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वाराणसीः वन्यजीव तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार, 20 लाख की 143 हड्डियां बरामद

Sat, 04 Sep 2021 07:20 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 04 Sep 2021 07:20 PM IST
सार

वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो नई दिल्ली से एसटीएफ को सूचना मिली थी कि संरक्षित वन्यजीव लकड़बग्घा की हड्डी (कंकाल) का सौदा करने के लिए तस्कर सिगरा में जुटे हुए हैं। 

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Wildlife smuggling gang busted in varanasi by stf 143 bones of hyena worth Rs 20 lakh recovered
लकड़ बग्घा की हड्डी के साथ पांच तस्कर गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मिर्जापुर के जंगलों से लकड़बग्घा के हड्डी की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। एसटीएफ वाराणसी इकाई ने सिगरा स्थित एक होटल के पास से पांच तस्करों को गिरफ्तार किया। तस्करों के कब्जे से लगभग बीस लाख रुपये मूल्य की 143 हड्डी बरामद हुई है। संरक्षित जानवर लकड़बग्घा की हड्डी का सौदा करने वाले पांचों तस्कर शनिवार को जेल भेज दिए गए।  

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वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो नई दिल्ली से एसटीएफ को सूचना मिली थी कि संरक्षित वन्यजीव लकड़बग्घा की हड्डी (कंकाल) का सौदा करने को सिगरा थाना अंतर्गत परेडकोठी स्थित एक होटल के पास कुछ तस्कर जुटे हुए हैं। शुक्रवार रात में ही एसटीएफ वाराणसी इकाई के निरीक्षक पुनीत परिहार, निरीक्षक राघवेंद्र मिश्रा और निरीक्षक अरविंद सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने होटल के बाहर खड़े पांच तस्कर को गिरफ्तार किया।
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इस दौरान चादर में लिपटे लकड़बग्घा की 143 हड्डी भी एसटीएफ ने बरामद किया। पूछताछ में गिरफ्तार सारनाथ के अनमोल नगर कालोनी निवासी आनंद कुमार सिंह, हुकुलगंज पांडेयपुर निवासी अरविंद मौर्या, मिर्जापुर के चिल्ह थाना अंतर्गत ठिकसारी गांव निवासी सुदामा, चिल्ह थाना के बल्लीपुरवा निवासी सिपाही और मिर्जापुर के कुरैश नगर के रहने वाले महमूद ने कबूला कि लकड़बग्घा की हड्डी मिर्जापुर के जंगल से लाई गई है।इन हड्डियों को आनंद कुमार सिंह और अरविंद मौर्य ने  लगभग 20 लाख रुपये में बिकवाने के लिए मंगवाया था।   

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तेंदुआ की हड्डी बताकर बेचने वाले थे

एसटीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुर्लभ जीव तेंदुआ की हड्डियों की तस्करी होती है। इन हड्डियों का उपयोग विदेशों में शक्तिवर्धक दवाएं बनाने में किया जाता है। जिससे यह काफी ऊंचे दाम पर बिक जाती हैं। मिर्जापुर के जंगलों में रहने वाले वन वासियों के सहयोग से लकड़बग्घा की हड्डियां प्राप्त की गई थी।

इसे तेंदुआ की हड्डी बताकर बेचने वाले थे। एसटीएफ के अनुसार लकड़बग्घा को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसूची-3 के अंतर्गत संरक्षित जीव के श्रेणी में रखा गया है। जिसका शिकार व इसके अंगों का व्यापार निषिद्ध है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संरक्षित वन्य जीवों की तस्करी करने वाले गिरोह की सूचनाएं यूपी एसटीएफ को लगातार मिल रही थीं।

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