांव, पिंडरा एवं काशी विद्यापीठ में लगभग तीन हजार महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जाएगा। तीनों ब्लॉक में तीन केंद्र के माध्यम से डिजिटल प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिलाएं वस्त्र, पर्यटन, डिजिटल प्रिंटिंग और होम टेक्सटाइल के डिजाइन को बढ़ावा देंगी। इच्छुक और हुनरमंद महिलाओं को उक्त केंद्र द्वारा न सिर्फ प्रशिक्षित किया जाएगा बल्कि उनकी मांग के आधार पर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जाएगी। ताकि वह मुख्य धारा में जुड़कर खुद को स्वावलंबी बना सकें और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे सकें।
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महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ड्रेस डिजाइनिंग, सिलाई, जरी जरदोजी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्थान के निदेशक अजय सिंह ने बताया कि भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सहयोग से अत्याधुनिक तकनीक से काशी की ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक आर्ट एवं क्राफ्ट को संवर्धित, संरक्षित एवं रोजगारोन्मुख बनाया जाएगा। साथ ही वैश्विक पर्यटन व बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाराणसी के तीन विकास खंड बड़ागांव, पिंडरा एवं काशी विद्यापीठ में लगभग तीन हजार महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जाएगा। तीनों ब्लॉक में तीन केंद्र के माध्यम से डिजिटल प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिलाएं वस्त्र, पर्यटन, डिजिटल प्रिंटिंग और होम टेक्सटाइल के डिजाइन को बढ़ावा देंगी। इच्छुक और हुनरमंद महिलाओं को उक्त केंद्र द्वारा न सिर्फ प्रशिक्षित किया जाएगा बल्कि उनकी मांग के आधार पर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जाएगी। ताकि वह मुख्य धारा में जुड़कर खुद को स्वावलंबी बना सकें और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे सकें।
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