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Varanasi News:आठ विषयों पर म्यांमार और संस्कृत विश्वविद्यालय मिलकर करेंगे शोध और अध्ययन

Thu, 16 May 2024 04:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2024 04:20 AM IST
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Varanasi News:Myanmar and Sanskrit universities will jointly research and study on eight subjects
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और म्यांमार के महावीर धम्मविनय विश्वविद्यालय के बीच आठ विषयों पर एमओयू होगा। इसमें दोनों विश्वविद्यालय संस्कृत, पाली, बौद्ध दर्शन, इतिहास, पुरातत्व, सामाजिक विज्ञान, पर्यटन और पांडुलिपि अध्ययन विषय पर मिलकर कार्य करेंगे। बुधवार को दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपति के बीच एमओयू के लिए अंतिम दौर की वार्ता हुई।
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म्यामांर के प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष डॉ. आशीष विज्जानंद ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की इस संस्था में समृद्ध संस्कृत शास्त्र का भंडार है। समृद्ध ग्रंथालय और संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह है। यहां से पाली सहित अन्य भाषाओं को समृद्ध बनाने की अनेक संभावनाएं हैं। इसलिए 234 वर्ष पुरानी इस संस्था से समझौता होने पर म्यांमार के अध्यापकों और विद्यार्थियों को लाभ होगा। बैठक में दोनों पक्षों ने संस्कृत अध्ययन, बौद्ध दर्शन और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न आयामों पर चर्चा की।
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संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि दोनों देशों के बीच शैक्षणिक समझौते से अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर संस्कृत और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। दोनों संस्थाओं से संस्कृतियों एवं भाषा विचारों का आदान-प्रदान होगा। इस एमओयू के तहत रिफ्रेशर कोर्स, ट्रेनिंग, वर्कशॉप और विभिन्न विषयों पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान उस दौरान प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग मौजूद रहे।
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शैक्षणिक और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम होंगे
समझौते के तहत व्याख्यान शृंखला, सांस्कृतिक और धार्मिक अध्ययन, संस्कृत और भारतीय ज्ञान प्रणाली के क्षेत्रों में अकादमिक आदान-प्रदान होगा। केंद्रीय पुस्तकालय, पुस्तकालय के बीच पुस्तकालय सुविधाओं का आदान-प्रदान होगा। इसके अलावा सहयोगी अनुसंधान योजना (प्रोजेक्ट), व्यावसायिक और नवाचार कार्यक्रम बढ़ाए जाएंगे। छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिए कार्यशालाएं होंगी। विद्यार्थियों के लिए रोजगापरक पाठ्यक्रम का संचालन किया जाएगा। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच सांस्कृतिक विनिमय किया जाएगा।
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