पीएम मोदी की ओर से शुरू जलमार्ग-1 पर 11 महीने से थमा जल परिवहन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सागरमाला परियोजना से जोड़ने वाली जलमार्ग-1 पर पिछले 11 महीने से जल परिवहन थमा हुआ है। वाराणसी के रामनगर के मल्टी मॉडल टर्मिनल से सामान भेजने का आर्डर नहीं मिलने से इस परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, जलमार्ग विकास योजना से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि 2020 तक इसके जरिए साढ़े तीन मिलियन टन माल का आयात निर्यात किया जाएगा। मगर, ज्यादा किराया और समय लगने के कारण व्यापारी व मल्टीनेशनल कंपनियां राल्हूपुर बंदरगाह के जरिए सामान भेजने में रुचि नहीं ले रही हैं। अब तक मात्र 281.8 मीट्रिक टन ही माल आया और गया।
साढ़े पांच हजार करोड़ से गंगा में विकसित जल परिवहन सेवा का नियमित संचालन न हो पाने से कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। वाराणसी से हल्दिया तक जलमार्ग पर फरवरी 2019 के बाद फिर पानी के जहाज नहीं लौटे हैं। हालांकि इसके बाद आईडब्लूएआई के पास अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की बुकिंग तो आई है पर उसे जलपोत नहीं मिले तो वहीं छोटे उद्यमी जलमार्ग को महंगा सौदा बता रहे। ऐसे में जलमार्ग को परिवहन का चौथा सशक्त माध्यम बनाने के सपने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता अवली वर्मा ने आईडब्लूएआई से जल परिवहन पर जवाब मांगा तो उन्हें बताया गया कि वाराणसी से खाद्य तेल, खाद्य पदार्थ, टीएमटी बार के साथ ही स्टील के अन्य सामानों का कार्गो के जरिए भेजा और लाया गया है। बंदरगाह से कितने लोग आए और गए के सवाल पर बताया गया क्रि यहां से सिर्फ मालवाहक जहाज ही गुजरे हैं।
कंटेनर की कमी के कारण रुका जल परिवहन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 में रामनगर के राल्हूपुर में ढाई सौ करोड़ की लागत से तैयार मल्टीमोडल टर्मिनल देश को समर्पित किया था। इस दौरान कोलकाता से आए पेप्सिको के 16 कंटेनर को वाराणसी लाया गया था। इसके बाद यहां से इतने ही कंटेनर लेकर जलपोत रवाना हुआ था। फिर फरवरी-2019 में डाबर कंपनी का माल लेकर जहाज यहां पहुंचा।
इसके बाद न तो कोई जलपोत वाराणसी आया और न ही यहां से गया। सूत्रों की मानें तो जलपरिवहन के लिए कई बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पाद जलमार्ग से भेजने पर सहमति जताई है। जलपोत की कमी के चलते सामानों का आवागमन नहीं हो पा रहा है। आईडब्लूएआई को जलपोत निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश का इंतजार है।
वहीं दूसरी ओर वाराणसी व आसपास के उद्यमी जलमार्ग से अपने सामान फिलहाल हल्दिया के रास्ते दूसरे देश नहीं भेज रहे। इसका कारण हल्दिया तक लगने वाला लंबा समय और हल्दिया पोर्ट पर सामान के रख रखाव की उचित व्यवस्था न होना है। गंगा में जलपरिवहन में निरंतरता आने में अभी पांच से छह महीने और लग सकते हैं।
बेहतर करनी होगी कनेक्टविटी
जल परिवहन के जरिए सामान भेजने में किराया और समय ज्यादा लगता है। इसमें वाराणसी में सड़क मार्ग से बेहतर कनेक्टविटी नहीं होने के कारण सामान जेट्टी तक पहुंचने में दिक्कत होती है। इस परियोजना में काफी सुधार की जरूरत है।
आरके चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन