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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Pitru Paksha 2026 Shradh for those who died by weapons or poison on 9th, for ascetics on 7th

पितृपक्ष 2026: हथियार या जहर से मौत होने पर नौ को, संन्यासियों का 7 को, अज्ञातों का 10 अक्तूबर को श्राद्ध

Sat, 26 Sep 2026 10:27 AM IST
Sharukh Khan हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला, वाराणसी
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला, वाराणसी Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 26 Sep 2026 10:27 AM IST
सार

सुसाइड, हथियार या जहर से मरे लोगों का नौ अक्तूबर को श्राद्ध होगा, जबकि संन्यासियों का 7 को, अज्ञातों का 10 अक्तूबर को श्राद्ध होगा। सामान्य मौत पर 7 अक्तूबर को पिंडदान होगा, बीएचयू के ज्योतिषाचार्य ने कहा- शास्त्रीय नियमों को जाने बिना पितृपक्ष पर श्राद्ध कर्म किया तो तर्पण शास्त्रसम्मत नहीं होगा।

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Pitru Paksha 2026 Shradh for those who died by weapons or poison on 9th, for ascetics on 7th
pitru paksha - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार
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किसी भी तिथि पर हुई आत्महत्या, किसी को हथियार या जहर देकर मारा गया हो तो उनका श्राद्ध नौ अक्तूबर को चतुर्दशी पर ही होगा। सामान्य मौत मरने वालों का पिंडदान द्वादशी यानी कि सात अक्तूबर को किया जाएगा। 
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चाहे उसकी मौत किसी भी तिथि या चतुर्दशी पर हुई हो। संन्यासियों का पिंडदान द्वादशी पर सात अक्तूबर और अज्ञात यानी कि जिसकी मौत की तिथि नहीं पता है तो उनका 10 अक्तूबर को अमावस्या पर होगा।
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बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रो. सुभाष पांडेय के मुताबिक मौत किसकी हुई, किस दिन और कैसे हुई, इन सब बातों को आधार बनाकर ही श्राद्धकर्म का दिन तय किया जाता है। इनके शास्त्रीय नियमों को जाने बिना पितृपक्ष पर श्राद्ध कर्म करने से तर्पण तर्पण शास्त्रसम्मत नहीं होगा। इस बार 27 सितंबर से लेकर 10 अक्तूबर तक 14 दिनों का पितृपक्ष होगा।

 
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पांडेय क मुताबिक पितृपक्ष के सभी विधान धर्मशास्त्र ग्रंथ धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु में दिए गए हैं। इन विधानों के अनुसार, माता की मृत्यु किसी भी तिथि पर हुई हो लेकिन उनका श्राद्ध नवमी मातृ नवमी को होगा। यानी कि चार अक्तूबर को और किसी व्यक्ति के पिता की मौत की तिथि न पता हो तो अमावस्या 10 अक्तूबर को उनका श्राद्धकर्म करना होगा। 
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जिनके पिता की मौत पूर्णिमा तिथि को हुई है वे 26 सितंबर को ही पितृश्राद्ध कर्म करेंगे। जिनके पिता की स्वाभाविक मौत चतुर्दशी को हुई है वे द्वाद्वशी तिथि को पिता का श्राद्ध करेंगे।

जीविका पुत्र व्रत वाले अष्टमी को करेंगे श्राद्ध
प्रो. पांडेय ने बताया कि किसी भी मास की जिस तिथि पर मौत हुई हो, श्राद्ध उसी दिन पर होगा। अश्विन मास में कृष्णपक्ष के 15 दिनों में षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन दो अक्तूबर को होगा। प्रतिपदा श्राद्ध उसी का होगा जिसकी महीने के प्रतिपदा पर मौत हुई हो। वहीं, तीन अक्तूबर को जीवित्पुत्रिका व्रत करने वाले अष्टमी पर श्राद्ध करेंगे।
 
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