आरएस यादव के इशारे पर चुने जाते थे खिलाड़ी, खेल संगठनों में थी गहरी पैठ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सड़कों पर अपना सिक्का चलाने वाले एआरटीओ आरएस यादव का एथलेटिक्स सहित अन्य खेल संघों में बड़ा दखल था। संघों के पदाधिकारियों की नियुक्ति से खिलाड़ियों के चयन तक उनकी भूमिका रहा करती थी। खेल संघों से जुड़े सूत्रों की मानें तो यादव ने न सिर्फ खुद महत्वपूर्ण पद संभाला बल्कि उसके इशारे पर उसके करीबियों को भी अहम पदों से नवाजा गया।
खेल संगठनों में एआरटीओ के दखल का कई बार खिलाड़ियों और कोच ने विरोध किया लेकिन उसके रसूख के आगे किसी की नहीं चली। पैसे और रसूख के बल पर ही आरएस यादव ने जिला एथलेटिक संघ का अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश एथलेटिक संघ का उपाध्यक्ष, जिला बैडमिंटन संघ का वरिष्ठ उपाध्यक्ष का पद हासिल किया।
कई दूसरे खेल संगठनों में भी पैठ बनाई। चयन में दखल देने पर 2015-16 में कुछ खिलाड़ियों ने विरोध किया लेकिन यादव के रसूख के आगे उनकी आवाज दब गई। अब आरएस यादव पर कार्रवाई के बाद खेल जगत में भी इसकी आस जगी है कि लंबे समय से संघों में चला आ रहा कॉकस टूटेगा।
पूर्व फुटबाल साई कोच फरमान हैदर ने बताया कि आरएस यादव जैसे कई लोग खेल संगठनों में बैठे हैं। इनका पूरा नेटवर्क तोड़ना होगा।
खेल की तकनीक सीखने नहीं, सैर-सपाटा करने गए थे रियो
वाराणसी। रियो ओलंपिक में आरएस यादव खेल की तकनीक नहीं बल्कि सैर-सपाटा करने गए थे। खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों की मानें तो रियो से लौटने के बाद खिलाड़ियों को खेल से जुड़ी तकनीक आदि बतानी थी लेकिन एक वो दिन था और एक आज का दिन, तकनीक बतानी तो छोड़िए, यहां आने के बाद खिलाड़ियों से मुलाकात तक नहीं की।
बता दें कि रियो ओलंपिक 2016 में शामिल भारतीय डेलिगेट्स में आरएस यादव भी शामिल थे। तब मीडिया में भी यह प्रचारित हुआ था कि डेलिगेट्स वहां खेलों की तकनीकी बारीकियां समझेंगे।
रियो से आरएस यादव ने भी सोशल मीडिया पर वहां की फोटोज तो शेयर की लेकिन लौटने के बाद यहां न तो खिलाड़ियों को नई तकनीक सीखाने का कोई प्रयास हुआ और न ही उन्होंने खिलाड़ियों को वहां के अपने अनुभव ही साझा किए।