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वीडीए का खेल, पहले भवन निर्माण को कर रहा सील, फिर दे रहा ढील
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वाराणसी।
केस-1
गौदोलिया इलाके में एक होटल का अवैध निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद वीडीए ने भवन को सील कर दिया। मगर, लॉकडाउन से लेकर अब तक वहां निर्माण कार्य जारी है। सील लगी बिल्डिंग का काफी हिस्सा बना लिया गया। ऐसा नहीं है वीडीए के जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध निर्माण से अनजान हैं, मगर निजी हित मेें कार्रवाई नहीं की जा रही है।
केस-2
नदेसर इलाके में एक व्यावसायिक भवन का निर्माण अवैध तरीके से किया जा रहा है। मगर, विकास प्राधिकरण ने इसको नोटिस तक नहीं दिया है। तीन मंजिला निर्माण तक अधिकारी आंख मूंदे हैं। अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होने से ऐसा करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
बदलते बनारस में भले ही शासन और प्रशासन सुनियोजित विकास के लिए प्रयासरत हो, मगर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अवैध निर्माणों पर कोई लगाम नहीं है। प्राधिकरण के अधिकारियों की अनदेखी ही इन अवैध निर्माणकर्ताओं के दुस्साहस का कारण बनी हुई है। कुछ बड़ी इमारतें तो ऐसी हैं, जिन्हें अवैध और अनियमित पाते हुए प्राधिकरण ने सील लगा दी है। मगर, सील लगे भवनों में धड़ल्ले से निर्माण किया जा रहा है। कभी खुलेआम तो कभी सील लगी बहुमंजिला इमारतों में अंदर चोरी-छिपे अपने निर्माण का आकार देने में जुटे हैं। इसे प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही कहें या मिलीभगत, महीनों या सालों पहले सील किए गए बड़े-बड़े भवनों को सील लगाकर अधिकारी भूल जाते हैं और दोबारा कभी मौके पर जाकर जांच-पड़ताल नहीं करते।
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विकास प्राधिकरण मेें अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी के लिए टीमें बनाई गई हैं। बिना नक्शा स्वीकृत कराए जगह-जगह निर्माण किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आवासीय के साथ ही व्यावसायिक और बडे़ अवैध निर्माण तक पर भी निजी हित सधने के बाद कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति है। पिछले छह महीने में 19 सौ से ज्यादा अवैध निर्माण सील किए गए, मगर, इनमें ज्यादातर निर्माण सील के बावजूद पूरे कर लिए गए।
नियमों का हवाला देकर अवैध निर्माणों को शह
शहर में होने वाले अवैध निर्माणों को विकास प्राधिकरण के अधिकारी शह देते हैं। सील की कार्रवाई के बाद नक्शा दाखिल करने पर ही उसे खोल दिया जाता है। कई मामलों में तो सील के बाद निर्माण पूरा हो गया और शमन मानचित्र दाखिल किया गया। वाराणसी मेें एक लाख से ज्यादा अवैध निर्माण अब तक चिह्नित हैं और शमन नीति के बाद भी नक्शा स्वीकृति के आवेदन नहीं आ रहे हैं। कारण, अवैध निर्माण करने वालों में वीडीए का खौफ नहीं है।
अवैध कालोनियों पर भी रहती है मेहरबानी
शहर के आसपास रोहनिया, रामनगर, लंका, नगवा और शिवपुर में अवैध कालोनियां विकसित की जा रही हैं। आलम यह है कि गांव के खेतों में प्लाट बेचे जा रहे हैं। मगर, वीडीए एकाध कार्रवाई कर रसूखदारों को शह देता है।
अवैध निर्माणों पर लगातार कार्रवाई कराई जा रही है। टीमों की जिम्मेदारी तय की गई है। अब क्रास वेरिफिकेशन के जरिए जांच कराई जाएगी। अवैध निर्माण मिलने पर जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई की जाएगी। - राहुल पांडेय, उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण
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केस-1
गौदोलिया इलाके में एक होटल का अवैध निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद वीडीए ने भवन को सील कर दिया। मगर, लॉकडाउन से लेकर अब तक वहां निर्माण कार्य जारी है। सील लगी बिल्डिंग का काफी हिस्सा बना लिया गया। ऐसा नहीं है वीडीए के जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध निर्माण से अनजान हैं, मगर निजी हित मेें कार्रवाई नहीं की जा रही है।
केस-2
नदेसर इलाके में एक व्यावसायिक भवन का निर्माण अवैध तरीके से किया जा रहा है। मगर, विकास प्राधिकरण ने इसको नोटिस तक नहीं दिया है। तीन मंजिला निर्माण तक अधिकारी आंख मूंदे हैं। अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होने से ऐसा करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
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बदलते बनारस में भले ही शासन और प्रशासन सुनियोजित विकास के लिए प्रयासरत हो, मगर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अवैध निर्माणों पर कोई लगाम नहीं है। प्राधिकरण के अधिकारियों की अनदेखी ही इन अवैध निर्माणकर्ताओं के दुस्साहस का कारण बनी हुई है। कुछ बड़ी इमारतें तो ऐसी हैं, जिन्हें अवैध और अनियमित पाते हुए प्राधिकरण ने सील लगा दी है। मगर, सील लगे भवनों में धड़ल्ले से निर्माण किया जा रहा है। कभी खुलेआम तो कभी सील लगी बहुमंजिला इमारतों में अंदर चोरी-छिपे अपने निर्माण का आकार देने में जुटे हैं। इसे प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही कहें या मिलीभगत, महीनों या सालों पहले सील किए गए बड़े-बड़े भवनों को सील लगाकर अधिकारी भूल जाते हैं और दोबारा कभी मौके पर जाकर जांच-पड़ताल नहीं करते।
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विकास प्राधिकरण मेें अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी के लिए टीमें बनाई गई हैं। बिना नक्शा स्वीकृत कराए जगह-जगह निर्माण किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आवासीय के साथ ही व्यावसायिक और बडे़ अवैध निर्माण तक पर भी निजी हित सधने के बाद कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति है। पिछले छह महीने में 19 सौ से ज्यादा अवैध निर्माण सील किए गए, मगर, इनमें ज्यादातर निर्माण सील के बावजूद पूरे कर लिए गए।
नियमों का हवाला देकर अवैध निर्माणों को शह
शहर में होने वाले अवैध निर्माणों को विकास प्राधिकरण के अधिकारी शह देते हैं। सील की कार्रवाई के बाद नक्शा दाखिल करने पर ही उसे खोल दिया जाता है। कई मामलों में तो सील के बाद निर्माण पूरा हो गया और शमन मानचित्र दाखिल किया गया। वाराणसी मेें एक लाख से ज्यादा अवैध निर्माण अब तक चिह्नित हैं और शमन नीति के बाद भी नक्शा स्वीकृति के आवेदन नहीं आ रहे हैं। कारण, अवैध निर्माण करने वालों में वीडीए का खौफ नहीं है।
अवैध कालोनियों पर भी रहती है मेहरबानी
शहर के आसपास रोहनिया, रामनगर, लंका, नगवा और शिवपुर में अवैध कालोनियां विकसित की जा रही हैं। आलम यह है कि गांव के खेतों में प्लाट बेचे जा रहे हैं। मगर, वीडीए एकाध कार्रवाई कर रसूखदारों को शह देता है।
अवैध निर्माणों पर लगातार कार्रवाई कराई जा रही है। टीमों की जिम्मेदारी तय की गई है। अब क्रास वेरिफिकेशन के जरिए जांच कराई जाएगी। अवैध निर्माण मिलने पर जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई की जाएगी। - राहुल पांडेय, उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण