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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Varanasi: The coffins of 72 martyrs of Karbala are stunned.

वाराणसी: कर्बला के 72 शहीदों के ताबूत देख बिलख पड़ते हैं अजादार

Thu, 03 Sep 2020 05:44 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 03 Sep 2020 05:44 PM IST
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वाराणसी में सदर इमामबाड़ा सरैया में हर साल उठाए जाने वाले कर्बला के 72 शहीदों के ताबूतों को देख कौन अजादार होगा जो सिसक न पड़ता हो। अजादार ही क्या? गमे हुसैन में शामिल हर शख्स की आंखे अश्कबार न हों ऐसा नहीं हो सकता। ‘हाय हुसैन’-‘हाय हुसैन’ की दर्दभरी सदाएं जब गूंजती हैं तो यूं लगता है कि इमामबाड़े में गमों का सैलाब उमड़ पड़ा हो। 

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25 हजार का मजमा इस गमगीन माहौल में शामिल होकर कर्बला के 72 शहीदों को खिराजे अकीदत पेश करता है। हालांकि वाराणसी के अलावा पास के जिलों जौनपुर और गाजीपुर में भी 72 शहीदों के ताबूत उठाए जाते हैं।
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आज से पांच साल पहले चौहट्टा लाल खां की अंजुमन आबीदिया ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। मकसद था कि कर्बला में इमाम हुसैन, उनके खानदान समेत 72 साथियों की शहादत से अजादारों को रूबरू कराना। कार्यक्रम के दौरान इमामबाड़े में 72 ताबूत सजा कर रखे जाते हैं और एक उलेमा एक-एक ताबूत का परिचय कराते हैं।

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इसके बाद तो फिर इमामबाड़ा सिसकियों और ‘हाय हुसैन’ की दर्द भरी सदाओं से गूंजने लगता है। वहीं दूसरी तरफ बिलखते हुए अजादार नौहा और मातम से गमे हुसैन को और ऊंचाइयां देने लगते हैं। हालांकि ताबूत तो अलग-अलग कई स्थानों पर उठाए जाते हैं। लेकिन एक ही स्थान पर इतने ताबूत की जियारत नहीं कराई जाती।

अंजुमन आबीदिया के साहबे बयाज (नौहा पढ़ने की शुरुआत करने वाला) शामिल रिजवी बताते हैं कि वाराणसी की कई अंजुमनें भी इसमें सहयोग करती हैं। वाराणसी में यह कार्यक्रम 10वीं मुहर्रम के  बाद पड़ने वाले रविवार को किया जाता है। जबकि पूर्वांचल में जौनपुर में यह सफर माह की 17 तारीख को और गाजीपुर में सफर माह का चांद दिखने के बाद पहले रविवार को आयोजित होता है।

इजाजत मिली तो सांकेतिक होगा कार्यक्रम
शामिल रिजवी बताते हैं कि कोरोना के चलते कार्यक्रम इस बार नहीं होने के पूरे आसार हैं। अगर शासन प्रशासन की गाइड लाइन में इजाजत मिलती है तो कार्यक्रम सदर इमामबाड़ा सरैया में सांकेतिक रूप में कराया जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन होगा और सैनिटाइजेशन किया जाएगा। संस्था से जुड़े लोग और मोमेनीन व्यवस्था संभालेंगे।

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