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Varanasi Weather Update: आषाढ़ में तल्ख हुए सूरज के तेवर से बढ़ी परेशानी, गर्मी के साथ उमस भी बढ़ा रही बेचैनी

Sun, 10 Jul 2022 12:31 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 10 Jul 2022 12:31 PM IST
सार

आषाढ़ का महीना बीतने को है लेकिन बादल झलक दिखलाकर चले गए हैं। इस कारण वाराणसी समेत आसपास के जिलों में गर्मी का असर कम नहीं हो रहा है। 

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Weather Update Varanasi Asadh month about to end but heat and humidity increasing people facing trouble
तेज धूप से बचने के लिए गमछे का सहारा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन दिन बाद सावन का महीना शुरू होने वाला है। इस समय आषाढ़ चल रहा है। आमतौर पर आषाढ़ में बारिश होती है, लेकिन वाराणसी समेत आसपास के जिलों में पिछले कुछ दिनों से जेठ जैसी गर्मी पड़ रही है। तल्ख हुए सूरज के तेवर से जनमानस की परेशानी बढ़ गई है। दिन में धूप और पुरवा हवाओं के कारण उमस में बढ़ोत्तरी हुई है। रविवार सुबह 11 बजे तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

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इससे पहले शनिवार को अधिकतम तापमान 38.0 जबकि न्यूनतम तापमान 28. डिग्री सेल्सियस रहा था। मानसूनी सिस्टम के कमजोर पड़ने के बाद मौसम में उतार-चढ़ाव से उमस और गर्मी बढ़ गई है। तपिश बढ़ने के साथ काफी ज्यादा उमस है। लोग चिपचिपी गर्मी से परेशान हैं। मौसम विज्ञान विभाग के अनुमान के मुताबिक वाराणसी में अगले कई दिन बादल छाए रहेंगे। हालांकि, बारिश होने की कोई उम्मीद नहीं है। 
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नर्सरी डालने के बाद बारिश का इंतजार कर रहे किसान
कृषि कार्य के लिए तेरह कातिक तीन अषाढ़ की कहावत काफी प्रसिद्ध है। कार्तिक में बारिश न होने से  किसानों को बुवाई करने का अनुकूल मौका नहीं मिला। अब आषाढ़ बीतने में मात्र तीन दिन शेष रह गए हैं। इसके बाद सावन का महीना शुरू हो जाएगा। आषाढ़ की बारिश के बाद खेतों में चारों तरफ हरियाली नजर आती थी। लेकिन इस साल खेत सूखे पड़े हैं।

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किसानों को सावन के महीने में झमाझम बारिश होने का इंतजार है ताकि आषाढ़ की कमी पूरी हो सके। बारिश न होने से किसान उहापोह की स्थिति में हैं। नर्सरी डालकर किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम ऐसा ही रहा तो इस साल खरीफ की मुख्य फसल धान का उत्पादन घट जाएगा। 

कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि जिस तरह का तापमान पिछले दो से तीन दिनों से है, ऐसे में धान की खेती प्रभावित होगी। जिनके पास साधन है वह जैसे तैसे रोपाई कर रहे हैं लेकिन जो किसान बारिश का इंतजार कर रहे है उनको नुकसान होगा।

धान के उत्पादन पर पड़ेगा

15 जुलाई तक ऐसे ही मौसम रहा तो धान के उत्पादन पर 25 प्रतिशत तक असर पडे़गा। ऐसे में किसान धान की सीधी बुआई कर नुकसान से बच सकते हैं। धान की सीधी बुआई की जानकारी के लिए केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं। 

ढढोरपुर के किसान पद्म श्री चंद्रशेखर सिंह कहते हैं कि किसान अभी धैर्य रखें, मौसम अनुकूल होगा। कई बार ऐसा हुआ है कि जब शुरुआती महीने में बारिश नहीं हुई लेकिन बाद में मौसम ने साथ दिया। प्रारंभिक दिनों में बारिश न होने के बाद भी किसानों को धान की अच्छी उपज मिली है। किसान नर्सरी को सुरक्षित रखें और शाम के वक्त उसकी सिंचाई करें। खाली पड़े खेत की तैयारी कर लें। जिससे बारिश होने पर खेत में पानी रुक जाए और रोपाई करने में आसानी हो जाए।

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