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Varanasi: 234 वर्ष बाद संविवि में शुरू हुई परंपरा, 9 यज्ञशालाओं में सांसद, विधायक, मेयर, VC ने डालीं आहुतियां

Tue, 12 Mar 2024 04:55 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 12 Mar 2024 04:55 PM IST
सार

Sampurnanand Sanskrit University: नियमित रूप से वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा और विश्वकल्याण की कामना से रोजाना तीन घंटे यज्ञ के अनुष्ठान होंगे। विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र पांडेय ने बताया कि यज्ञशाला में नियमित रूप से हवन होगा।

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Vishwa Kalyan Mahayagya started in Sampurnanand Sanskrit University
Sampurnanand Sanskrit University - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। विश्वविद्यालय की स्थापना के 234 वर्ष बाद पहली बार अनवरत चलने वाली हवन यज्ञ की परंपरा शुरू हुई जो 365 दिन लगातार चलेगी। सुबह संवत्सरव्यापी चतुर्वेदस्वाहाकार विश्वकल्याण महायज्ञ में आहुतियां डालने के लिए सांसद, विधायक, मेयर और विश्वविद्यालयों के कुलपति पहुंचे थे। उन्होंने यज्ञ में आहुति डालकर आध्यात्मिक सुख की अनुभूति की।

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विश्वविद्यालय एवं विश्वविद्यालय विकास समिति की ओर से इस महायज्ञ का शुभारंभ परिसर स्थित पंच मंदिर से जलपूरित कलशयात्रा के साथ हुआ। 51 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। धर्म ध्वज लिए पुरुष जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा भी सपत्नीक शामिल थे।
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लश स्थापना के बाद डॉ. विजय कुमार शर्मा के आचार्यत्व में पंचांग पूजन से अनुष्ठान की शुरुआत हुई। अरणि मंथन से अग्नि प्रज्ज्वलित कर यज्ञ शुरू हुआ। प्रधानपीठ पर चारों वेदों की पूजा हुई। नौ कुंड चतुर्श, योनी, पद्म, वृत, अर्द्धचक्रकार, अष्टकोण, षष्ठकोण, समकोण और त्रिभुज यज्ञकुंड में लोगों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशिष्टजनों ने आहुतियां डालीं।

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महायज्ञ के संयोजक प्रो. महेंद्र और संचालक जयशंकर ने बताया कि 10 साल पहले विश्वविद्यालय में कभी-कभी हवन यज्ञ होता था, लेकिन हवन सामग्री की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से बंद हो गया। फिर विश्वविद्यालय प्रशासन ने फैसला लिया है कि वेद विभाग में बने नौ यज्ञ कुंडों में प्रतिदिन यज्ञ और अनुष्ठान होंगे। यह महायज्ञ यहां पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए प्रयोगशाला के रूप में काम करेगा। इस अनुष्ठान में कोई भी यजमान बन सकता है।

राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, अवधेश कुमार सिंह, काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी, संविवि के कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा, काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय, चंद्रशेखर सिंह, रजनीकांत द्विवेदी, वास्तुविद आरसी जैन, बीएचयू के प्रो. रमाकांत पांडेय, डॉ. हृदय नारायण पांडेय, काशी विद्वत परिषद के सदस्य आदि ने आहुतियां डालीं।

विश्वगुरु बनने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे लाने की जरूरत
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि विश्व गुरु बनना है तो संस्कृत शास्त्रों में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे लाना होगा। इसमें संरक्षित ज्ञान को सर्व सुलभ बनाना होगा। यह महायज्ञ उसी ज्ञानधारा का प्रारंभ है। कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने कहा कि यज्ञ से सामूहिकता, सहकारिता और एकता की भावना विकसित होती है।

महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि सनातन संस्कृति के संवर्धन, पोषण और रक्षा के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। विश्वविद्यालय विकास समिति के अध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि इस महायज्ञ को संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी। इसके जरिये हम अपनी संस्कृति का संरक्षण कर सकते हैं।



नवरात्रि व श्रावण माह में विशेष मंत्रों से यज्ञ
संयोजक प्रो. महेंद्र ने बताया कि चारों वेदों के मंत्रों से हवन होगा। मगर नवरात्रि, श्रावण माह, दीपावली, कार्तिक माह आदि विशिष्ट अवसरों पर विशेष मंत्र दुर्गासप्तशती, रुद्री, पुरुष सूक्त, श्रीसूक्त आदि से भी हवन कराया जाएगा।

जन्मदिन व शादी की सालगिरह पर कराएं यज्ञ
डाॅ. विजय शर्मा ने बताया कि यहां पर प्रतिदिन यज्ञ चलेगा। लोग अपने व बच्चों के जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर यज्ञ करा सकते हैं। उनको यहां पंजीकरण करवाना होगा। यज्ञ के लिए अभी तक 40 लोगों ने पंजीकरण करवाया है।

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