वाराणसी: ऑनलाइन चिकित्सा प्रतिपूर्ति से बढ़ी पेंशनरों की परेशानी, ऑफलाइन व्यवस्था बहाल करने की मांग
उत्तर प्रदेश सेवा निवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन ने सोमवार को शास्त्री घाट पर धरना दिया। पेंशनरों ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन भी स्वीकार करने की मांग की। उनका कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था के कारण बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार पेंशनरों को इलाज का खर्च पाने में परेशानी हो रही है।
विस्तार
चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावों को ऑफलाइन स्वीकार करने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश सेवा निवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन ने सोमवार को शास्त्री घाट, वरुणा पुल के पास धरना दिया। सुबह 11 से शाम पांच बजे तक चले धरने में बड़ी संख्या में पेंशनर शामिल हुए। उन्होंने शासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की मैनुअल व्यवस्था दोबारा शुरू करने की मांग की।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि अधिकतर पेंशनर उम्र के इस पड़ाव पर कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। सामान्य बीमारियों का खर्च वे स्वयं वहन कर लेते हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज में काफी धनराशि खर्च होती है। ऐसे मामलों में पहले विभाग के माध्यम से चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए बिल जमा करने की मैनुअल व्यवस्था थी। इससे पेंशनरों को इलाज पर खर्च हुई रकम का कुछ हिस्सा वापस मिल जाता था।
वक्ताओं के अनुसार, शासन ने नौ सितंबर 2026 को आदेश जारी कर एक अक्तूबर से चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मैनुअल दावे बंद कर ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य कर दिया। इसके बाद संबंधित विभागों ने ऑफलाइन बिल स्वीकार करना बंद कर दिया। इससे प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया प्रभावित हुई और पेंशनरों को इलाज पर खर्च की गई धनराशि पाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि इस समस्या को अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में हुई पेंशन सलाहकार समिति की बैठक में भी उठाया गया था। प्रांतीय नेतृत्व ने अधिकारियों को बताया था कि 60 से 90 वर्ष तक के बुजुर्ग पेंशनरों के लिए ऑनलाइन आवेदन करना आसान नहीं है। दूरदराज के गांवों में रहने वाले पेंशनरों को बिल ऑनलाइन कराने में भी दिक्कत होती है। ऐसे में विभागों में उपलब्ध कर्मचारियों और कंप्यूटर की मदद से ऑफलाइन बिल जमा करने की व्यवस्था जारी रखी जानी चाहिए। इससे आवेदन में आने वाली आपत्तियों का भी विभागीय स्तर पर निस्तारण हो सकेगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि बैठक में सरलीकरण का सुझाव देने और आश्वासन मिलने के बावजूद शासन ने ऑनलाइन व्यवस्था अनिवार्य रखी। इससे बीमार पेंशनरों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़ी फाइलें जिलों में लंबित पड़ी हैं। समय पर इलाज का खर्च नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं।
धरने के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर शासन की इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई गई। पेंशनरों ने मांग की कि ऑनलाइन आवेदन के साथ ऑफलाइन और मैनुअल दावे स्वीकार करने की व्यवस्था भी बहाल की जाए, ताकि बुजुर्गों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए परेशान न होना पड़े।
इनकी रही मौजूदगी
धरने को श्यामधनी, सीताराम, राकेश दीक्षित, उमाकांत पांडेय, निरंजन श्रीवास्तव, इंजीनियर राधेश्याम पटेल, महिमादत्त द्विवेदी, सहदेव तिवारी, अजय सिंह, गोपाल जी यादव, डॉ. रामअवतार यादव, डॉ. श्रीकांत पांडेय, प्रमोद श्रीवास्तव, राजेश पांडेय और अशोक सिंह आदि ने संबोधित किया। धरने की अध्यक्षता वीरेंद्र सिंह ने की और संचालन अशोक सिंह ने किया।