UP Chunav 2022: वाराणसी में तीन फीसदी घटा मतदान, किसी को फायदा किसी को नुकसान
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी रोड शो और मंदिर दर्शन के बहाने जरूर अपने प्रत्याशियों को मजबूत किया था। फिलहाल कम हुए मत प्रतिशत को लेकर अप्रत्याशित नतीजों से इनकार नहीं किया जा सकता।
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कई विधानसभा क्षेत्रों में चार फीसदी तक कम मतदाता घर से नहीं निकले। हालांकि मतदान फीसदी कम होने के बाद राजनीतिक दल इसके नफा और नुकसान के आंकलन में जुट गए हैं। जिन क्षेत्रों में मुकाबला कांटे का है, वहां परिणाम के अप्रत्याशित होने की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों पर 58.80 फीसदी मतदान हुआ है। पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में यह आंकड़ा 61.63 फीसदी था। जबकि पांच साल में जिले भर में करीब दो लाख से ज्यादा मतदाता बढ़े थे। बावजूद इसके कम हुए मतदान फीसदी कई ओर इशारा कर रहा है।
यहां बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में 58.82 फीसदी मतदाताओं ने वाराणसी जिले में मतदान किया था। इस लिहाज से भी .2 फीसदी मतदान कम हुआ है। कम हुए मतदान को लेकर राजनीतिक दलों के अपने दावे हैं और उसके असर पर भी लोग समीक्षा कर रहे हैं।
मतदान कम होने की कई वजह
- मोबाइल पर प्रतिबंध और बूथों पर जमा नहीं होने के कारण लोग नहीं गए
- वर्तमान विधायकों के प्रति नाराजगी और दूसरे दलों के पसंदीदा प्रत्याशी नहीं होना भी कारण
- अभिजात्य वर्ग के लोगों का अपेक्षाकृत घरों से कम निकलना
- मतदाता सूची में कई लोगों का नाम न शामिल होना
- एक ही घर के लोगों का मतदान अलग अलग होना
भाजपा को मोदी मैजिक पर विश्वास, विपक्ष को नाराज मतदाताओं से आस
मतदान के बाद आठों विधानसभा की स्थिति लगभग साफ हो गई है। भाजपा को मोदी मैजिक पर पूरा विश्वास है और उसका दावा है कि पिछले चुनाव की तरह क्लीन स्वीप ही करेंगे। उधर, विपक्ष के प्रत्याशियों को नाराज मतदाताओं से उम्मीद है। यही कारण है विपक्ष के प्रत्याशी मतदान के दिन तक महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बनाए हुए थे।
दरअसल, विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन के बाद राजनीतिक दलों ने प्रचार में ताकत झोंकी थी। मतदान से एक सप्ताह पहले तक कई सीटों पर सपा और कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी। मगर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय प्रवास के दौरान हुए कार्यक्रमों ने प्रत्याशियों के प्रति नाराजगी को कम करने के साथ ही भाजपा के प्रति रुझान को बढ़ा दिया।
हालांकि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी रोड शो और मंदिर दर्शन के बहाने जरूर अपने प्रत्याशियों को मजबूत किया था। फिलहाल कम हुए मत प्रतिशत को लेकर अप्रत्याशित नतीजों से इनकार नहीं किया जा सकता। अब लोगों की निगाह परिणाम पर टिकी है।