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फूलों की अगरबत्ती ने दिव्यांगों की जिंदगी में भर दी सुगंध
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Fri, 02 Dec 2016 02:45 AM IST
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फूलों से अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लेते दिव्यांग।
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मंदिर-मसजिदों में चढ़ने वाले फूल अब गंगा में प्रवाहित नहीं किए जा रहे हैं। इन फूलों से बनाई जा रही अगरबत्ती ने दिव्यांगों की आत्मनिर्भरता की राह आसान कर दी है। दिव्यांगों द्वारा बनाई गई ये अगरबत्ती फिलहाल बनारस के कुछ मध्यमवर्गीय परिवारों तक ही पहुंच रही हैं। जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारा जाएगा।
दरअसल, फिक्स माई लाइफ फाउंडेशन ने जहां पूजा स्थलों पर चढ़ाए जाने वाले फूलों की उपयोगिता साबित की, वहीं इसे दिव्यांगों के लिए रोजगार के अवसर के रूप में जोड़ दिया है। फाउंडेशन की ओर से प्रशिक्षित किए गए 42 दिव्यांग फूलों की अगरबत्ती बना रहे हैं। फिलहाल, एक दिन में दो सौ पैकेट अगरबत्ती तैयार हो रही हैं। 30 रुपये पैकेट वाले फूलों की अगरबत्ती को आस्ट्रेलिया और इटली के बाजारों में उतारने की तैयारी है। दोनों देश के कुछ कारोबारियों ने कपड़े और प्लास्टिक के पैक में भेजे गए नमूनों को पसंद कर लिया है।
दिव्यांगों की जिंदगी संवारने के लिए फाउंडेशन ने सबसे पहले कपड़ों के पर्स बनाने का काम शुरू किया था लेकिन बाद में मंदिर-मसजिद के फूलों से अगरबत्ती बनाई जाने लगी। फाउंडेशन के कर्मचारी खुद मंदिरों, मसजिदों से फूल इकट्ठा करते हैं। उपासना स्थलों पर चढ़ाए गए जो फूल फेंक दिए जाते हैं, उन्हें चुन कर इकट्ठा करने के साथ ही सुखाया जाता है और फिर उसी के पाउडर से अगरबत्ती तैयार की जाती है।
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दरअसल, फिक्स माई लाइफ फाउंडेशन ने जहां पूजा स्थलों पर चढ़ाए जाने वाले फूलों की उपयोगिता साबित की, वहीं इसे दिव्यांगों के लिए रोजगार के अवसर के रूप में जोड़ दिया है। फाउंडेशन की ओर से प्रशिक्षित किए गए 42 दिव्यांग फूलों की अगरबत्ती बना रहे हैं। फिलहाल, एक दिन में दो सौ पैकेट अगरबत्ती तैयार हो रही हैं। 30 रुपये पैकेट वाले फूलों की अगरबत्ती को आस्ट्रेलिया और इटली के बाजारों में उतारने की तैयारी है। दोनों देश के कुछ कारोबारियों ने कपड़े और प्लास्टिक के पैक में भेजे गए नमूनों को पसंद कर लिया है।
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दिव्यांगों की जिंदगी संवारने के लिए फाउंडेशन ने सबसे पहले कपड़ों के पर्स बनाने का काम शुरू किया था लेकिन बाद में मंदिर-मसजिद के फूलों से अगरबत्ती बनाई जाने लगी। फाउंडेशन के कर्मचारी खुद मंदिरों, मसजिदों से फूल इकट्ठा करते हैं। उपासना स्थलों पर चढ़ाए गए जो फूल फेंक दिए जाते हैं, उन्हें चुन कर इकट्ठा करने के साथ ही सुखाया जाता है और फिर उसी के पाउडर से अगरबत्ती तैयार की जाती है।
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