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तुम्हें गैरों से कब फुर्सत, हम अपने गम से कब खाली...
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तुम्हें गैरों से कब फुर्सत, हम अपने गम से कब खाली, चलो हो चुका मिलना जुलना न तुम खाली न हम खाली...यह दर्द है वायुसेना में सार्जेंट रहे शहीद विशाल पांडेय के पिता विजय शंकर पांडेय और पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के शहीद जवान रमेश यादव की पत्नी रेनू यादव का। यूं तो सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर शहीदों की शहादत और वीरगाथाओं को याद किया जाता है। साथ ही सैनिकों और आश्रितों के लिए जनता से धन संग्रह कर इनकी मदद की जाती है। लेकिन क्या इतना काफी है, ऐसे में देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के परिवारों के दर्द को भी अमर उजाला संवाददाता ने विशेष बातचीत में जानने की कोशिश की।
विशाल पांडेय के पिता काट रहे अधिकारियों के चक्कर
17 फरवरी 2019 को श्रीनगर में पेट्रोलिंग के दौरान वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था। इस दौरान पायलट विशाल पांडेय शहीद हो गए थे। उनके नाम पर स्मारक, गेट और प्रतिमा लगवाने का वादा किया गया, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ। पिता विजय शंकर पांडेय कहते हैं कि अब और आश्वासन नहीं चाहिए। उन्हें फुर्सत नहीं है तो हम बुढ़ापे में कब तक चक्कर लगाते रहेंगे। उस विषय पर बातचीत बंद कर दी है। रोहनिया के कुरहुआं के काशीपुर गांव निवासी विजय शंकर पांडेय का परिवार पिछले छह साल से हुकुलगंज में रह रहा है। बताया कि स्मारक और मूर्ति की फाइल सिर्फ टेबल-टेबल घूम रही है। नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय से पत्र मांगा गया था। इसके बाद गांव में स्मारक, सड़क और गेट बनवाने का पत्र सीडीओ, सीआरओ, डीडीओ, एडीएम कार्यालय से होकर पर्यटन विभाग तक पहुंचा। अधिकारियों से वार्ता हुई तो पता चला कि लखनऊ में पत्र भेजा जा चुका है। शासन के निर्देश पर विशाल की पत्नी माधवी को लखनऊ में सरकारी नौकरी मिली और सेना की ओर से बड़ी धनराशि भी। छोटे भाई और बहन की शिक्षा और भरण पोषण की जिम्मेदारी बुजुर्ग पिता पर है। विजय सिगरा स्थित एक सिनेमा हाल में मैनेजर हैं।
पुलवामा में शहीद रमेश यादव के नाम पर नहीं बनी सड़क
पुलवामा हमले में शहीद चौबेपुर के तोफापुर गांव निवासी रमेश यादव के नाम पर सड़क, स्मारक सहित कई घोषणाएं हुईं, लेकिन पूरी कोई नहीं हुई। गांव की सड़क का शहीद के नाम पर शिलान्यास तो कर दिया गया, लेकिन कब बनेगी, इस बारे में कोई बता नहीं पा रहा है। शहीद की पत्नी रेनू यादव डिप्टी सीएम केशव मौर्य को पत्रक भी सौंप चुकी हैं। रेनू यादव ने बताया कि चंदौली सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा व प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर घर आए थे, उनके प्रयास से जिलाधिकारी कार्यालय में नौकरी लगी। सरकार से मिलने वाली राशि भी मिल गई, लेकिन पैतृक घर से साव के पोखरा तक साढ़े चार किलोमीटर की सड़क, अड़ियापर के पास शहीद स्मारक को लेकर विधायक व प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने शिलान्यास तो कर दिया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। शिक्षा विभाग के अध्यापकों की एकत्र धनराशि जो शहीद के परिवार को मिलनी थी। वह धनराशि किसी फंड में जमा कर दी गई। इसकी जानकारी भी डिप्टी सीएम को दी गई।
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269 भूतपूर्व सैनिकों की हो गई मृत्यु
देश की सरहद पर अपनी जान की बाजी लगाकर देश सेवा करने वाले जिले में 7,035 भूतपूर्व सैनिकों में सिर्फ 6,766 ही बचे हैं। भूतपूर्व सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र से मिले आंकड़ों के अनुसार, दस सितंबर तक 269 भूतपूर्व सैनिकों की मृत्यु हो चुकी है। जबकि जिले के 15 जवान अब तक शहीद हो चुके हैं। 667 सैनिकों की विधवाएं हैं। इनके और इनके बच्चों, परिजनों की सहायता की जाती है।
सैनिकों और आश्रितों के लिए करते हैं धन संग्रह
जिला सैनिक कल्याण व पुनर्वास केंद्र के प्रभारी और विंग कमांडर सतीश चंद्र मिश्रा बताते हैं कि हर वर्ष सात दिसंबर को सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है। देश के परमवीर, बलिदानी और त्यागी शहीद सैनिकों जिन्होंने राष्ट्र को अपने त्याग और बलिदान से गौरवान्वित किया है, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यही नहीं, जवानों और आश्रितों की सुख सुविधाओं के लिए नागरिकों से यथा संचित धन संग्रह का पुण्य कार्य करते हैं। ताकि शहीद जवानों के परिवारों, सैनिकों, विधवाओं और अनाथ बच्चों की सहायता कर सकें।
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विशाल पांडेय के पिता काट रहे अधिकारियों के चक्कर
17 फरवरी 2019 को श्रीनगर में पेट्रोलिंग के दौरान वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था। इस दौरान पायलट विशाल पांडेय शहीद हो गए थे। उनके नाम पर स्मारक, गेट और प्रतिमा लगवाने का वादा किया गया, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ। पिता विजय शंकर पांडेय कहते हैं कि अब और आश्वासन नहीं चाहिए। उन्हें फुर्सत नहीं है तो हम बुढ़ापे में कब तक चक्कर लगाते रहेंगे। उस विषय पर बातचीत बंद कर दी है। रोहनिया के कुरहुआं के काशीपुर गांव निवासी विजय शंकर पांडेय का परिवार पिछले छह साल से हुकुलगंज में रह रहा है। बताया कि स्मारक और मूर्ति की फाइल सिर्फ टेबल-टेबल घूम रही है। नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय से पत्र मांगा गया था। इसके बाद गांव में स्मारक, सड़क और गेट बनवाने का पत्र सीडीओ, सीआरओ, डीडीओ, एडीएम कार्यालय से होकर पर्यटन विभाग तक पहुंचा। अधिकारियों से वार्ता हुई तो पता चला कि लखनऊ में पत्र भेजा जा चुका है। शासन के निर्देश पर विशाल की पत्नी माधवी को लखनऊ में सरकारी नौकरी मिली और सेना की ओर से बड़ी धनराशि भी। छोटे भाई और बहन की शिक्षा और भरण पोषण की जिम्मेदारी बुजुर्ग पिता पर है। विजय सिगरा स्थित एक सिनेमा हाल में मैनेजर हैं।
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पुलवामा में शहीद रमेश यादव के नाम पर नहीं बनी सड़क
पुलवामा हमले में शहीद चौबेपुर के तोफापुर गांव निवासी रमेश यादव के नाम पर सड़क, स्मारक सहित कई घोषणाएं हुईं, लेकिन पूरी कोई नहीं हुई। गांव की सड़क का शहीद के नाम पर शिलान्यास तो कर दिया गया, लेकिन कब बनेगी, इस बारे में कोई बता नहीं पा रहा है। शहीद की पत्नी रेनू यादव डिप्टी सीएम केशव मौर्य को पत्रक भी सौंप चुकी हैं। रेनू यादव ने बताया कि चंदौली सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा व प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर घर आए थे, उनके प्रयास से जिलाधिकारी कार्यालय में नौकरी लगी। सरकार से मिलने वाली राशि भी मिल गई, लेकिन पैतृक घर से साव के पोखरा तक साढ़े चार किलोमीटर की सड़क, अड़ियापर के पास शहीद स्मारक को लेकर विधायक व प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने शिलान्यास तो कर दिया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। शिक्षा विभाग के अध्यापकों की एकत्र धनराशि जो शहीद के परिवार को मिलनी थी। वह धनराशि किसी फंड में जमा कर दी गई। इसकी जानकारी भी डिप्टी सीएम को दी गई।
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269 भूतपूर्व सैनिकों की हो गई मृत्यु
देश की सरहद पर अपनी जान की बाजी लगाकर देश सेवा करने वाले जिले में 7,035 भूतपूर्व सैनिकों में सिर्फ 6,766 ही बचे हैं। भूतपूर्व सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र से मिले आंकड़ों के अनुसार, दस सितंबर तक 269 भूतपूर्व सैनिकों की मृत्यु हो चुकी है। जबकि जिले के 15 जवान अब तक शहीद हो चुके हैं। 667 सैनिकों की विधवाएं हैं। इनके और इनके बच्चों, परिजनों की सहायता की जाती है।
सैनिकों और आश्रितों के लिए करते हैं धन संग्रह
जिला सैनिक कल्याण व पुनर्वास केंद्र के प्रभारी और विंग कमांडर सतीश चंद्र मिश्रा बताते हैं कि हर वर्ष सात दिसंबर को सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है। देश के परमवीर, बलिदानी और त्यागी शहीद सैनिकों जिन्होंने राष्ट्र को अपने त्याग और बलिदान से गौरवान्वित किया है, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यही नहीं, जवानों और आश्रितों की सुख सुविधाओं के लिए नागरिकों से यथा संचित धन संग्रह का पुण्य कार्य करते हैं। ताकि शहीद जवानों के परिवारों, सैनिकों, विधवाओं और अनाथ बच्चों की सहायता कर सकें।