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पहली बारः विंध्याचल में त्रिकोण परिक्रमा के लिए बस सेवा शुरू, इतना है किराया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:32 AM IST
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विधायक पं. रत्नाकर मिश्र ने दिखाई हरी झंडी
- फोटो : अमर उजाला
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वासंतिक नवरात्र के दौरान विंध्याचल में त्रिकोण परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिए खुशखबरी है। त्रिकोण परिक्रमा के लिए पहली बार बस सेवा शुरुआत हुई है। शुक्रवार को मिर्जापुर नगर विधायक पं. रत्नाकर मिश्र ने हरी झंडी दिखा कर इसकी शुरुआत की।
नवरात्र में काली खोह और अष्टभुजा के रास्ते त्रिकोण परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिए बस सेवा शुरू की गई है। मात्र 60 रुपये में इस बस से यात्रियों को 12 स्थानों पर घुमाया जाएगा। श्रद्धालु इस बस से त्रिकोण परिक्रमा के अलावा नाग कुंड, भैरव मंदिर, बावन वीर मंदिर, काली खोह, सीताकुंड, मोतिया तालाब, गेरूआ तालाब, अष्टभुजा मंदिर, शिवपुर स्थित रामेश्वर मंदिर एवं रामगया घाट स्थित मां तारा देवी मंदिर जाकर दर्शन कर सकेंगे।
इसके अलावा नवरात्र मेले के दौरान माता के दर्शन का समय भी तय किया गया है। 24 घंटे में होने वाली चारों आरतियों के दौरान मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। मंगला आरती के लिए भोर में चार से पांच बजे तक, राजसी आरती के लिए दोपहर 12 से एक बजे तक, छोटी आरती के लिए शाम सात से आठ बजे और बड़ी आरती के लिए रात साढ़े नौ से साढ़े दस बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे।
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बता दें कि देश के तमाम स्थानों पर शक्तिपीठ और विंधयांचल को सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है। यहां माता अपने तीनों रूप महालक्ष्मी, महाकाली व महासरस्वती के रूपों में तीन कोण पर विराजमान हो कर भक्तों को दर्शन देती हैं।
तीनों देवियों के त्रिकोण का दर्शन व परिक्रमा का विशेष महात्म्यपुराणों में किया गया है। देश के कोने-कोने से आने वाले भक्त मातारानी के दर पर मत्था टेकते हैं। साथ ही तीनो देवियों से बने त्रिकोण परिक्रमा भी करते हैं।
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नवरात्र में काली खोह और अष्टभुजा के रास्ते त्रिकोण परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिए बस सेवा शुरू की गई है। मात्र 60 रुपये में इस बस से यात्रियों को 12 स्थानों पर घुमाया जाएगा। श्रद्धालु इस बस से त्रिकोण परिक्रमा के अलावा नाग कुंड, भैरव मंदिर, बावन वीर मंदिर, काली खोह, सीताकुंड, मोतिया तालाब, गेरूआ तालाब, अष्टभुजा मंदिर, शिवपुर स्थित रामेश्वर मंदिर एवं रामगया घाट स्थित मां तारा देवी मंदिर जाकर दर्शन कर सकेंगे।
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इसके अलावा नवरात्र मेले के दौरान माता के दर्शन का समय भी तय किया गया है। 24 घंटे में होने वाली चारों आरतियों के दौरान मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। मंगला आरती के लिए भोर में चार से पांच बजे तक, राजसी आरती के लिए दोपहर 12 से एक बजे तक, छोटी आरती के लिए शाम सात से आठ बजे और बड़ी आरती के लिए रात साढ़े नौ से साढ़े दस बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे।
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बता दें कि देश के तमाम स्थानों पर शक्तिपीठ और विंधयांचल को सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है। यहां माता अपने तीनों रूप महालक्ष्मी, महाकाली व महासरस्वती के रूपों में तीन कोण पर विराजमान हो कर भक्तों को दर्शन देती हैं।
तीनों देवियों के त्रिकोण का दर्शन व परिक्रमा का विशेष महात्म्यपुराणों में किया गया है। देश के कोने-कोने से आने वाले भक्त मातारानी के दर पर मत्था टेकते हैं। साथ ही तीनो देवियों से बने त्रिकोण परिक्रमा भी करते हैं।
रविवार को उदया तिथि से शुरू होगा नवरात्र
navratri 2018
- फोटो : amar ujala
वासंतिक नवरात्र शनिवार की शाम 6:32 से लग रहा है लेकिन सनातन धर्म के अनुसार उदया तिथि में तिथि का मान किया जाता है। ऐसे में चैत्र माह की प्रथम प्रतिपदा 18 मार्च रविवार की उदयातिथि से आरंभ होगा। नवमी तिथि की हानि होने के चलते इस बार नवरात्र आठ दिनों का होगा।
अष्टमी और नवमी दोनों एक ही दिन 25 मार्च को हो रहा है। पहले और अंतिम दिन व्रत रहने वाले प्रथम दिन रविवार व अष्टमी का व्रत भी 25 मार्च को धारण करेंगे। नौ दिनों तक व्रत करने वाले लोग पारण 26 मार्च सोमवार को दशमी तिथि में प्रात: 6:12 के बाद कर सकेंगे।
महानिशा पूजा 24 मार्च शनिवार 9:26 से शुरू होगा। इसमें तांत्रिक सिद्धि प्राप्ति करने के लिए बलि पूजा करते हैं। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रविवार प्रात: नौ बजे से साढ़े दस बजे तक है। यह जानकारी विंध्याचल के पंडित अनुपम महाराज ने दी।
चैत नवरात्र मेले के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गंगा घाटों पर रौशनी की व्यवस्था की गई है। लाइट लगाने का काम देर शाम तक जारी रहा। स्नानार्थी नहाते समय गहरे पानी में न जाएं, इसके लिए घाट पर बैरिकेडिंग की गई है।
रेलवे स्टेशन को भी रंगीन लाइटों से सजाया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी मेला क्षेत्र की तैयारियों में रह गई कमियों को दूर करने में जुटे हुए हैं। सीसीटीवी कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की जाएगी।
गंगा घाटों पर बांस बल्लियों से बैरिकेडिंग की गई है ताकि कोई श्रद्धालु गंगा में नहाते समय डूब नहीं सके। महिलाओं के लिए घाटों पर चेंजिग रूम की व्यवस्था तो की गई है जो संभावित भीड़ के लिए नाकाफी है।
मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर के रंग रोगन और सजावट का कार्य अंतिम चरण में है। मेले की निगरानी के लिए क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं, जिससे अराजक तत्वों की निगरानी की जा सके।
अष्टमी और नवमी दोनों एक ही दिन 25 मार्च को हो रहा है। पहले और अंतिम दिन व्रत रहने वाले प्रथम दिन रविवार व अष्टमी का व्रत भी 25 मार्च को धारण करेंगे। नौ दिनों तक व्रत करने वाले लोग पारण 26 मार्च सोमवार को दशमी तिथि में प्रात: 6:12 के बाद कर सकेंगे।
महानिशा पूजा 24 मार्च शनिवार 9:26 से शुरू होगा। इसमें तांत्रिक सिद्धि प्राप्ति करने के लिए बलि पूजा करते हैं। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रविवार प्रात: नौ बजे से साढ़े दस बजे तक है। यह जानकारी विंध्याचल के पंडित अनुपम महाराज ने दी।
चैत नवरात्र मेले के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गंगा घाटों पर रौशनी की व्यवस्था की गई है। लाइट लगाने का काम देर शाम तक जारी रहा। स्नानार्थी नहाते समय गहरे पानी में न जाएं, इसके लिए घाट पर बैरिकेडिंग की गई है।
रेलवे स्टेशन को भी रंगीन लाइटों से सजाया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी मेला क्षेत्र की तैयारियों में रह गई कमियों को दूर करने में जुटे हुए हैं। सीसीटीवी कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की जाएगी।
गंगा घाटों पर बांस बल्लियों से बैरिकेडिंग की गई है ताकि कोई श्रद्धालु गंगा में नहाते समय डूब नहीं सके। महिलाओं के लिए घाटों पर चेंजिग रूम की व्यवस्था तो की गई है जो संभावित भीड़ के लिए नाकाफी है।
मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर के रंग रोगन और सजावट का कार्य अंतिम चरण में है। मेले की निगरानी के लिए क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं, जिससे अराजक तत्वों की निगरानी की जा सके।
नवरात्र मेला को प्रांतीय मेला बनाने की तैयारी
विन्ध्याचल मां
- फोटो : अमर उजाला
विन्ध्याचल मेले को प्रांतीय मेला घोषित करने की तैयारी लगभग अंतिम चरणों में चल रही है। इसके लिए लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। शासन द्वारा इस पर आपत्ति मांगी गई थी जिसकी मियाद खत्म हो चुकी है।
नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा था तो शासन द्वारा जल्द ही प्रस्ताव को पास कर मेले को प्रांतीय मेला घोषित कर दिया जाएगा। मनोज जायसवाल ने मेला के पूर्व नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से मिल कर नवरात्र मेले को भव्यता प्रदान करने के निलए धन की मांग किया था, जिस पर उन्होंने 25 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था।
पालिका अध्यक्ष ने बताया कि दूरभाष के माध्यम से विशेष सचिव अमित बाजपेयी से वार्ता हुई है तो उन्होंने बताया कि नवरात्र मेले में जो भी खर्च नगर पालिका द्वारा किया जाएगा उसका इस्टीमेट भेजने के बाद 50 लाख रुपया तक खर्च का भुगतान शासन करेगा।
पालिकाध्यक्ष ने जानकारी दी कि इस बार नगर पालिका द्वारा मां के धाम आने वाले भक्तों को आरओ का पानी मुहैया कराया जाएगा । इसके अलावा गंगा घाट पर एक के स्थान दो पुलिया बनाए गए हैं। बताया कि आगे पड़ने वाले नवरात्र मेले में नगर पालिका की ओर से इससे और बेहतर व्यवस्था किया जाएगा।
नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा था तो शासन द्वारा जल्द ही प्रस्ताव को पास कर मेले को प्रांतीय मेला घोषित कर दिया जाएगा। मनोज जायसवाल ने मेला के पूर्व नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से मिल कर नवरात्र मेले को भव्यता प्रदान करने के निलए धन की मांग किया था, जिस पर उन्होंने 25 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था।
पालिका अध्यक्ष ने बताया कि दूरभाष के माध्यम से विशेष सचिव अमित बाजपेयी से वार्ता हुई है तो उन्होंने बताया कि नवरात्र मेले में जो भी खर्च नगर पालिका द्वारा किया जाएगा उसका इस्टीमेट भेजने के बाद 50 लाख रुपया तक खर्च का भुगतान शासन करेगा।
पालिकाध्यक्ष ने जानकारी दी कि इस बार नगर पालिका द्वारा मां के धाम आने वाले भक्तों को आरओ का पानी मुहैया कराया जाएगा । इसके अलावा गंगा घाट पर एक के स्थान दो पुलिया बनाए गए हैं। बताया कि आगे पड़ने वाले नवरात्र मेले में नगर पालिका की ओर से इससे और बेहतर व्यवस्था किया जाएगा।