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वाराणसी : अब बाबा के अन्नपूर्णा भवन में निशुल्क प्रसाद पा सकेंगे श्रद्धालु
Tue, 14 Jun 2022 12:40 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Tue, 14 Jun 2022 12:40 PM IST
सार
भोजन प्रसाद की व्यवस्था श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शुरू की गई है। नवनिर्मत भोगशाला को अन्नपूर्णा भवन नाम दिया गया है।
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काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले दर्शनार्थी अब बाबा दरबार में प्रसाद भी ग्रहण कर सकेंगे। बाबा के धाम में श्रद्धालुओं के लिए सोमवार से बाबा का भंडारा शुरू हो गया। नवनिर्मित भोगशाला की शुरुआत श्रद्धालुओं को प्रसाद खिलाने के साथ हुआ।
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सोमवार को न्यास सदस्य ब्रज भूषण ओझा और काशी विद्वत परिषद के प्रो. रामनारायण द्विवेदी के आचार्यत्व में 51 ब्राह्मणों ने मंगलाचरण का पाठ किया। इकसे बाद आम श्रद्धालुओं के भोजन प्रसाद के लिए भोगशाला का शुभारंभ कर दिया गया। मंदिर प्रशासन ने नवनिर्मत भोगशाला को अन्नपूर्णा भवन नाम दिया है।
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मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि दोपहर की भोग आरती के पश्चात दर्शनार्थी बाबा के परिसर में शुद्ध और सात्विक प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। यह भोगशाला कालिका गली स्थित सरस्वती फाटक के पास बनाया गया है। जहां आसानी से श्रद्धालु दर्शन करने के उपरांत पहुंचकर प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे।
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नीलकंठ महादेव और अमृतेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालु कर सकेंगे पूजा पाठ
श्री काशी विश्वनाथ धाम में अब श्रद्धालु नीलकंठ महादेव और अमृतेश्वर महादेव का दर्शन कर सकेंगे। काशी खंडोक्त मंदिरों को जीर्णोद्धार के बाद सोमवार से आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया गया है। धाम के निर्माण के दौरान इन दोनों मंदिरों में आम दर्शनार्थियों का दर्शन-पूजन बंद चल रहा था, जमीन से लगभग 20 से 30 फीट नीचे दोनों मंदिर स्थित हैं।
सोमवार को मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा, न्यास सदस्य ब्रजभूषण ओझा और काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी की उपस्थिति में दोनों मंदिरों का पूजन-अर्चन किया गया। षोडशोपचार पूजन के बाद मंदिर को आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया गया।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि मंदिर में प्रकाश और हवा की व्यवस्था के लिए ही स्टील की जाली चारों ओर लगाई गई है वहीं स्टील की चादर से ही इन मंदिरों का छाजन बनाया गया है। सीढ़ियों पर किनारे की ओर स्टील की रेलिंग भी लगाई गई है ताकि दर्शनार्थी आसानी से इन को पकड़कर नीचे जा कर पूजा पाठ कर सकें।