वीपी सिह की जयंती: आंबेडकर के दलित संघर्षों पर विमर्श, छात्रनेता बोले- पूर्व पीएम ने भारतीय समाज की शक्ति बनाई
Vishwanath Pratap Singh: पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिह की जयंती के अवसर पर वाराणसी के विभिन्न स्थानों पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। बीएचयू में भी छात्रनेताओं ओर अध्यापकों ने मिलकर कार्यक्रम किए। वीपी सिंह के नेतृत्व और कृतित्व पर विशेश चर्चा की गई।
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Varanasi News: पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिह की जयंती पर बीएचयू छात्रसंघ भवन में गोष्ठी हुई। बुधवार को पूर्व छात्रनेताओं और प्रोफेसरों के बीच उनके कृतित्व पर परिचर्चा चली। प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. एमपी अहिरवार ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने दलितों के लिए जो लड़ाईयां लड़ी उसे वीपी सिंह ने समाज की शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया।
बुद्ध की परंपरा के जीवित अगुआ वीपी सिंह के बाद शिक्षा क्षेत्र में अर्जुन सिंह ने पिछड़ी जातियों को सही मायने में प्रतिनिधित्व दिया। काशीराम का भी प्रमुख योगदान रहा। वीपी सिंह का जन्म 25 जून 1931 को हुआ था।
छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि लोकतांत्रिक सवालों पर संघर्ष के नायक गांधी, आंबेडकर और लोहिया के बाद जार्ज फर्नांडिस , मधु लिमये, मधु दंडवते और उसको अंतिम बिंदु तक वैधानिक रूप से पहुंचाने का काम वीपी सिह ने किया। तब राजनीति में नेतृत्व वैचारिकता और संघर्ष के बलबूते तय होता था।
छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री डॉ. सूबेदार सिह ने कहा कि वीपी सिंह ने मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास जैसे सैकड़ों लोगो राजनीति में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाया जो शायद उनके न रहने पर कुलीन राजनीति के शिकार हो गए।
आजीवन छात्र राजनीति को नहीं भूले
पूर्व मंत्री डॉ. बहादुर सिंह यादव ने कहा कि गांधी, लोहिया के बाद वीपी सिंह के नेतृत्व में पिछड़े आजादी की लड़ाई में लामबंद हुए। भले ही उनको नवसृजित समाजवादी भूल गए है। पूर्व अध्यक्ष हर्षवर्धन सिह ने कहा कि वह यूपी कालेज छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे और आजीवन छात्र राजनीति और छात्रनेताओं के प्रति स्नेह को जिंदा बनाए रखा। इस दौरान मनोज सिह काका, कुंदन राय प्रो. आनंद दीपायन, किसान नेता राजेंद्र चौधरी, संचालक डॉ. शम्मी कुमार आदि मौजूद थे।