फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   When they took Manas-Gita from UP-Bihar to other countries, they were called coolies, later became PM-President

Varanasi News: यूपी-बिहार से दूसरे देशों में मानस-गीता ले गए तो कुली कहलाए, बाद में बने पीएम-राष्ट्रपति

Fri, 05 Jun 2026 01:54 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 01:54 AM IST
विज्ञापन
When they took Manas-Gita from UP-Bihar to other countries, they were called coolies, later became PM-President
यूपी-बिहार से रामचरित मानस और गीता जैसे धर्मग्रंथों को लेकर गिरमिटिया मजदूरों को कुली कहा गया लेकिन बाद में ये ही पीएम और राष्ट्रपति बने। साथ ही उनके साथ गए ग्रंथ ही उन देशों का धार्मिक और आध्यात्मिक आधार बन गए। सूरीनाम में भारतीय आगमन दिवस पर गिरमिटिया देशों में हिंदी पत्रकारिता और साहित्य, संस्कृति, परंपरा को लेकर बीएचयू में बृहस्पतिवार को केएन उडुप्पा सभागार में उडुप्पा सभागार में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ।
विज्ञापन

पत्रकारिता विभाग के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि भारतीय प्रवासी कभी कुली कहे जाते थे, वे आज कई देशों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उच्च सांविधानिक पदों तक पहुंचे हैं। आगे कहा कि 170 साल पहले जब प्रवासी भारतीय यहां से गए तब अपने साथ सिर्फ श्रम शक्ति लेकर गए थे, लेकिन सूरीनाम में भोजपुरी, अवधि, मैथिली, मगही और ब्रज जैसी भाषाओं की पूरी संस्कृति ही तैयार हो गई है। सरनामी हिंदी, फिजी हिंदी और मॉरीशस की क्रेयोल भाषा बनी। साथ ही ये रामचरितमानस, कबीर की बीजक और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों को भी अपने साथ ले गए और अब वहां धर्म और आध्यात्म का खूब बोलबाला है। प्रवास वर्ष 1834 में मॉरीशस से शुरू हुआ, जिसके बाद सूरीनाम, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो व गयाना सहित कई देशों में हुआ। ये उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग ही थे।
विज्ञापन

उन देशों के लोग सुनते हैं पंचतंत्र की कथाएं
विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने कहा कि आज भी भारत में हिंदू ग्रंथ जितने प्रासंगिक हैं, गिरमिटिया देशों में भी उतना ही है। पंचतंत्र की कथाएं उन देशों के घरों में सुनाए जाते हैं। वहां के लोगों के आराध्य देव श्रीराम और श्रीकृष्ण हैं। गिरमिटिया के देशों में कर्म का आधार गीता है। विशेषज्ञ अरविंद पांडेय ने कहा कि गिरमिटिया देशों में हिंदी पत्रकारिता और साहित्य ने प्रवासी भारतीयों को उनकी मूल पहचान से जोड़े रखने में पुल का काम किया है। विशिष्ट अतिथि आईएमएस बीएचयू के डीन प्रो. संजय गुप्ता ने कहा कि हिंदी के वैश्विक स्वरूप और प्रभाव को ज्यादा विस्तार दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत में शुरू हो गिरमिटोलॉजी कोर्स और अध्ययन
वक्ता शारदानंद हरिनंदन ने कहा कि भले ही हम भौगोलिक रूप से भारत से दूर हैं, लेकिन हमारा हृदय आज भी हिंदुस्तान के लिए धड़कता है। भारत में गिरमिटोलॉजी के अध्ययन और शिक्षण की औपचारिक शुरुआत की जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी प्रवासी भारतीयों के इतिहास और योगदान से परिचित हो सके। प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि हिंदी विश्व समुदाय को जोड़ रही है। संचालन डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने किया। धन्यवाद ज्ञापन बृजेश पांडेय ने प्रस्तुत किया। सभागार में प्रो. भुवाल राम, प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. विद्योत्तमा मिश्र, डॉ. बाला लखेंद्र, रंजीत राय, प्रांजल पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed