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थिरके कदम तो झूम के बरसे बादल
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2015 02:32 AM IST
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वाराणसी। अलकनंदा देवी की बंदिशों पर जब पं. माता प्रसाद और पं. रविशंकर मिश्र ने कथक की पेशकश की तो सोमवार की रात घिरी घटाएं बेमौसम बरसने लगीं। बंगलूरू के एस. आकाश एक तरफ बांसुरी पर राग शिवरंजनी की अवतारणा कर रहे थे तो दूसरी ओर गरज-तड़क के साथ ऐसी बारिश हुई कि खचाखच भरे मंदिर परिसर से लेकर छतों तक अंटी भीड़ सुरक्षित ठांव के लिए भटकने लगी।
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फिर भी संगीत की लय जिस अंदाज में खुशबू लिए चली, उसने देश-दुनिया से आए संगीत प्रेमियों को कहीं न कहीं खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया। नृत्य, गायन, वादन के साथ छह दिनी संकट मोचन संगीत समारोह की आखिरी निशा परवान चढ़ी।
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शाम सात बजे शुरुआत हुई वाराणसी के प्रसिद्ध कथक नर्तक पं. माता प्रसाद और पं. रविशंकर के कथक नृत्य से। इन्होंने राग वैरागी में निबद्ध शिव वंदना आदि शंभू स्वरूप मुनिवर... की बंदिश पर थिरकना शुरू किया। इसके बाद अलकनंदा देवी की दादरा की बंदिश ये कैसा जादू डाला कन्हैया... के बोल पर मोहक नृत्य किया।
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तबले पर शुभ महाराज, हारमोनियम पर संतोष मिश्र, सारंगी पर अनीस मिश्र ने संगत की। बोल पढ़ंत किया रुद्रशंकर ने। इनके बाद एस. आकाश ने बांसुरी पर राग शिवरंजनी की अवतारणा की। इनके साथ तबले पर संगत की पं. कुबेर नाथ मिश्र ने। दिल्ली से आए शुभेंद्र राव ने सितार पर राग जोगेश्वरी की अवतारणा की।
इन्होंने अपने गुरु पं. रविशंकर के राग को बजाया जिसे उन्होंने जोग और परमेश्वरी को मिलाकर बनाया था। इन्होंने बारिश के बाद माहौल को थाम लिया। तबले पर संगत की शुभ महाराज ने।