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मनोज सिन्हा के बहाने, भाजपा ने साधे कई निशाने

Fri, 07 Aug 2020 05:33 AM IST
Jeet Kumar शशांक मिश्र, वाराणसी
शशांक मिश्र, वाराणसी Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 07 Aug 2020 05:33 AM IST
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with manoj sinha becoming lieutenant governor of jammu kashmir, bjp has many goals
पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला

बीएचयू के छात्रसंघ अध्यक्ष से केंद्रीय मंत्री तक का सफर पूरा करने वाले मनोज सिन्हा को जम्मू-कश्मीर का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। बिहार चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री को बडे़ पद (उपराज्यपाल) से नवाज कर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।

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पूर्वांचल से रोटी-बेटी के रिश्ते से जुड़े बिहार के भूमिहार समाज को सीधा संदेश देने की कोशिश की गई है। इसके अलावा इस निर्णय को वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए पूर्वांचल में जमीन मजबूत करने की कवायद से जोड़ा जा रहा है। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल सिन्हा को जम्मू कश्मीर की नई जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यूपी के सियासी समीकरण भी साधे हैं।
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तीन दशक से राजनीति में सक्रिय पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की पूर्वांचल के हर वर्ग में स्वीकार्यता है। उत्तर भारत की शिक्षा के बड़े केंद्र बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे मनोज सिन्हा पूर्वांचल के साथ ही बिहार की सियासत में सक्रिय रहे हैं। छात्र राजनीति से सक्रियता के कारण वर्षों से बिहार की सियासत में भी दखल रखते रहे हैं।
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जानकारों की मानें तो बिहार से जुड़े केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे और मनोज सिन्हा बीएचयू में समकालीन रहे हैं। उसी दौर से बिहार के विश्वविद्यालयों में मनोज सिन्हा को बुलाया जाता रहा था।

बतौर दूरसंचार और रेल राज्यमंत्री के रूप में वर्ष 2014 से 2019 तक का कार्यकाल बहुत ही शानदार रहा था। इस दौरान उन्होंने बिहार को पूर्वांचल सहित अन्य राज्यों से जोड़ने के लिए कई ट्रेनों की सौगात दी थी।

मोकामा की बंद पड़ी फैक्ट्री को खोलने की बात हो या मेमू ट्रेनों के संचालन को लेकर निर्णय, बतौर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

पूर्वांचल और बिहार के कई जिलों में निर्णायक बिरादरी है भूमिहार
पूर्वांचल और बिहार के कई जिलों में भूमिहार बिरादरी निर्णायक भूमिका में हैं। वर्ष 2019 में गठबंधन प्रत्याशी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि मनोज सिन्हा को राज्यसभा भेजा जाएगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से चुनाव में शिकस्त के बाद भी मंत्री पद से नवाजे जाने से मनोज सिन्हा को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। मगर, बिहार चुनाव से ठीक पहले पूर्वांचल के बड़े चेहरे को जम्मू कश्मीर जैसे राज्य का उप राज्यपाल बनाकर बड़ी सौगात दी है।


मनोज सिन्हा तीन दशक से राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्हें कई बार हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2014 में तीसरी बार सांसद बनने के बाद उन्होंने पूर्वांचल और बिहार को कई सौगात दी थीं। बावजूद इसके वर्ष 2019 में उनकी हार के बाद से ही उन्हें समर्थक आशान्वित थे।

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