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Kashi Vishwanath: 44 साल का विश्वनाथ मंदिर न्यास, 12 साल स्थायी अध्यक्ष के बिना रहा; अब तक 5 को तैनाती मिल सकी

Sat, 11 Jul 2026 10:24 AM IST
Aman Vishwakarma हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 11 Jul 2026 10:24 AM IST
सार

Varanasi News: श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का 44 वर्षीय इतिहास स्थायी अध्यक्ष के लंबे इंतजार का गवाह रहा है। न्यास 12 वर्ष तक स्थायी अध्यक्ष के बिना संचालित हुआ। वर्तमान में अध्यक्ष और पदेन सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ी फाइल भी पिछले 18 महीने से लंबित है। अब तक न्यास को केवल पांच स्थायी अध्यक्ष ही मिल सके हैं।

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Vishwanath Temple Trust spent 12 of its 44 years without permanent chairman only five individuals
काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

44 साल पुराने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने अब तक करीब 12 साल बिना स्थायी अध्यक्ष के काम किया है। काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह से प्रो. नागेंद्र पांडेय तक कुल पांच स्थायी अध्यक्ष ही रहे हैं। 18 महीने से ज्यादा समय से न्यास अध्यक्ष का पद खाली है। राज्य सरकार की ओर से नामित पांच सदस्यों के नाम भी घोषित नहीं किए गए। 1983 से 2026 के बीच चार बार अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हुई है। 

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मंदिर प्रशासन ने दिसंबर 2024 में न्यास परिषद का कार्यकाल समाप्त होने से एक महीने पहले ही संभावित अध्यक्ष और पांच नामित सदस्यों के नाम शासन को भेज दिए थे। 18 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है फिर भी न्यास परिषद का गठन नहीं किया गया। वर्तमान में केवल चार पदेन सदस्य ही काम कर रहे हैं। इनमें तीन अधिकारी शामिल हैं। 
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1983 से अब तक ऐसी स्थिति चार बार बनी, जब न्यास अध्यक्ष और नामित सदस्यों की नियुक्ति में देरी हो रही है। 1983 से 2002 तक मंदिर न्यास के अध्यक्ष काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह थे। उनके निधन के बाद 2002 में मध्य प्रदेश के सेवानिवृत्त अधिकारी टीपी तिवारी को अध्यक्ष बनाया गया था।

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उन्होंने कुछ ही महीने बाद ही इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 2009 तक यह पद खाली रहा और मंडलायुक्त कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में दायित्व निभाते रहे। छह साल बाद 2009 में प्रदेश सरकार ने पंडित हरिहर कृपालु त्रिपाठी को तीन वर्ष के लिए अध्यक्ष नामित किया। 2012 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद करीब डेढ़ साल तक यह पद खाली रहा। 

वर्ष 2013 में पं. अशोक द्विवेदी को न्यास का अध्यक्ष बनाया गया। वह 2003 में न्यास के सदस्य भी रह चुके थे। वर्ष 2016 में उन्हें दूसरी बार अध्यक्ष बनाया गया। 2019 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2021 में प्रो. नागेंद्र पांडेय को अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

न्यास परिषद का होना जरूरी है। अध्यक्ष और सदस्यों की मौजूदगी में बैठक में सहमति बनती है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम-1983 के नियमों के पालन के लिए यह आवश्यक भी है। जब से अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हुआ, तब से दर्शन करने भी नहीं गया हूं। - प्रो. नागेंद्र पांडेय, पूर्व अध्यक्ष, न्यास परिषद

श्रीकाशी विश्वनाथ न्यास का कार्यकाल समाप्त होने से एक महीने पहले ही संभावित सदस्यों के नाम शासन को भेज दिए गए थे। मंदिर से जुड़े सभी कार्य नियमित रूप से होते रहे हैं। इस संबंध में समय-समय पर पत्राचार भी हुआ है। अब शासन से निर्णय का इंतजार है। - विश्वभूषण मिश्रा, सीईओ, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर

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