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नवसंवत्सर ‘कीलक’ के स्वागत में उठे हजारों हाथ
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sun, 22 Mar 2015 02:12 AM IST
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वाराणसी। बेहतरी के नए संकल्पों के साथ नव संवत्सर ‘कीलक’ का काशी में शनिवार की सुबह स्वागत किया गया। गंगा तटों पर पौ फटते ही कीलक संवत्सर 2072 के स्वागत में हजारों हाथ उठ खड़े हुए। कहीं फूलों, रंगों से रंगोलियां सजाई गईं तो कहीं उगते सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य दिया गया। शंकराचार्य घाट पर प्रार्तमंगलम में सैकड़ों बटुकों ने अर्घ्य देकर नव संवत की अगवानी की। अस्सी घाट पर केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री निरंजन ज्योति ने नव संवत्सर का स्वागत किया।
शंकराचार्य घाट पर शंखनाद और घंटे, घडि़याल के साथ उगते सूर्य का स्वागत किया गया। द्वारका- शारदा, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के सानिध्य में प्रातर्मंगलम में सैकड़ों बटुकों, संतों ने पूरब की लाली को अर्घ्य दिया। सूर्य नमस्कार के बाद योग, प्राणायाम कराया गया। बीएचयू के
संगीत विभाग के डॉ. विजय कपूर ने भजनों की प्रस्तुति की। तबले पर संगत की पंकज राय ने। इसके बाद विद्याश्री धर्मार्थ न्यास की ओर से प्रकाशित सनातनी पंचांग का विमोचन शंकराचार्य ने किया। ज्योतिष्पीठ के आचार्य पं. रविशंकर द्विवेदी ने नव वर्ष का फलादेश सुनाया। इस मौके पर शंकराचार्य के निजी सचिव सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी, कैवल्यानंद समेत कई संत उपस्थित थे। अध्यक्षता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने की। शंकराचार्य घाट पर ललिता कोटि द्राक्षार्चन महायज्ञ भी शुरू हुआ। उधर, दशाश्वमेध घाट
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अस्सी घाट पर सुबह गंगा आरती के बाद नव संवत्सर पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। पुष्कर तालाब पर जागृति फाउंडेशन की ओर से ब्रह्मा मंदिर में नव संवत्सर के आगमन पर पूजा हुई। नव वर्ष चेतना मंच की ओर से अस्सी घाट पर नव संवत्सर का स्वागत केंद्रीय मंत्री ने किया। पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं विश्व शांति के लिए आहुति दी। टीएम महापात्रा, कामेश्वर उपाध्याय, जगदीश
झुनझुनवाला समेत तमाम लोग उपस्थित थे। उधर, पियरी स्थित वेद भवन में नवग्रह, गणेश पूजन के बाद कीलक नव संवत्सर का फलादेश वाचन किया गया। इस मौके पर शनिवार गोष्ठी के अध्यक्ष पं. धर्मशील चतुर्वेदी, कवि सांड़ बनारसी, राजेंद्र त्रिवेदी, रेयाज बनारसी, भूषण त्यागी, नरोत्तम श्ल्पिी, बृजेश चंद्र पांडेय, बृजेंद्र मिश्र दमदार समेत तमाम कवियों ने काव्य पाठ किया। गंगोत्री बिहार नगवा में गंगा तट पर विश्व भोजपुरी संघ की ओर से नवसंवत्सर की अगवानी की। हरजौर, घृतकुमारी, आंवला, आम के पौधे लगाकर विश्व वानिकी दिवस मनाया गया।
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शंकराचार्य घाट पर शंखनाद और घंटे, घडि़याल के साथ उगते सूर्य का स्वागत किया गया। द्वारका- शारदा, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के सानिध्य में प्रातर्मंगलम में सैकड़ों बटुकों, संतों ने पूरब की लाली को अर्घ्य दिया। सूर्य नमस्कार के बाद योग, प्राणायाम कराया गया। बीएचयू के
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संगीत विभाग के डॉ. विजय कपूर ने भजनों की प्रस्तुति की। तबले पर संगत की पंकज राय ने। इसके बाद विद्याश्री धर्मार्थ न्यास की ओर से प्रकाशित सनातनी पंचांग का विमोचन शंकराचार्य ने किया। ज्योतिष्पीठ के आचार्य पं. रविशंकर द्विवेदी ने नव वर्ष का फलादेश सुनाया। इस मौके पर शंकराचार्य के निजी सचिव सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी, कैवल्यानंद समेत कई संत उपस्थित थे। अध्यक्षता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने की। शंकराचार्य घाट पर ललिता कोटि द्राक्षार्चन महायज्ञ भी शुरू हुआ। उधर, दशाश्वमेध घाट
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अस्सी घाट पर सुबह गंगा आरती के बाद नव संवत्सर पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। पुष्कर तालाब पर जागृति फाउंडेशन की ओर से ब्रह्मा मंदिर में नव संवत्सर के आगमन पर पूजा हुई। नव वर्ष चेतना मंच की ओर से अस्सी घाट पर नव संवत्सर का स्वागत केंद्रीय मंत्री ने किया। पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं विश्व शांति के लिए आहुति दी। टीएम महापात्रा, कामेश्वर उपाध्याय, जगदीश
झुनझुनवाला समेत तमाम लोग उपस्थित थे। उधर, पियरी स्थित वेद भवन में नवग्रह, गणेश पूजन के बाद कीलक नव संवत्सर का फलादेश वाचन किया गया। इस मौके पर शनिवार गोष्ठी के अध्यक्ष पं. धर्मशील चतुर्वेदी, कवि सांड़ बनारसी, राजेंद्र त्रिवेदी, रेयाज बनारसी, भूषण त्यागी, नरोत्तम श्ल्पिी, बृजेश चंद्र पांडेय, बृजेंद्र मिश्र दमदार समेत तमाम कवियों ने काव्य पाठ किया। गंगोत्री बिहार नगवा में गंगा तट पर विश्व भोजपुरी संघ की ओर से नवसंवत्सर की अगवानी की। हरजौर, घृतकुमारी, आंवला, आम के पौधे लगाकर विश्व वानिकी दिवस मनाया गया।