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Varanasi News: बाबा दरबार में गूंजी वेदों की ऋचाएं व संस्कृत में गीत
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वाराणसी। बाबा विश्वनाथ धाम के त्रयंबकेश्वर सभागार में शनिवार को शुरू हुई सांसद संस्कृत प्रतियोगिता में वेद व शास्त्र श्लोक व ऋचाओं के साथ संस्कृत में भाषण और संगीत की धूम रही। इसमें 250 संस्कृत कॉलेजों के 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। विजेताओं को 23 फरवरी को प्रधानमंत्री सम्मानित करेंगे।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रतियोगिता का उद्घाटन मंदिर के अर्चक श्रीकांत मिश्र और न्यासी सदस्य पं. के वेंकट रमण ने किया। इसके बाद वेद, व्याकरण, ज्योतिष, दर्शन, साहित्य आदि विषयों के अलावा संस्कृत में गीतों की प्रतियोगिता हुई। इस दौरान प्रतिभागियों को गणवेश, पुस्तकें व वाद्ययंत्र दिए गए। रविवार को विजेताओं की सूची की घोषणा की जाएगी।
मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल कहा कि इस प्रतियोगिता का क्रियान्वयन भी धरातल पर होना चाहिए। प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने कहा कि इस तरह के आयोजन से वेद व शास्त्र की परंपरा संरक्षित होगी। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रो. विश्वभूषण मिश्र ने कहा कि संस्कृत में समस्त ज्ञान, विज्ञान निहित है। परिषद के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय कहा कि संस्कृत के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजन हमेशा कराए जाएंगे। प्रो. कृष्णकांत शर्मा, न्यास के सदस्य प्रो. व्रजभूषण ओझा ने भी विचार रखे। स्वागत न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय तथा संचालन डॉ. सिद्धिदात्री भारद्वाज ने किया।
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काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रतियोगिता का उद्घाटन मंदिर के अर्चक श्रीकांत मिश्र और न्यासी सदस्य पं. के वेंकट रमण ने किया। इसके बाद वेद, व्याकरण, ज्योतिष, दर्शन, साहित्य आदि विषयों के अलावा संस्कृत में गीतों की प्रतियोगिता हुई। इस दौरान प्रतिभागियों को गणवेश, पुस्तकें व वाद्ययंत्र दिए गए। रविवार को विजेताओं की सूची की घोषणा की जाएगी।
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मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल कहा कि इस प्रतियोगिता का क्रियान्वयन भी धरातल पर होना चाहिए। प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने कहा कि इस तरह के आयोजन से वेद व शास्त्र की परंपरा संरक्षित होगी। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रो. विश्वभूषण मिश्र ने कहा कि संस्कृत में समस्त ज्ञान, विज्ञान निहित है। परिषद के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय कहा कि संस्कृत के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजन हमेशा कराए जाएंगे। प्रो. कृष्णकांत शर्मा, न्यास के सदस्य प्रो. व्रजभूषण ओझा ने भी विचार रखे। स्वागत न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय तथा संचालन डॉ. सिद्धिदात्री भारद्वाज ने किया।
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