वाराणसी में सड़क पर गूंजी किलकारी: बस में प्रसव पीड़ा होने पर स्टाफ ने उतारा, महिलाओं ने कराया सुरक्षित प्रसव
Varanasi News:
वाराणसी में बस यात्रा के दौरान प्रसव पीड़ा होने पर स्टाफ ने गर्भवती को सड़क किनारे उतार दिया। आसपास मौजूद महिलाओं ने सड़क पर ही प्रसव कराया, जहां नवजात की किलकारी गूंज उठी। प्री-मैच्योर डिलीवरी और खून की कमी के कारण नवजात की हालत गंभीर बताई गई। बाद में मां और बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वाराणसी में बस यात्रा के दौरान प्रसव पीड़ा होने पर स्टाफ ने गर्भवती को सड़क किनारे उतार दिया। आसपास मौजूद महिलाओं ने सड़क पर ही प्रसव कराया, जहां नवजात की किलकारी गूंज उठी। प्री-मैच्योर डिलीवरी और खून की कमी के कारण नवजात की हालत गंभीर बताई गई। बाद में मां और बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विस्तार
चिरईगांव ब्लॉक कार्यालय के सामने शनिवार शाम आदिवासी महिला की सड़क पर डिलीवरी का मामला सामने आया है। संदहां गांव निवासी सुरेश बनवासी 8 महीने की गर्भवती पुत्री अंजू को मायके ला रहे थे। अंजू की शादी गाजीपुर के जखनियां निवासी काजू बनवासी से हुई है।
गर्भावस्था के अंतिम महीनों में बेहतर देखभाल के लिए पिता उसे एक सवारी बस में बैठाकर घर ला रहे थे। शाम 7 बजे बस चिरईगांव ब्लॉक कार्यालय के सामने पहुंची, अंजू को अचानक पेट में तेज दर्द के साथ प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हो गई।
आपातकालीन स्थिति में संवेदनशीलता दिखाने के बजाय, बस के स्टाफ ने गाड़ी रोक दी और गर्भवती को सड़क पर उतार दिया। बस से उतारने पर महिला की हालत और बिगड़ गई और उसे प्रसव होने लगा। महिलाओं ने तुरंत सूझबूझ दिखाई। कपड़े की आड़ (परदा) बनाकर सड़क किनारे ही अंजू का सुरक्षित प्रसव कराया, जहां उसने एक नवजात पुत्र को जन्म दिया।
राहगीर ने घटना की जानकारी पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर मौजूद स्टाफ नर्स रीता देवी को दी। स्वास्थ्य टीम ने जच्चा-बच्चा को सुरक्षित प्रसव कक्ष में पहुंचाया, जहां दोनों को प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सहायता दी गई। दोनों को वार्ड में भर्ती कर उच्च चिकित्साधिकारी को सूचना दी गई।
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बच्चे की हालत गंभीर होने पर मां और नवजात को कबीरचौरा महिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। पीएचसी पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एकता बुंदेला ने बताया कि बच्चा प्री मैच्योर है और उसका वजन 1950 ग्राम है, जबकि सामान्य बच्चे का वजन 2.5 किग्रा से कम नहीं होना चाहिए। उसे दूध पीने में दिक्क्त हो रही थी और एसएनसीयू की आवश्यकता थी। मां के शरीर में ब्लड की कमी थी।
सीएचसी पर खुले में महिला का प्रसव, मामले की होगी जांच
जिले के बड़ागांव ब्लॉक स्थित सीएचसी बिरावकोट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला का खुले में प्रसव हुआ। इसके पांच दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएचसी पहुंचकर विरोध जताया। अपर निदेशक स्वास्थ्य ने जांच कराने का निर्णय लिया है।
इस संबंध में सीएमओ से रिपोर्ट भी मांगी गई है। बड़ागांव में सियरहा के बनवासी बस्ती निवासी 38 वर्षीय महिला को 25 जून को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सीएचसी बिरावकोट लेकर पहुंचे। महिला को प्रसव पीड़ा होने की जानकारी मिलते ही वहां मौजूद स्टाफ बाहर आया और उसे लेबर रूम में ले जाने का प्रयास किया। हालांकि महिला अंदर जाने के लिए तैयार नहीं हुई। इसी दौरान उसका वहीं प्रसव हो गया।
उपचार के बाद महिला घर चली गई। परिजनों का आरोप है कि प्रसव वाले दिन शाम करीब चार बजे भर्ती करने के बाद उसी रात महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया। बाद में उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने शिकायत की। इस पर सीएचसी अधीक्षक ने स्टाफ नर्स और संबंधित आशा कार्यकर्ता से पूछताछ की।
महिला की यह आठवीं डिलीवरी थी। सीएचसी पहुंचने के बाद स्टाफ नर्स ने उसे लेबर रूम में जाने के लिए कहा, लेकिन वह तैयार नहीं हुई। ऐसे में जहां महिला बैठी थी, वहीं सुरक्षित तरीके से उसका प्रसव कराया गया। आशा कार्यकर्ता और स्टाफ नर्स से स्पष्टीकरण मांगा गया है। - डॉ. कालिका प्रसाद, अधीक्षक, सीएचसी बिरावकोट