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पीएम के क्षेत्र में सुरक्षित नहीं महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Dec 2014 12:42 PM IST
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वाराणसी। काशी में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। छात्राएं होें या कामकाजी महिलाएं या फिर महिला पुलिस कांस्टेबल, हर किसी के साथ यहां छेड़खानी की घटनाएं हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के बाद बनारस की पुलिस को हाईटेक करने की कवायद तो चल रही है लेकिन महिलाओं के साथ हो रहे अपराध के आंकड़े शर्मसार करने वाले हैं।
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पुलिस की बात करें तो वह कार्रवाई तो दूर मुकदमा तक दर्ज नहीं करती। छेड़खानी जैसे गंभीर मामलों में शांतिभंग की धाराओं में आरोपियों के चालान के कई मामले सामने आए हैं। बीते दस महीने में पुलिस ने सिर्फ 20 मामलों में ही छेड़छाड़ का केस दर्ज किया है।
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जबकि हर महीने 100 से अधिक महिलाएं और लड़कियां छेड़छाड़ की शिकार हुई हैं।
पहले तो पुलिस छेड़खानी के मामले में तहरीर नहीं लेती, अगर पीडि़त के दबाव में तहरीर ले भी ली तो आरोपी का शांति भंग की धाराओं में चालान कर देती है।
जिससे आसानी से आरोपी को जमानत मिल जाती है। यह हाल तब है जब पूरा देश महिला सुरक्षा को लेकर चिंतित है। कड़ी कार्रवाई न होने से छेड़खानी की घटनाएं बढ़ी हैं। पुलिस फाइल में महिला अपराध के आंकड़ों में कमी दखाई गई है मगर सच्चाई बिल्कुल इसके उलट है।
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पिछले साल पुलिस डायरी में शील भंग की 106 घटनाएं दर्ज थीं जबकि इस साल यह आंकड़ा घटकर 83 पर आ गया। इसी तरह पिछले साल 53 महिलाएं दुष्कर्म की शिकार हुई थी। जबकि इस साल 43 महिलाओं ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया है।
महिलाओं के साथ चेन स्नैचिंग की घटनाएं तो आम है। शायद ही कोई ऐसा दिन होगा जिस दिन शहर में महिला के गले से चेन बदमाश छीनकर न भागते हों। अधिकतर मामलों में पुलिस केस दर्ज न करके पीडि़त को कार्रवाई का भरोसा दिलाकर टरका देती है।