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खास खबरः अपने ही अतीत के पन्नों को सहेज नहीं पा रही वाराणसी पुलिस 

Tue, 24 Apr 2018 05:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 24 Apr 2018 05:09 PM IST
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Varanasi police did not save own records
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वाराणसी जिले की पुलिस खुद से जुड़े अतीत के पन्नों को सहेज कर नहीं रख पा रही है। नतीजतन, दशकों पुराने थानों में अगर कोई शोधार्थी, छात्र या फिर आमजन उत्सुकतावश ही पता लगाने जाए कि पहला मुकदमा कब दर्ज हुआ था या फिर थाने की स्थापना कब हुई थी तो थानेदार से लेकर सारे पुलिसकर्मी बगलें झांकने लगते हैं।
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यही हाल पुलिस आफिस का भी है। नष्ट होने के कगार पर पहुंच चुके इन ऐतिहासिक कागजातों को संरक्षित करने के लिए भी कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
जिले में पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1883 में रोहनिया थाने की स्थापना की गई थी।

वर्ष 1885 में कैंट और फूलपुर थाने की स्थापना हुई थी और इसके बाद 1901 में कोतवाली, 1902 में चेतगंज और 1904 में चौक थाने की स्थापना हुई थी। 1939 में मिर्जामुराद थाने की स्थापना हुई और इसी दौरान रामनगर थाना स्थापित हुआ। इसके बाद देश आजाद हुआ तो आवश्यकतानुसार थानों की संख्या बढ़ती गई।
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मगर, इन थानों में अब कागजात इस स्थिति में नहीं बचे हैं कि कोई थानाध्यक्ष यह बता सके कि उनके यहां पहला मुकदमा कब दर्ज हुआ था और किससे संबंधित था।

कैंट थाने के पुलिसकर्मियों ने वर्ष 1908 का रजिस्टर नंबर आठ खोज कर निकाला तो पता लगा कि एक अगस्त को सुअरबड़वा इलाका पांडेयपुर निवासी मन्नान ने घर से सामान चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। कैंट थाने के पुलिसकर्मियों के अनुसार इससे ज्यादा पुराना विवरण फिलहाल मौजूद नहीं है। 
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25 में से 19 थानों के भवन जर्जर

Varanasi police did not save own records
पुलिस
देश में पुलिस प्रणाली की स्थापना 1861 के पुलिस अधिनियम के अनुसार हुई थी। इसके बाद 1862 में भारतीय दंड संहिता को लागू कर थानों की स्थापना करने का काम शुरू हुआ। मौजूद समय में जिले में 25 थाने हैं और इनमें से 19 के भवन सालों से जर्जर हैं।

इनके लिए इन दिनों पीडब्ल्यूडी की टीम से सर्वे कराकर प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। इन जर्जर थानों का जीर्णोद्धार कब होगा इस संबंध में किसी को ठोस जानकारी नहीं है। जिले की तेजी से बढ़ी जनसंख्या के हिसाब से थानों की संख्या पर्याप्त नहीं है।

लंका की चितईपुर, रोहनिया की मातलदेई, भेलूपुर की बजरडीहा, सिगरा की कैंट रोडवेज और कैंट की पांडेयपुर पुलिस चौकी को एक अरसे से थाना बनाने की कवायद चल रही है।

एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2002 तक के आपराधिक ब्यौरे को सीसीटीएनएस के माध्यम से सुरक्षित किया जा रहा है। उससे पहले के भी विचाराधीन मामले हमारे पास सुरक्षित हैं। प्रयास होगा कि ऐसी कार्ययोजना बने कि पुराने दस्तावेज भी सुरक्षित किए जा सकें।
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