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विश्वविद्यालयों में सुरक्षा मानकों के साथ शुरू हुआ काम
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वाराणसी। लॉकडाउन के कारण लोगों की दिनचर्या और काम का तरीका पूरी तरह से बदल चुका है। शहर के विश्वविद्यालयों में भी अब कर्मचारी और अधिकारी दो मीटर की दूरी का पालन करते हुए काम कर रहे हैं। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्य तो आरंभ हो चुके हैं लेकिन शैक्षणिक कार्य पूरी तरह से ठप चल रहे हैं। ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन शिक्षकों द्वारा घर से ही किया जा रहा है।
काशी विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने बताया कि 28 अप्रैल से प्रशासनिक भवन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काम शुरू करा दिया गया है। इसमें कैंपस के अंदर रहने वाले अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित हो रहे हैं। काम के दौरान दो मीटर की दूरी बनाकर कार्य किया जा रहा है। सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने के साथ ही मास्क की अनिवार्यता भी लागू है। लॉकडाउन की अवधि में बाहर से शिक्षक, छात्र तथा अन्य किसी की परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ही शासन के निर्देशानुसार निर्णय लिया जाएगा।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के जनंसपर्क अधिकारी शशींद्र मिश्र ने बताया कि कुलपति कार्यालय समेत नौ अनुभागों को 10 मई से खोल दिया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को ही परिसर में आने की अनुमति दी गई है। लॉकडाउन की समाप्ति के बाद ही शैक्षणिक कार्यों पर निर्णय होगा।
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लॉकडाउन के बाद विश्वविद्यालय के सभी संकायों, विभागों और छात्रावासों का सैनिटाइज कराने के साथ ही छात्रों को हॉस्टल आवंटित करने से पहले उनका कोविड टेस्ट कराया जाएगा। कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने बताया कि छात्रो की पूल टेस्टिंग, स्क्रीनिंग के साथ ही कक्षाओं में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करने की व्यवस्था की जा रही है। कोर्स समाप्त करने, परीक्षा संचालित करने और परिणाम घोषित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षक सेलेक्टिव टीचिंग कर सकते हैं जिसके अंतर्गत किसी कोर्स के जिन प्रसंगों पर पठन-पाठन ऑनलाइन मोड से पर्याप्त रूप में हुए हैं, उनपर कम समय देते हुए बचे हुए कोर्स को पूरा करने पर जोर दिया जा सकता है। छात्रों के स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सर सुंदरलाल चिकित्सालय के चिकित्सकों की एक टीम बनाई जाएगी जो विद्यार्थियों की सेहत पर नजर रखेगी। छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मास्क पहनाना अनिवार्य होगा।
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काशी विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने बताया कि 28 अप्रैल से प्रशासनिक भवन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काम शुरू करा दिया गया है। इसमें कैंपस के अंदर रहने वाले अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित हो रहे हैं। काम के दौरान दो मीटर की दूरी बनाकर कार्य किया जा रहा है। सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने के साथ ही मास्क की अनिवार्यता भी लागू है। लॉकडाउन की अवधि में बाहर से शिक्षक, छात्र तथा अन्य किसी की परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ही शासन के निर्देशानुसार निर्णय लिया जाएगा।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के जनंसपर्क अधिकारी शशींद्र मिश्र ने बताया कि कुलपति कार्यालय समेत नौ अनुभागों को 10 मई से खोल दिया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को ही परिसर में आने की अनुमति दी गई है। लॉकडाउन की समाप्ति के बाद ही शैक्षणिक कार्यों पर निर्णय होगा।
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लॉकडाउन के बाद विश्वविद्यालय के सभी संकायों, विभागों और छात्रावासों का सैनिटाइज कराने के साथ ही छात्रों को हॉस्टल आवंटित करने से पहले उनका कोविड टेस्ट कराया जाएगा। कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने बताया कि छात्रो की पूल टेस्टिंग, स्क्रीनिंग के साथ ही कक्षाओं में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करने की व्यवस्था की जा रही है। कोर्स समाप्त करने, परीक्षा संचालित करने और परिणाम घोषित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षक सेलेक्टिव टीचिंग कर सकते हैं जिसके अंतर्गत किसी कोर्स के जिन प्रसंगों पर पठन-पाठन ऑनलाइन मोड से पर्याप्त रूप में हुए हैं, उनपर कम समय देते हुए बचे हुए कोर्स को पूरा करने पर जोर दिया जा सकता है। छात्रों के स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सर सुंदरलाल चिकित्सालय के चिकित्सकों की एक टीम बनाई जाएगी जो विद्यार्थियों की सेहत पर नजर रखेगी। छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मास्क पहनाना अनिवार्य होगा।