{"_id":"57f6b8014f1c1b656d27049c","slug":"vcs-creates-history-by-great","type":"story","status":"publish","title_hn":"महान कुलपतियों ने रचा इतिहास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महान कुलपतियों ने रचा इतिहास
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 07 Oct 2016 02:15 AM IST
विज्ञापन
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इतिहास का सृजन विकास का सफर है और इसके लिए आदर्श नेतृत्व पहली शर्त है। अपने गौरवशाली अतीत के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय को ऐसे ही कई महान व्यक्तित्व के पुरोधा मिले, जिन्होंने कुलपति के पद की गरिमा को बढ़ाया। सर सुंदरलाल, सर्वपल्ली राधाकृष्णन से लेकर खुद महामना पंडित मदन मोहन मालवीय यहां के कुलपति रहे। इस दौरान इनके कुशल निर्देशन, मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय की शिक्षा बेल खूब फली बढ़ी। सौ साल के इतिहास में विश्वविद्यालय में अब तक 26 व्यक्तियों को कुलपति बनने का सौभाग्य प्राप्त हो चुका है।
विश्वविद्यालय की स्थापना के दौरान महामना को कई करीबियों का साथ मिला। महामना के साथ उनके मानस पटल पर भी बीएचयू का सपना उसी तरह पलता रहा। बात चाहे जमीन के चयन की रही हो या फिर विश्वविद्यालय के लिए दान की। इनमें से एक थे राय बहादुर सर सुंदरलाल, जिनके नाम से बीएचयू में सर सुंदरलाल अस्पताल है। महामना ने इन्हें ही बीएचयू के संस्थापक कुलपति का मान मिला। उनके कुशल नेतृत्व में बीएचयू का शैशव काल पूरे प्रखरता से बीता और सदी भर के सफर में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर महामना सबसे अधिक करीब 20 साल तक रहे। हालांकि उन्होंने कुलपति का पद बहुत ही विवश होेकर ग्रहण किया था। सर सुंदरलाल के निधन के बाद महामना के कहने पर सर पीएस शिवास्वामी ने कुलपति तो बन गए लेकिन विश्वविद्यालय को ज्यादा समय न देने की वजह से उन्होेंने साल भर में इस्तीफा दे दिया। महामना दूसरे कुलपति की तलाश करते लेकिन बीएचयू कोर्ट के सदस्यों के दबाव के चलते उन्हें कुलपति का पदभार लेना पड़ा। व्यवहारिक शिक्षा से लेकर कृषि शिक्षा के उत्थान का सफर महामना के कुलपति के कार्यकाल में ही हुआ। वह बीएचयू के तीसरे कुलपति थे।
विज्ञापन
अस्वस्थ रहने पर महामना के उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी। ऐसे में उन्हें सबसे उपयुक्त डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन लगे। देश के राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन यहां करीब दस साल तक कुलपति रहे। उनके नेतृत्व काल में बीएचयू का इतिहास स्वर्णिम युग कहा जाता है। यह वह समय था जब आजादी की लड़ाई चल रही थी लेकिन डॉ. राधाकृष्णन ने बीएचयू का शैक्षणिक माहौल कभी बाधित नहीं होने दिया।
अब तक के कुलपिततिः राय बहादुर सर सुंदरलाल, पीएस सिवास्मामी अय्यर, पंडित मदन मोहन मालवीय, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, अमरनाथ झा, पंडित गोविंद मालवीय, आचार्य नरेंद्र देव, सीपी रामास्वामी अय्यर, वीएस झा, एनएच भगवती, केंद्रीय शिक्षा मंत्रा रहे त्रिगुण सेन, एसी जोशी, कालूलाल श्रीमाली, एमएल धर, हरी नारायण, इकबाल नारायण, आरपी रस्तोगी, सीएस झा, डीएन मिश्रा, हरि गौतम, वाईसी सिम्हाद्री, रामाचंद्र राव, प्रो. पंजाब सिंह, प्रो. डीपी सिंह, डॉ. लालजी सिंह।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय की स्थापना के दौरान महामना को कई करीबियों का साथ मिला। महामना के साथ उनके मानस पटल पर भी बीएचयू का सपना उसी तरह पलता रहा। बात चाहे जमीन के चयन की रही हो या फिर विश्वविद्यालय के लिए दान की। इनमें से एक थे राय बहादुर सर सुंदरलाल, जिनके नाम से बीएचयू में सर सुंदरलाल अस्पताल है। महामना ने इन्हें ही बीएचयू के संस्थापक कुलपति का मान मिला। उनके कुशल नेतृत्व में बीएचयू का शैशव काल पूरे प्रखरता से बीता और सदी भर के सफर में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर महामना सबसे अधिक करीब 20 साल तक रहे। हालांकि उन्होंने कुलपति का पद बहुत ही विवश होेकर ग्रहण किया था। सर सुंदरलाल के निधन के बाद महामना के कहने पर सर पीएस शिवास्वामी ने कुलपति तो बन गए लेकिन विश्वविद्यालय को ज्यादा समय न देने की वजह से उन्होेंने साल भर में इस्तीफा दे दिया। महामना दूसरे कुलपति की तलाश करते लेकिन बीएचयू कोर्ट के सदस्यों के दबाव के चलते उन्हें कुलपति का पदभार लेना पड़ा। व्यवहारिक शिक्षा से लेकर कृषि शिक्षा के उत्थान का सफर महामना के कुलपति के कार्यकाल में ही हुआ। वह बीएचयू के तीसरे कुलपति थे।
विज्ञापन
अस्वस्थ रहने पर महामना के उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी। ऐसे में उन्हें सबसे उपयुक्त डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन लगे। देश के राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन यहां करीब दस साल तक कुलपति रहे। उनके नेतृत्व काल में बीएचयू का इतिहास स्वर्णिम युग कहा जाता है। यह वह समय था जब आजादी की लड़ाई चल रही थी लेकिन डॉ. राधाकृष्णन ने बीएचयू का शैक्षणिक माहौल कभी बाधित नहीं होने दिया।
अब तक के कुलपिततिः राय बहादुर सर सुंदरलाल, पीएस सिवास्मामी अय्यर, पंडित मदन मोहन मालवीय, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, अमरनाथ झा, पंडित गोविंद मालवीय, आचार्य नरेंद्र देव, सीपी रामास्वामी अय्यर, वीएस झा, एनएच भगवती, केंद्रीय शिक्षा मंत्रा रहे त्रिगुण सेन, एसी जोशी, कालूलाल श्रीमाली, एमएल धर, हरी नारायण, इकबाल नारायण, आरपी रस्तोगी, सीएस झा, डीएन मिश्रा, हरि गौतम, वाईसी सिम्हाद्री, रामाचंद्र राव, प्रो. पंजाब सिंह, प्रो. डीपी सिंह, डॉ. लालजी सिंह।