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वाराणसी का पहला पूर्व माध्यमिक स्कूल जहां लगाना पड़ा नो एडमिशन का बोर्ड, जानिए और भी खासियत 

Mon, 14 Sep 2020 01:46 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Mon, 14 Sep 2020 01:46 AM IST
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Varanasi's first pre-secondary school where no board of admission was to be set up
पूर्व माध्यमिक विद्यालय ठठरा - फोटो : अमर उजाला

यूपी में जहां परिषदीय स्कूल बच्चों के लिए तरस रहे हैं वहीं सेवापुरी ब्लॉक का पूर्व माध्यमिक विद्यालय ठठरा जिले का पहला ऐसा पूर्व माध्यमिक विद्यालय है, जहां हाउसफुल का बोर्ड लग गया है। विभिन्न सुख सुविधाओं से लैस इस विद्यालय को आधुनिक रूप देने में शिक्षकों ने अपनी सैलरी तक दान कर दी है। स्मार्ट क्लासरूम,  हरा भरा परिसर, टाइल्स लगे कमरे, सीसीटीवी कैमरा, सीसी- ब्रिक बिछा परिसर, इन्वर्टर, आरओ सिस्टम, प्रोजेक्टर आदि अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से विद्यालय लैस है। 

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हिंदी माध्यम के इस स्कूल में 299 लड़के व 288 छात्राओं के साथ कुल 581 बच्चे नामांकित हैं। वही कोरोना काल में सीबीएसई स्कूलों के बच्चों ने भी इस विद्यालय में प्रवेश लिया है। जिसके बाद से विद्यालय में नो एडमिशन का बोर्ड लगाना पड़ा है। विद्यालय के कायाकल्प को देखकर महानिदेशक ने इस विद्यालय के शिक्षकों के मेहनत की सराहना भी की है।

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डाइनिंग टेबल पर मिड डे मील 

विद्यालय में सभी कक्षाएं प्रोजेक्टर युक्त हैं और उसमें सीसीटीवी कैमरा लगा है। बच्चों को मिड-डे-मील के लिए सीमेंटेड डाइनिंग टेबल तथा पीने के पानी के लिए आरो व वाटर कूलर की व्यवस्था की गई है। सभी जगह रनिंग वाटर की व्यवस्था पार्क, झूला से सुसज्जित इस विद्यालय में इनवर्टर की सुविधा के साथ बालक बालिकाओं के लिए मॉडल शौचालय बने हैं। 

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Varanasi's first pre-secondary school where no board of admission was to be set up
पूर्व माध्यमिक विद्यालय ठठरा के शिक्षक व अन्य स्टॉफ - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रीय आविष्कार पुरस्कार में चयनित हुए छात्र 

शिक्षकों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बदौलत ही विद्यालय से प्रतिवर्ष 10 से 15 बच्चे राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित परीक्षा में उत्तीर्ण हो चुके हैं। वहीं राष्ट्रीय आविष्कार पुरस्कार के अंतर्गत स्कूल के बच्चे एक्सपोजर विजिट पर प्रयागराज व पटना भी जा चुके हैं।  विद्यालय को सरकार की ओर से स्टूडेंट पुलिस कैडेट कार्यक्रम के लिए भी चयनित किया गया है। 

शिक्षकों ने अपनी सैलरी से संवारा स्कूल  

वर्तमान में विद्यालय की रूपरेखा को अस्तित्व में लाने के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने अपनी सैलरी से 2 कक्षाओं में 65-70 हजार की लागत से टाइल्स के साथ शौचालय का पूरा निर्माण करवाया। वही बच्चों को रोचक शिक्षा देने व  पढ़ाई से जोड़ने के लिए 35000 की लागत से 'बाला पेंटिंग' बनवाई गई है। जिसके लिए विद्यालय के सभी शिक्षकों ने अपनी सैलरी दान की है। 

गांव की साथ सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार 

स्कूल में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने गांव में जाकर लोगों को पोस्टर, बैनर और पंपलेट के जरिए जागरूक करने के साथ सोशल मीडिया पर विद्यालय की विशेषताएं बताई। इसके तहत विद्यालय की फोटो और वीडियो अपलोड किया गया। 

Varanasi's first pre-secondary school where no board of admission was to be set up
पूर्व माध्यमिक विद्यालय ठठरा - फोटो : अमर उजाला

गणित लर्निंग मटेरियल की गणित 

विद्यालय के शिक्षक टीचिंग लर्निंग मैटेरियल के साथ दीक्षा व ऑडियो वीडियो के जरिये बच्चों को पढ़ा रहे हैं।  विद्यालय में इसका सकारात्मक असर भी दिख रहा है।  किताबी ज्ञान के साथ बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। 

कब हुई शुरुआत 

विद्यालय में बदलाव की शुरुआत साल 2009 में प्रधानाध्यापक चंद्रबली पटेल के बतौर सहायक अध्यापक कार्यभार संभालने के बाद ही शुरू हो गई थी। लेकिन साल 2017 में जब चंद्रबाली ने पूर्ण रूप से विद्यालय का कार्यभार संभाला तो उन्होंने टीम वर्क की भावना से शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यालय का स्वरूप बदलना शुरू किया।

इसके लिए उन्होंने खुद के साथ शिक्षकों ने अपनी सैलरी दान की। वहीं गांव के प्रधान प्रतिनिधि व पूर्व ग्राम प्रधान सियाराम केशरी की मदद से भी विद्यालय का कायाकल्प करने में मदद मिली। वर्तमान में विद्यालय में 17 सहायक अध्यापक, 3 अनुदेशक व एक परिचारक कार्यरत हैं।

विद्यालय के कायाकल्प में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक संग ग्राम प्रधान का सहयोग सराहनीय है।  सरकार की मंशा के अनुरूप सरकारी स्कूल के शिक्षक अब नए कलेवर में बच्चों को शिक्षा देने में जुटे है। वर्तमान में विद्यालय में सीटों के सापेक्ष एडमिशन पूरे हो गए हैं। 
राकेश सिंह, बीएसए

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