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वाराणसी: ओलंपिक दूर की कौड़ी, दंगल तक ही सीमित रह जाते हैं काशी के पहलवान  

Thu, 22 Jul 2021 03:53 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 22 Jul 2021 03:53 PM IST
सार

यूपी के दस खिलाड़ियों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। इनमें एक भी कुश्ती का नहीं है। खिलाड़ियों को सुविधाएं नहीं मिलने से खेल में दिलचस्पी घट रही है। इससे पहले काशी के तीन पहलवान ओलंपिक में दमखम दिखा चुके हैं।

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varanasi wrestlers could not play out side of city Olympics far away from them
ओलंपिक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

खेलों का महाकुंभ टोक्यो ओलंपिक 23 जुलाई से प्रारंभ होगा। प्रदेश से कई खेलों के खिलाड़ी ओलंपिक तक पहुंचे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें एक भी कुश्ती का नहीं है। इसके पीछे की वजह संसाधनों और सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में काशी के वर्तमान पहलवान दंगल तक की ही सीमित हैं। इनमें से कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं। कई ओलंपिक का टिकट भी कटा चुके हैं। वहीं, कुछ कुश्ती करते हैं वह सिर्फ दंगल तक की सीमित हैं।

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ओलंपियन सुशील कुमार को मुल्तानी दाव का गुर सीखाने वाले बरेका कोच रविंद्र मिश्रा ने बताया कि काशी के पहले ओलंपियन पहलवान अनंत राम भार्गव ने 1948 के लंदन ओलंपिक में प्रतिभाग कर मान बढ़ाया था। 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में लक्ष्मीकांत पांडेय और महाराष्ट्र से 2012 के लंदन ओलंपिक में चोलापुर के रहने वाले नरसिंह यादव ने प्रतिभाग किया।
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दिवंगत ओलंपियन लक्ष्मीकांत पांडेय के पुत्र कपिल नारायण पांडेय ने कहा दुर्भाग्य की बात है कि टोक्यो ओलंपिक में यूपी का एक भी पहलवान नहीं है। पिता मेलबर्न ओलंपिक में गद्दे पर कुश्ती का अभ्यास नहीं होने पर पदक नहीं जीत पाए। ऐसा सुविधाओं के अभाव में हुआ। तब से अब तक कोई बदलाव नहीं आया।

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कोच, डाइट मिले तो बने बात
खिलाड़ियों का कहना है कि ओलंपिक स्तर के आधुनिक गद्दे, कुशल कोच, खानपान और हॉस्टल की सुविधा मिले तो मेडल का सफर आसान हो सकता है। लेकिन सुविधाएं नहीं मिलने पर बनारस में कुश्ती को लेकर न तो खिलाड़ियों में उत्साह है न उनके परिजनों में और न ही खेल विभाग को कोई दिलचस्पी है। जिसकी वजह से टोक्यो ओलंपिक में एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, निशानेबाजी और हॉकी में पूरे यूपी से 10 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया, लेकिन इसमें कुश्ती का कोई भी नहीं है।

पहलवान पूजा यादव ने बताया कि पहलवानों को सिर्फ जिले की खेल सुविधा मिलती है वह नाकाफी है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण और खुराक मिले तो काशी के पहलवान हर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सकते हैं।

पहवान विक्की ने बताया कि हरियाणा और पंजाब की तरह अगर यूपी के पहलवानों को भी खेल के साथ नौकरी, प्रोत्साहन और सहयोग मिले तो प्रति वर्ष राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार होंगे।

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