वासंतिक नवरात्र 2024: काशी इकलौता शहर जहां दुर्गा के साथ विराजती हैं गौरी, भक्तों पर बरसाती हैं कृपा
काशी में नौ दुर्गा के साथ नौ गौरी पूजी जाती हैं। इकलौता शहर काशी है जहां गलियों में पार्वती स्वरूपा नौ गौरी नौ जगहों पर विराजमान होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। भक्त नौ दिन तक मां गौरी की आराधना करेंगे।
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वासंतिक नवरात्र में शिव की नगरी काशी में नौ दुर्गा के साथ ही नौ गौरी भी पूजी जाती हैं। चैत्र नवरात्र में काशी में नौ गौरी की पूजा का विधान है। मां पार्वती स्वरूपा नौ गौरी काशी की गलियों में नौ जगहों पर विराजमान होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। प्रतिपदा से लेकर नवमी तक भक्त माता के नौ स्वरूपों का दर्शन पूजन कर उनकी कृपा की कामना करेंगे। काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि वासंतिक नवरात्र के दौरान काशी में नौ गौरी की पूजा भी होती है। काशी में ही मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ नौ गौरी के विग्रह भी विराजमान हैं। इसमें एक विग्रह ज्ञानवापी परिसर में भी स्थित है। माता की पूजा, नाम जप के साथ ही दर्शन का भी महात्म्य है।
प्रथम मुख निर्मालिका गौरी: पहले दिन गायघाट स्थित हनुमान मंदिर में विराजमान प्रथम गौरी मुख निर्मालिका गौरी के दर्शन पूजन होते हैं। इसके अलावा मां दुर्गा के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री का पूजन-अर्चन भी होता है। मां शैलपुत्री का मंदिर अलईपुर इलाके में स्थित है।
द्वितीय ज्येष्ठा गौरी: द्वितीया पर कर्णघंटा के सप्तसागर क्षेत्र में विराजमान मां ज्येष्ठा गौरी के दर्शन पूजन के लिए भक्त उमड़ते हैं। नौ दुर्गा की आराधना में दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का दर्शन-पूजन होता है। मां का विग्रह ब्रह्माघाट इलाके में है।
तृतीय सौभाग्य गौरी: तीसरे दिन भक्तों को ज्ञानवापी क्षेत्र स्थित सत्यनारायण मंदिर के अंदर सौभाग्य गौरी के दर्शन पूजन करने की मान्यता है। नव दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा का दर्शन होगा और इनका मंदिर चौक क्षेत्र में है।
चतुर्थ शृंगार गौरी: चौथे दिन ज्ञानवापी परिसर में विराजमान शृंगार गौरी का दर्शन पूजन होगा। इस दिन ज्ञानवापी में भक्तों की लंबी कतार लगती है। नौ दुर्गा के स्वरूप में कूष्मांडा देवी की आराधना होगी। मां दुर्गा दुर्गाकुंड मंदिर में यंत्र के स्वरूप में विराजमान हैं।
षष्ठं ललिता गौरी: छठवें दिन मां गौरी के छठवें रूप में विराजमान मां ललिता के दर्शन-पूजन का महत्व है। मां भगवती का विग्रह ललिता घाट क्षेत्र में है। नवदुर्गा के दर्शन-पूजन के क्रम में छठवें दिन मां कात्यायनी देवी का दर्शन-पूजन होगा। देवी का विग्रह संकठा गली में आत्म विशेश्वर मंदिर में है।
सप्तम भवानी गौरी: सातवें दिन सप्तम भवानी गौरी के दर्शन-पूजन के लिए भक्त उमडेंगे। देवी के छठवें स्वरूप का विग्रह विश्वनाथ गली में श्रीराम मंदिर में विराजमान है। मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां कालरात्रि देवी का पूजन अर्चन होगा। कालरात्रि देवी का मंदिर कालिका गली में स्थित है।
अष्टम मंगला गौरी: आठवें दिन माता के गौरी स्वरूप में मंगला गौरी के पूजन-अर्चन का विधान है। मंगला गौरी का मंदिर पंचगंगा घाट इलाके में है। नौ दुर्गा के उपासक महागौरी का दर्शन पूजन करेंगे। महागौरी काशी में मां अन्नपूर्णा के रूप में विराजमान हैं। इनका मंदिर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप है।
नवम महालक्ष्मी गौरी: अंतिम दिन भगवती के गौरी स्वरूप में महालक्ष्मी गौरी के दर्शन पूजन होता है। मां का मंदिर लक्सा क्षेत्र में लक्ष्मीकुंड पर स्थित है। नौ दुर्गा के स्वरूप में शक्ति की अधिष्ठात्री देवी सिद्धिदात्री देवी का दर्शन-पूजन होगा। इनका मंदिर कालभैरव मंदिर से पहले गोलघर इलाके में है।