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लक्ष्मण ने काटे नाक और कान तो शूर्पणखा पहुंची भाइयों के पास

Mon, 11 Oct 2021 12:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 12:36 AM IST
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When Lakshman cut his nose and ears, Shurpanakha reached the brothers.
नाक कान बिनु भइ बिकरारा। जनु स्रव सैल गेरु कै धारा॥ खर दूषन पहिं गइ बिलपाता। धिग धिग तव पौरुष बल भ्राता॥ अर्थात बिना नाक-कान के शूर्पणखा विकराल हो गई। उसके शरीर से रक्त इस प्रकार बहने लगा मानो काले पर्वत से गेरू की धारा बह रही हो। वह विलाप करती हुई खर-दूषण के पास गई और बोली... हे भाई! तुम्हारे पौरुष को धिक्कार है, तुम्हारे बल को धिक्कार है।
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रविवार को चित्रकूट रामलीला में शूर्पणखा की नक्कटैया की झांकी सजाई गई। पंचवटी मे भगवान श्रीराम व लक्ष्मण के मोहक रूप को देख शूर्पणखा मोहित हो जाती है। सुंदर स्त्री का रूप धरकर उन्हें रिझाने का प्रयास करती है। सफ ल न होने पर क्रोधित हो अपने असली रूप में आती है जिससे सीता डर जाती हैं। श्रीराम के इशारे पर लक्ष्मण तलवार से उसका नाक व कान काट देते हैं। इससे क्रोधित शूर्पणखा अपने भाइयों खर व दूषण के पास जाती है और उसके पौरूष को धिक्कारती है। खरदूषण सेना को ललकारते हुए श्रीराम से युद्ध करता है और मारा जाता है। आरती पं. अभिनव उपाध्याय ने उतारी। वहीं तुलसीघाट की रामलीला में सुतीक्ष्ण मिलन, अगस्तय समागम, पंचवटी निवास की लीला का मंचन हुआ।
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चित्रकूट-सेबरी मंगल व हनुमान मिलन
तुलसीदास- शूर्पणखा विरूपकरण, खरादिवध, सीताहरण
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